जातियों को एक सूत्र में पिरोने के लिए 'हम' की भावना से करें काम'
प्रशिक्षण वर्ग के समापन पर दीनदयाल शोध संस्थान के पदाधिकारियों को भय्याजी जोशी ने किया संबोधित
प्रभु श्रीराम की तपोभूमि में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के देशभर के प्रांत प्रचारकों में तीन दिन तक चले मंथन में यह बात निकल कर आई कि समाज में 'मैं' नहीं बल्कि 'हम' की भावना के साथ काम करना है। संघ पालक भय्याजी जोशी ने कहा कि हिंदू समाज को संगठित करने की जरूरत है। जातियों में बंटे समाज को एक सूत्र में पिरोने के लिए 'हम' की भावना जरूरी है, तभी समाज व राष्ट्र सशक्त बन सकेगा।
तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन गुरुवार को उद्यमिता विद्यापीठ के लोहिया सभागार में तीन सत्र में संघ पालक भय्याजी जोशी ने प्रांत प्रचारकों को समाज में काम करने का मूलमंत्र दिया। इसके बाद दीनदयाल शोध संस्थान के पदाधिकारियों से समाज में आ रहे परिवर्तन का फीड बैक लिया। उन्होंने संस्थान के कार्यकर्ताओं से पूछा कि समाज में अभी तक जो काम किया है, उससे व्यक्ति का सोच, चरित्र और व्यक्तित्व में क्या परिवर्तन हुआ, उसका आकलन करें।
उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश के लिए समग्रता के साथ सोचने की आवश्यकता है। कहा कि 'हम' मूलमंत्र से ही पंचशील के पांच सिद्धांत, एक दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की पारस्परिक मान्यता, अनाक्रमण संधि, एक दूसरे के घरेलू मामलों में हस्तक्षेप न करना, समानता के साथ-साथ पारस्परिक लाभ और शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व पर काम हो सकता है।
संघ पालक के अलावा अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्वांत रंजन और सह प्रचार प्रमुख अरुण जैन का भी मार्गदर्शन प्रांत प्रचारकों को मिला।