“परंवैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्” का वाक्य ही संघ कार्य का आधार – रामदत्त चक्रधर जी
जबलपुर। विभाग का तीन दिवसीय शताब्दी युवा शिविर श्रीराम महाविद्यालय परिसर में अनुशासित, प्रेरणादायी एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। शिविर के समापन समारोह में मुख्य अतिथि सरदार महेंद्र सिंह जी, प्रांत संघचालक डॉ. प्रदीप दुबे जी, विभाग संघचालक कैलाश गुप्ता जी मंचासीन रहे। कार्यक्रम का प्रारंभ शिविरार्थियों द्वारा आकर्षक शारीरिक प्रदर्शन एवं घोष वादन […] The post “परंवैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्” का वाक्य ही संघ कार्य का आधार – रामदत्त चक्रधर जी appeared first on VSK Bharat.
जबलपुर। विभाग का तीन दिवसीय शताब्दी युवा शिविर श्रीराम महाविद्यालय परिसर में अनुशासित, प्रेरणादायी एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। शिविर के समापन समारोह में मुख्य अतिथि सरदार महेंद्र सिंह जी, प्रांत संघचालक डॉ. प्रदीप दुबे जी, विभाग संघचालक कैलाश गुप्ता जी मंचासीन रहे।
कार्यक्रम का प्रारंभ शिविरार्थियों द्वारा आकर्षक शारीरिक प्रदर्शन एवं घोष वादन से हुआ। इसके पश्चात एकल गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति ने वातावरण को देशभक्ति और संस्कारों से ओतप्रोत कर दिया। मुख्य अतिथि सरदार महेंद्र सिंह जी ने संघ के अनुशासन, संगठन क्षमता एवं राष्ट्रनिष्ठ कार्यपद्धति की सराहना की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता बताते हुए पॉलिथीन का उपयोग न करने का आवाहन किया तथा प्रकृति संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया।
मुख्य वक्ता अखिल भारतीय सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर जी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को राष्ट्रकार्य करते हुए सौ वर्ष पूर्ण हो गए हैं। 1925 में जब संघ का कार्य प्रारंभ हुआ, तब स्वयंसेवक के रूप में पूजनीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी व कुछ अन्य थे। आज लाखों स्वयंसेवक देश के कोने-कोने में सक्रिय हैं।
उन्होंने स्मरण कराया कि पूजनीय रज्जू भैया कहा करते थे कि देश में लगभग 50 लाख स्वयंसेवक हैं – कुछ सक्रिय, कुछ अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए। हाल ही में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर देशभर में लगभग 33 लाख स्वयंसेवक गणवेश में एकत्रित हुए, जो संगठन की व्यापकता और जीवंतता का परिचायक है।
उन्होंने बताया कि प्रारंभ में नागपुर की मोहिते की शाखा के रूप में एक ही शाखा थी, जबकि आज देशभर में लगभग 83 हजार शाखाएँ संचालित हो रही हैं। उस समय केवल एक संगठन था, परंतु आज संघ की प्रेरणा से अखिल भारतीय संगठन विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं, जिनके अंतर्गत 400 से अधिक छोटे-बड़े संगठन राष्ट्र सेवा में संलग्न हैं।
उन्होंने संघ के मूल उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि संघ की प्रार्थना में प्रतिपादित वाक्य – “परंवैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्” – ही उसके कार्य का आधार है। अर्थात् राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जाना, उसकी सर्वांगीण उन्नति सुनिश्चित करना ही संघ का ध्येय है। यदि भारत की सर्वांगीण उन्नति की कल्पना की जाए, तो वह कैसा राष्ट्र होगा – समृद्ध, सशक्त, संस्कारित और आत्मविश्वासी।
शिविर में “पंच परिवर्तन” एवं संघ के 100 वर्षों की यात्रा पर आधारित एक भव्य प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। प्रदर्शनी के मध्य में भारत माता का सुसज्जित चित्र स्थापित किया गया था। कार्यक्रम में महानगर के अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। समापन सत्र में राष्ट्रगान के साथ शिविर का विधिवत् समापन हुआ।
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