बांग्लादेश हाई कोर्ट ने ISKCON को आतंकी संगठन घोषित करने की याचिका खारिज की, सरकार की तैयारी हुई नाकाम
बांग्लादेश में हिंदू धर्म से जुड़ी एक प्रमुख संस्था ISKCON (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कंसियसनेस) को आतंकी संगठन घोषित करने की मांग को लेकर दायर याचिका को बांग्लादेश हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस मामले में बांग्लादेश सरकार ने ISKCON को धार्मिक कट्टरपंथी संगठन बताने का प्रयास किया था, लेकिन हाई कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। यह निर्णय बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल की दलीलों के बाद आया, जिन्होंने कहा था कि सरकार का यह मुद्दा प्राथमिक एजेंडा है और इसके लिए जरूरी तैयारी शुरू कर दी गई है।
ISKCON पर उठाए गए सवाल और सरकार की मंशा
बांग्लादेश सरकार की ओर से ISKCON को आतंकी संगठन घोषित करने की कोशिश की गई थी। बांग्लादेश सरकार ने ISKCON पर आरोप लगाया कि यह संगठन कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने के प्रयास में है और इसे नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने की बात की थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार की मंशा को नकार दिया। अदालत ने कहा कि इस प्रकार के आरोपों को बिना ठोस प्रमाण के आगे बढ़ाना उचित नहीं है।
भारतीय सहयोग और ISKCON की भूमिका
बांग्लादेश की स्वतंत्रता के समय की एक महत्वपूर्ण घटना को याद करते हुए कहा जाता है कि जिस समय बांग्लादेश के कट्टरपंथियों को खाने-पीने की दिक्कतें आ रही थीं, उस समय ISKCON के मंदिरों ने बांग्लादेश के लोगों को न केवल शरण दी थी बल्कि उन्हें भोजन और पानी भी प्रदान किया था। यह ISKCON की मानवता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है, और इसके बाद से यह संस्था बांग्लादेश में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
भारत ने हमेशा ISKCON का समर्थन किया है, और बांग्लादेश के कट्टरपंथी तत्वों द्वारा इस संस्थान के खिलाफ उठाए गए कदमों को लेकर चिंता जताई है। यह घटना बांग्लादेश और भारत के बीच धार्मिक समझौतों की प्रकृति को और भी जटिल बनाती है, जहाँ एक ओर धार्मिक संस्थाएं मानवता की सेवा में लगी हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक रूप से प्रेरित ताकतें उन्हें आतंकवादी गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास करती हैं।
बांग्लादेश सरकार की आलोचना और भविष्य की दिशा
बांग्लादेश की नई सरकार के खिलाफ उठ रहे विरोधों के बीच, आलोचकों का कहना है कि यह सरकार हिंदू समुदाय के खिलाफ अपनी नीतियों को बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। ISKCON जैसे संस्थाओं पर आरोप लगाना और धार्मिक सशक्तिकरण के मामलों में संलिप्तता दिखाना, बांग्लादेश के भविष्य के लिए खतरनाक हो सकता है। कई राजनीतिक और धार्मिक संगठन मानते हैं कि बांग्लादेश की सरकार को इस प्रकार के भेदभावपूर्ण कदम उठाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे सामाजिक समरसता पर असर पड़ सकता है।
भारत का कड़ा रुख और भविष्य की संभावना
भारत में इस फैसले को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है। भारतीय नेताओं ने कहा कि बांग्लादेश की सरकार को समझना चाहिए कि ISKCON जैसी संस्थाएं केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय कार्यों में भी सक्रिय हैं। ISKCON द्वारा बांग्लादेश के संकट के समय में जो मदद दी गई थी, वह एक उदाहरण है कि यह संस्था किसी भी धार्मिक और राजनीतिक मुद्दे से ऊपर उठकर मानवता की सेवा करती है।
भारत ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि बांग्लादेश को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए, अन्यथा इसका परिणाम दोनों देशों के रिश्तों में खटास का कारण बन सकता है। भारतीय समाज में ISKCON को लेकर गहरी श्रद्धा और सम्मान है, और इसे आतंकवादी संगठन के रूप में देखना न केवल धार्मिक रूप से गलत है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा कर सकता है।
बांग्लादेश में ISKCON को आतंकी संगठन घोषित करने की याचिका को खारिज करने के बाद, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बांग्लादेश सरकार अपनी नीतियों में बदलाव करती है और अपनी सख्त धार्मिक नीतियों के तहत हिंदू धार्मिक संस्थाओं को दबाने का प्रयास जारी रखती है। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की स्थिति और इन संस्थाओं का योगदान भविष्य में बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।