महाकुंभ 29 जनवरी को भगदड़ का गुनहगार कौन
Who is the culprit of Mahakumbh 2025 stampede, महाकुंभ 2025 भगदड़ का गुनहगार कौन, फिलहाल कागज पर कोई ज़िम्मेदार नहीं, मगर कुछ चेहरे हैं जिन पर बात करनी जरूरी सी लगती है| - मेला अधिकारी विजय किरण आनंद| - प्रयागराज महाकुंभ मेले के एसएसपी राजेश द्विवेदी| - कमिश्नर विजय विश्वास पंत | - महाकुंभ मेले के डीआईजी वैभव कृष्ण पर|महाकुंभ 2025, प्रयागराज भगदड़, 29 जनवरी हादसा, कुंभ मेला सुरक्षा, भगदड़ का कारण, प्रशासनिक लापरवाही, श्रद्धालुओं की भीड़, महाकुंभ हादसा, प्रयागराज ट्रैफिक व्यवस्था, सुरक्षा चूक
महाकुंभ 29 जनवरी को भगदड़ का गुनहगार कौन
फिलहाल कागज पर कोई ज़िम्मेदार नहीं, मगर कुछ चेहरे हैं जिन पर बात करनी जरूरी सी लगती है| - मेला अधिकारी विजय किरण आनंद| - प्रयागराज महाकुंभ मेले के एसएसपी राजेश द्विवेदी| - कमिश्नर विजय विश्वास पंत | - महाकुंभ मेले के डीआईजी वैभव कृष्ण पर|
हवालदार से लेकर सिपाही इंस्पेक्टर सेलेकर थानेदार और डीएम से लेकर सीएम पीएम तक कोई तो बताएगा ना भाई साहब किसकी जिम्मेदारी थी किसकी वजह से इतने सारे लोग काल की गालमें जमा गए बहुत ज्यादा हैआजन भेजिए हमारा देश भारत गजब का देश हैभाई साहब यहां पर अगर इतना सा अच्छा कामहो जाए तो टी से लेकर अखबार और अधिकारी सेलेकर सरकार तक को पता होता है कि क्रेडिटकहां किसको देना लेकिन अगर कहीं कुछ गलतहो जाए तो उस पर जिम्मेदारी लेने की बाततो बहुत दूर की बात है उस विषय पर पर्देदारी शुरू हो जाती है सारी कोशिशें होतीहै कि इस मामले को दबा दिया जाए दबा नापाए तो कम से कम बताया जाए ई है उसका किसीवयो में किसी चैनल में कलिटी का ही नहींकुछ ले जाया जा रहा है
भगदड़ के जोनिशानिया है उसको हटाया जा रहा हैवारि है इसका मतलब ये लोग कहां चले और यहीसब कुछ महाकुंभ की भगदड़ के मामले में भीहो रहा है बेहिसाब भीड़ कैसे एक जगह परजमा हुई इसकी किसी की जिम्मेदारी नहींभीड़ क्यों नहीं मैनेज हुई किसी कीजिम्मेदारी नहीं है भीड़ के कई लोगबैरिकेड के पास क्यों सो गए किसी कीजिम्मेदारी नहीं भीड़ से ही लोग बैरिकेड फाने लगे उसका कोई जिम्मेदार नहीं बैरिकेडसोते हुए लोगों पर गिरा कोई जिम्मेदारनहीं लोगों को बताया गया कि नागा साधुओं का जत्था जो है आ रहा है वह भागने लगे यअफवा कैसे फैली कोई जिम्मेदार नहीं बैरिकेड में लोग दबे भगदड़ मची भगदड़ मेंलोग मरे लेकिन कोई भी जिम्मेदार नहीं औरजब कोई जिम्मेदार नहीं है
तो फिर मुझे यादआ गई वह फिल्म जिसका नाम था नो वन किलजेसिका हा ऐसे यहां परभी कोई जिम्मेदार नहीं आप खुद सोचिए कि भगदड़ में लोग मर गए सरकारी आंकड़ा अपनीजगह पर है मगर फिर भी जितने लोगों की मौतहुई उनकी संख्या बताने के लिए डीएम और मेला क्षेत्र के डीआईजी जब कैमरो के सामनेआए तो उन्होंने भी बड़ी बारीकी से इस बातको छुपा दिया कि भगदड़ जो थी वह सिर्फसंगम नोच पर नहीं बल्कि झूसी के पास भीहुई थी श की दुखद मृत्य हो गई है और वहांजो हुई थी वो कोई छोटी मोटी भगदड़ नहीं थीभगदड़ में छूट गए लोगों के आखिरी सामानजिस तरह से ट्रैक्टरों में भर भर के हटाएगएऐसा लगा किसी की जिम्मेदारी ही नहीं थीक्योंकि अगर किसी की जिम्मेदारीहोती तो कोई तो होता जो आकर बताता किभगदड़ हुईहै लेकिन बड़ी सफाई से उसेछिपाया जो तस्वीरें आई व हदय विदारक थीक्योंकि किसी का चप्पल छूटा था तो किसी काआधार कार्ड जिनके पाव में चप्पल रही होगीजिनके बदन पर यह कपड़े रहे होंगे और जोसूचियों में खोजे जा रहे होंगे अब आपसोचते रहिए कि कैसे दिखते होंगे उनकेचेहरेमतलब हवालदार से लेकर सिपाही इंस्पेक्टर से लेकर थानेदार और डीएम से लेकर सीएम पीएम तक कोई तो बताएगा ना भाई साहब कि किसकी जिम्मेदारी थी किसकी वजह से इतने सारे लोग काल की गालमें समागए बहुत ज्यादा है आज जो विन निवेदन को र्सभेजिए स अगर एक भी मौत होती है तो यह आपको समझना पड़ेगा कि वह व्यक्ति की मौत नहींहोती उसके परिवार की मौत होती है और यहां तो अनगिनत उदाहरण है लखनऊ केत्रिभुवन पांडे पत्नी को महाकुंभ में डुबकी लगवाने ले गए थे
पत्नी जिद कर रहीथी कि 144 साल के बाद मुहूर्त आया है भगवान जाने फिर इस तरह का मुहूर्त देखने को मिले ना मिले जीवन में वह कह रही थी किबड़े भाग्य से यह स्नान आया है भाग्य से ऐसा मौका मिला है लेकिन अफसोस कि मंजू पांडे को स्नान करने का मौका नहीं मिला जोस्नान करने गई थी वो अब शमशान पहुंच गई हैअनगिनत कहानिया है कोई अपनी मा को तलाशरहा है कोई भाई को कोई बाप अपने बेटे कोतो कोई बेटा अपने पिता को हर तरफ बद हवासीछाई थी लेकिन सवाल फिर वही बरकरार है किभाई साहब जिम्मेदार कौन है कम से कम कागजपर अब तक किसी का नाम नहीं आया हां कुछचेहरे जरूर है जिन पर हमें लगता है कि बातकरनी चाहिए क्योंकि अगर हम भी बात नहींकरेंगे तो यह लगेगा कि जिस पेशे में हमहै उसे इंसाफ नहीं कर रहे तो पहला नामलेते हैं मेला अधिकारी विजय किरण साहबमेला अधिकारी विजय किरण आनंद को बढ़तीभीड़ का अंदाजा था
लेकिन गलत फैसला लिया27 जनवरी से मौनी अमावस्या के ट्रायल केतौर पर पीपा पुल को बंद करने का आदेश दियागया कहा जा रहा है कि यहां पर 30 पीपा पुलहै लेकिन 2728 को ज्यादातर पुल बंद थेज्यादातर पुल बंद होने की वजह से भीड़इकट्ठा हुई और अगर सारे पीपा पुल खुलेहोते तो श्रद्धालु शायद आसानी से एक जगहसे दूसरी जगह जाते भीड़ भी मेले से बाहरजाती साहब की गलती थी लेकिन इनकीजिम्मेदारी पर कोई चर्चा नहीं दूसरा नामप्रयागराज महाकुंभ मेले के एसएसपी राजेशद्विवेदी साहब का संगम नोज इलाके में भीड़ना बढ़ने देने की जो जिम्मेदारी थी वहइन्हीं जनाब की थी मौनी अमावस्या के मौकेपर अमृत स्नान के दौरान साधुओं को स्नानकराने का इंतजाम भी इन्हीं के जिम्मे था27 जनवरी से बढ़ती भीड़ देखने के बावजूदद्विवेदी साहब ने 29 जनवरी के लिए संगमनोज पर भीड़ को मैनेज नहीं किया लेकिन इनपर भी अब तक कोई जिम्मेदारी नहीं मि हैतीसरे अफसर जिनकी मैं बात कर रहा हूं
उनका नाम कमिश्नर विजय विश्वास पंत 8 जनवरी कीदेर रात संगम नोज पर कमिश्नर विजय विश्वासपंत उन लोगों को चेतावनी दे रहे थे वीडियोवायरल हुआ था जो सोत है खत है सभी शल सुनले यहां लेटे रहने से कोई फायदा नहीं हैजो सोवत है सो खोत है उठिए उठिए स्नानकरिए लेकिन सवाल अब यह उठ रहा है कि अगरप्रशासन को भीड़ बढ़ने का अंदाजा हो गयाथा तो फिर फ इंतजाम दुरुस्त करने फोर्सबढ़ाकर भीड़ को नियंत्रण करने और आने जानेके रास्तों को कंट्रोल करने केलिए माइक का ऐलान क्यों हो रहा था यहां परइंतजाम क्यों नहीं थे क्यों नहीं इन्होंनेएसएसपी राजेश द्विवेदी से बात की और अगरकी तो फिर किसकी जिम्मेदारी है और आखिरीसवाल महाकम मेले के डीआईजी वैभव कृष्ण परमहाकम के डीआईजी वैभो कृष्ण पर मेले केसभी इंतजाम की जिम्मेदारी थी
28 जनवरी कोवीडियो भी जारी किया था श्रद्धालुओं सेकहा था गंगा घाटों पर भीड़ से बचे और समयपर स्नान करें लेकिन जब बाद में छानबीनहुई तो पता चला कि ना तो आने जाने की लेनठीक से चल रही थी ना भीड़ को संगम नोज परइकट्ठा होने सोने से रोका गया मौनी मावसजैसे मौके पर कंट्रोल रूम को सतर्क होनाचाहिए था कंट्रोल रूम के क्योंकिजिम्मेदार खुद डीआईजी वैभव कृष्ण है ऐसेमें सवाल उन पर भी है कि उनकी नजर से संगमनोज पर बढ़ती भीड़ और सोते लोग कैसे छूटगए भगदड़ के बाद जो कंट्रोल रूम काम करतानजर आया पा मिनट में एंबुलेंस पहुंच गई
वभगदड़ से पहले कहां था दुर्घटना से पहलेक्यों सतर नहींथा सच कहे तो सवालों का समंदर उमड़ पड़ाहै जवाब के नाम पर शून्य है लेकिन हम फिरसारे सवालों को जोड़कर एक ही सवाल पूछ रहेहैं कि महाकुंभ में आस्थावान लोगों की मौतका जिम्मेदार कौन है किसकी जवाब देही औरकौन बताएगाये गुनहगार कौन है