सरबजीत सिंह के हत्यारे सरफराज की गोली मारकर हत्या
पाकिस्तान पुलिस ने दावा किया था कि तरनतारण के गांव भिखीविंड का रहने वाला सरबजीत सिंह भारतीय एजेंसियों का जासूस
सरबजीत सिंह के हत्यारे सरफराज की गोली मारकर हत्या
लाहौर के इस्लामपुरा इलाके में मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने बनाया निशाना
सूत्रों ने बताया कि ताम्बा पर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने पाकिस्तान में लाहौर के इस्लामपुरा इलाके में हमला किया और उसे नाजुक हालत में एक अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
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सरबजीत सिंह का जीवन: सरबजीत सिंह एक भारतीय किसान थे, जो पाकिस्तान के सीमा पार गए और गिरफ्तार हो गए थे। उनके परिवार में पत्नी और दो बेटियां थीं।
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गलतफहमी और गिरफ्तारी: 1990 में सरबजीत को पाकिस्तान में कई बम विस्फोटों में शामिल होने का दोषी करार दिया गया था, लेकिन उनके परिवार का कहना था कि वह गलतफहमी का शिकार हो गए थे और अनजाने में सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गए थे।
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रिहाई के लिए संघर्ष: सरबजीत की बहन ने उनकी रिहाई के लिए लगातार पैरवी की, लेकिन उन्हें मौत की सजा सुनाई गई।
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अज्ञात हत्या: उनकी मौत के बाद, उन्हें लाहौर में अज्ञात बंदूकधारियों ने हत्या कर दिया। इस हमले के पीछे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संगठन में संलिप्त थे।
पाकिस्तान में सरबजीत सिंह की हत्या का मामला एक नया मोड़ ले गया है। उन्हें गोली मारकर हत्या किए जाने की खबर सामने आई है। यह घटना उनके परिवार और भारतीय समुदाय के लिए अत्यंत दुखद है। रणदीप हुड्डा जैसे बॉलीवुड स्टार ने इस हत्या के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने साराबजीत सिंह के किरदार को निभाते हुए अपनी बेहतरीन प्रस्तुति के माध्यम से लोगों के दिलों में जगह बनाई थी।
इस हत्या की घटना ने भारत-पाकिस्तान संबंधों की भावनाओं को छूने का मौका दिया है। साथ ही, इससे सुरक्षा के मामले पर भी गहरा सोचा जा रहा है। इस मामले में न्याय के लिए कठिन प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि शहीद को न्याय मिल सके।
पाकिस्तान की जेल में भारतीय कैदी सरबजीत सिंह की हत्या के आरोपी और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के करीबी सहयोगी आमिर सरफराज ताम्बा की रविवार को लाहौर में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि ताम्बा पर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने पाकिस्तान में लाहौर के इस्लामपुरा इलाके में हमला किया और उसे नाजुक हालत में एक अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। कड़ी सुरक्षा वाली कोट लखपत जेल के अंदर, ताम्बा सहित अन्य कैदियों द्वारा किए गए बर्बर हमले के कुछ दिनों बाद सरबजीत सिंह (49) की दो मई 2013 की सुबह लाहौर के जिन्ना अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई थी। हमले के बाद करीब एक हफ्ते तक सिंह अचेत रहे थे। ताम्बा का जन्म 1979 में लाहौर में हुआ था और वह लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक का करीबी सहयोगी है।
पाकिस्तानी कैदियों के एक समूह ने सरबजीत सिंह पर ईंट और लोहे की छड़ों से हमला किया था। 2018 में एक अतिरिक्त जिला
एवं सत्र न्यायाधीश ने सेंट्रल जेल, कोट लखपत में भारतीय जासूस सरबजीत सिंह की हत्या के आरोप से दो लोगों को बरी कर दिया था जिनमें ताम्बा भी शामिल था। पंजाब के तरनतारण भिखीविंड निवासी सरबजीत 30 अगस्त 1990 की शाम भारतीय सीमा पार करके पाकिस्तान चला गया था।

बाद में उसे पाकिस्तान पुलिस ने इस्लामाबाद में हुए बम धमाकों के मामले में गिरफ्तार किया। पाकिस्तान पुलिस ने दावा किया था कि तरनतारण के गांव भिखीविंड का रहने वाला सरबजीत सिंह भारतीय एजेंसियों का जासूस है। सरबजीत को कई बम विस्फोटों में संलिप्त रहने का कथित तौर पर दोषी पाया गया था और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी।