वृंदावन की महिलाएं: भक्ति और रोजगार से आत्मनिर्भरता की ओर
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वृंदावन की महिलाएं: भक्ति और रोजगार से आत्मनिर्भरता की ओर
वृंदावन और मथुरा की महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। सरकार और विश्व बैंक की मदद से शुरू हुई योजनाओं ने इन्हें न केवल भगवान के पोशाक बनाने का अवसर दिया है, बल्कि वेस्ट फ्लावर से बने गुलाल, अगरबत्ती और अन्य उत्पादों का व्यवसाय भी शुरू करने का मौका मिला है। इस योजना के तहत महिलाएं न केवल धार्मिक वस्त्र तैयार करती हैं, बल्कि अगरबत्ती, इत्र, धूप-बत्ती और गुलाल भी बनाती हैं।
विश्व बैंक द्वारा सहायतित 'प्रो पुअर योजना' के तहत महिलाओं को सिलाई मशीन, कैंची और अन्य आवश्यक उपकरण प्रदान किए गए हैं। इसके माध्यम से महिलाएं भगवान के पोशाक तैयार कर उन्हें बेचकर अपनी आजीविका कमा रही हैं। इसके अलावा, उन्हें वेस्ट फ्लावर से विभिन्न उत्पादों के निर्माण की ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
दस स्वयं सहायता समूहों को वेस्ट फ्लावर से उत्पाद बनाने का जिम्मा सौंपा गया है, जो रतनछत्री, वृंदावन में प्रोडक्शन कर रहे हैं। इससे महिलाएं न केवल अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त भी हो रही हैं। ये महिलाएं अब खुद को सिर्फ घरेलू भूमिका तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर समाज में एक नई पहचान बना रही हैं।
सरकार की योजनाओं के तहत प्रशिक्षित महिलाओं ने अपनी मेहनत और भक्ति के साथ रोजगार के नए स्रोत खोले हैं, जो उनके लिए एक स्थिर और सम्मानजनक आजीविका का रास्ता बना रहे हैं।