भारत के संविधान की मूल प्रति में भी प्रभु श्रीराम समाए हुए हैं – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी

वर्ष प्रतिपदा पर श्री राम जन्मभूमि मन्दिर में श्रीराम यन्त्र की स्थापना अयोध्या, 19 मार्च। नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर श्री राम जन्मभूमि मन्दिर में राष्ट्रपति ने श्रीराम यन्त्र की स्थापना की। मन्दिर परिसर में वर्ष प्रतिपदा समारोह के मंच से श्री राम जन्मभूमि मन्दिर परिपूर्ण होने की घोषणा की गई। कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी […] The post भारत के संविधान की मूल प्रति में भी प्रभु श्रीराम समाए हुए हैं – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी appeared first on VSK Bharat.

Mar 24, 2026 - 10:12
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भारत के संविधान की मूल प्रति में भी प्रभु श्रीराम समाए हुए हैं – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी

वर्ष प्रतिपदा पर श्री राम जन्मभूमि मन्दिर में श्रीराम यन्त्र की स्थापना

अयोध्या, 19 मार्च। नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर श्री राम जन्मभूमि मन्दिर में राष्ट्रपति ने श्रीराम यन्त्र की स्थापना की। मन्दिर परिसर में वर्ष प्रतिपदा समारोह के मंच से श्री राम जन्मभूमि मन्दिर परिपूर्ण होने की घोषणा की गई।

कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी ने कहा कि प्रभु श्रीराम को नमन करना और भारत माता को नमन एक ही है। राष्ट्रपति ने निर्धारित समय पर राममंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यन्त्र का स्थापना पूजन किया। तदोपरांत उन्होंने श्री राम सभा और श्री रामलला का पूजन व आरती की।

समारोह मंच पर राष्ट्रपति के पहुंचने पर शहनाई वादक लोकेश आनन्द और‌ बांसुरीवादक प्रवीण कुमार की टोली ने सुमधुर स्वर लहरी से उनका सत्कार किया। तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष गोविन्द देव गिरि जी ने ट्रस्ट की ओर से राममंदिर परिपूर्ण होने की घोषणा की। साथ ही पूर्ण और परिपूर्ण का अन्तर भी बताया। ध्वजारोहण के साथ मन्दिर पूर्ण हुआ था, लेकिन परिपूर्णता मिली श्रीराम नाम यन्त्र स्थापित होने से। उन्होंने राष्ट्रपति महोदया की तुलना धर्मप्राण रानी अहिल्याबाई होल्कर से की और धर्मकार्य में दोनों को एक जैसा बताया। उन्होंने कार्यक्रम में पधारे सभी कार्यकर्ताओं का भी अभिनन्दन किया और कहा कि इन्हीं लोगों ने प्राणप्रण से जुटकर संघर्ष कर, धन संग्रह कर मन्दिर को परिपूर्णता दिलाई। उन्होंने पत्थर तराशने वालों से लेकर, निर्माण में सहयोग देने वाले हाथों को भी याद किया और सराहना की। साथ‌ ही कहा कि आप‌ लोगों के कारण ही यह मन्दिर भव्य रूप से खड़ा हुआ है, अब मन्दिर के माध्यम से राष्ट्र खड़ा होने वाला है। मन्दिर तो असंख्य हैं, लेकिन यह अस्मिता का मन्दिर है।

माता अमृतानंदमयी अम्मा ने कहा कि राम परिपूर्णता के परिचायक हैं। राम और कृष्ण दोनों ही हर परिस्थिति में धर्मनिष्ठ बने रहे। उन्होंने बच्चों में अच्छे संस्कार रोपित किए जाने पर बहुत से उद्धरण देते हुए सारगर्भित बातें कही। लवकुश का महर्षि वाल्मीकि के आश्रम‌ में जन्म तदनुरूप पालन पोषण, प्रभु श्रीराम को पाने योग्य बनने की तैयारी के संबंध में बताया। साथ ही मंथरा-कैकेयी प्रसंग का उल्लेख करके हुए भरत के माध्यम से दायित्वबोध, राजा-प्रजा संबंध, राज्य संचालन संबंधी कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। श्री राम यन्त्र पर उन्होंने कहा कि यह बाहर के इंटरनेट को अपने अंदर के इंटरनेट की ओर ले जाने का माध्यम है। सृष्टा ही सृष्टि है जैसे गहने में सोना और सोने में गहना।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्वप्रथम सभी को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। अवधपुरी की महिमा बखानी। अंधविश्वासी बताने वालों पर कटाक्ष करते हुए भगवान श्री राम, पुण्यसलिला सरयू और अयोध्या को आनन्द विभोर करने वाला बताया। कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि मन्दिर के लिए सत्ता से निरन्तर संघर्ष चलता रहा। अंततः राम मन्दिर राष्ट्र मंदिर का प्रतीक बन गया। उन्होंने वर्तमान परिदृश्य पर कहा कि संसार में भय और अराजकता का वातावरण है, किन्तु हम भविष्य के रामराज्य की अनुभूति कर रहे हैं। उद्यमिता से हम सभी ने एक भारत श्रेष्ठ भारत का भाव बनाए रखा है। कुम्भ, अयोध्या, काशी, मथुरा वृन्दावन जैसे आस्था केन्द्रों पर गत वर्ष 156 करोड़ से अधिक पर्यटक आ चुके हैं। जिस नयी पीढ़ी पर दिग्भ्रमित होने का आरोप लगता है, वह नये वर्ष पर परिवार के साथ मन्दिरों में जा रही है। मन्दिर आंदोलन के पुरोधा अशोक सिंघल का स्मरण करते  हुए उन्होंने किसी भी प्रकार से सहयोग करने वाले कार्यकर्ताओं का उल्लेख किया और उनके  योगदान को सराहा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी ने संबोधन का प्रारम्भ जय श्रीराम से किया। रामायण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्वयं भगवान श्रीराम ने कहा है कि अयोध्या उन्हें अतिशय प्रिय है। भारत के संविधान की मूल प्रति में भी प्रभु श्रीराम समाए हुए हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि हम विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं, संभव है कि 2047 से पहले ही हम लक्ष्य प्राप्त कर लें।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भय्याजी जोशी भी मंच पर उपस्थित थे। कार्यक्रम पश्चात सभी आमन्त्रितों को बैठने के क्रमानुसार ही दर्शन कराया गया।

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