गाजियाबाद में RSS-BJP की समन्वय बैठक: योगी आदित्यनाथ रहे शामिल, अंबेडकर जयंती को भव्य रूप से मनाने की योजना
RSS BJP coordination meeting in Ghaziabad गाजियाबाद में RSS-BJP की समन्वय बैठक: योगी आदित्यनाथ रहे शामिल, अंबेडकर जयंती को भव्य रूप से मनाने की योजना
गाजियाबाद में RSS-BJP की समन्वय बैठक: योगी आदित्यनाथ रहे शामिल, अंबेडकर जयंती को भव्य रूप से मनाने की योजना
गाजियाबाद के नेहरू नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की समन्वय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी सहित संघ और भाजपा के कई शीर्ष पदाधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के प्रमुख बिंदु:
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डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम के संपूर्ण उपयोग पर जोर
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बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अंबेडकर का नाम उनके संपूर्ण नाम "भीमराव रामजी अंबेडकर" के साथ लिखा और बोला जाए।
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अंबेडकर की छवियों में विविधता लाने और उनके सम्मान में "आदरणीय" जैसे शब्द जोड़ने पर चर्चा हुई।
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अंबेडकर जयंती को भव्य रूप से मनाने का निर्णय
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आगामी 14 अप्रैल को पूरे प्रदेश में अंबेडकर जयंती बड़े पैमाने पर मनाई जाएगी।
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इस दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें उनकी विचारधारा को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाएगा।
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भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पर चर्चा
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बैठक में भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर चर्चा हुई।
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जल्द ही पार्टी प्रदेश स्तर पर नेतृत्व में बदलाव कर सकती है।
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चुनावी रणनीति और जातिगत समीकरणों पर मंथन
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2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को सपा के पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) गठबंधन से चुनौती मिली थी।
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बैठक में भाजपा के परंपरागत वोट बैंक को मजबूत करने और नए मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति पर विचार किया गया।
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संघ और भाजपा के समन्वय को मजबूत करने पर जोर
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बैठक में RSS और भाजपा के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
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भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और RSS के मेरठ व ब्रज क्षेत्र के पदाधिकारी इसमें शामिल हुए।
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बैठक में शामिल प्रमुख हस्तियां:
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी
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RSS के मेरठ और ब्रज क्षेत्र के प्रमुख पदाधिकारी
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6 राष्ट्रीय और 50 प्रदेश स्तरीय संघ पदाधिकारी
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36 अनुषांगिक संगठनों के प्रतिनिधि
वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक पर लोकसभा में चर्चा, अमित शाह ने किया बचाव
लोकसभा में बुधवार को वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वक्फ एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ है किसी संपत्ति को धार्मिक उद्देश्यों के लिए दान करना। शाह ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक मुसलमानों की धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप के लिए नहीं, बल्कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है।
अमित शाह के मुख्य बयान:
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वक्फ संपत्तियों का ऑडिट होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
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सरकारी संपत्ति को वक्फ घोषित करने की प्रक्रिया की जांच होगी।
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विपक्ष इस विधेयक को गलत तरीके से प्रस्तुत कर अल्पसंख्यकों को गुमराह कर रहा है।
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यह विधेयक केवल वक्फ संपत्तियों के उचित प्रबंधन और विवाद निपटाने के लिए लाया गया है।
विपक्ष ने जताई आपत्ति
कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध किया और इसे असंवैधानिक बताया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अल्पसंख्यकों की संपत्ति पर नजर गड़ाए हुए है और इस कानून के जरिए हस्तक्षेप करना चाहती है। विपक्ष का कहना है कि सरकार अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बना रही है और उनकी संपत्तियों पर कब्जा करने की योजना बना रही है।
RSS और भाजपा की गाजियाबाद बैठक में राजनीतिक समन्वय, अंबेडकर जयंती की भव्य तैयारी और चुनावी रणनीति पर चर्चा की गई। वहीं, लोकसभा में वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक को लेकर तीखी बहस हुई, जिसमें सरकार और विपक्ष ने अपने-अपने तर्क रखे। अब देखना होगा कि यह विधेयक आगे कैसे आगे बढ़ता है और भाजपा की नई रणनीति उत्तर प्रदेश की राजनीति को किस दिशा में ले जाती है।