यूपी में हिंदू एकजुट, देशभर में ऐसी ही जरूरत : डा. मोहन भागवत
Hindus are united in UP similar is needed across the country Dr Mohan Bhagwat: यूपी में हिंदू एकजुट, देशभर में ऐसी ही जरूरत : डा. मोहन भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
यूपी में हिंदू एकजुट, देशभर में ऐसी ही जरूरत : डा. मोहन भागवत
बोले, हिंदू कमजोर हुआ तो होगी पड़ोसी बांग्लादेश जैसी स्थिति
डा. मोहन भागवत ने कहा कि उत्तर प्रदेश में हिंदुओं की एकजुटता के कारण ही माहौल ठीक है। देशभर में भी हिंदुओं की ऐसी ही एकजुटता की जरूरत है। बांग्लादेश में हिंदुओं के कमजोर होने से ही हमलों की स्थिति उत्पन्न हुई है।
पांच दिवसीय प्रवास के तीसरे दिन शनिवार सुबह भागवत एचबी इंटर कालेज पहुंचकर शाखा में शामिल हुए। यहां संघ प्रमुख से स्वयंसेवकों ने एकजुट कैसे हों, यह प्रश्न किया तो बोले, इसके लिए हिंदुओं को स्वयं जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी। एकजुटता के लिए हाथ-पैर नहीं चलाने, दिमाग से काम करना होगा। हिंदू परिवारों में विघटन हो रहे हैं। ऐसे में परिवारों को जोड़ने के लिए युवाओं को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
सेवा बस्तियों में सक्रियता बढ़ाएं। वहां सामाजिक समरसता का भाव पैदा किया जाए। वहां के लोगों को संघ से जोड़ने की कोशिश की जाए। इसके लिए लोगों के बीच एबैठना पड़ेगा। भारत ही दुनिया में एकमात्र ऐसा देश है, जो विश्व में शांति और सुख समृद्धि लाने में बड़ी भूमिका का निर्वहन करेगा। इसलिए विश्व की निगाहें भारत की ओर हैं। समाज में तेजी से परिवर्तन लाना है। पंच परिवर्तन पर विशेष ध्यान देना है। संघ के स्वयंसेवक समाज के प्रत्येक वर्ग के घर जाएं। उनसे बातचीत करें, उन्हें आदर सत्कार के साथ अपने घर भी बुलाएं। तीज, त्योहार आदि कार्यक्रम भी मिलकर साथ करें। जिससे सामाजिक समरसता का भाव पैदा हो। भारत की सबसे बड़ी पूंजी संस्कार है। परिवार में एक साथ पूजन, हवन करें। साथ-साथ भोजन करें, जिससे परिवार की कड़ी मजबूत बनी रहे। शाम को संघ प्रमुख पंचनगरी की शाखा में भी शामिल हुए।
शाखा टोली के साथ बैठक
सुबह सनातन शाखा टोली के साथ सरसंघचालक ने बैठक की। विभाग प्रचारक, महानगर प्रचारक सहित 15 सदस्य शामिल हुए। भागवत ने विजयदशमी पर स्थापना दिवस से शुरू हो रहे शताब्दी वर्ष के अंतर्गत होने वाले आयोजनों पर भी चर्चा की। अलीगढ़ एचवी इंटर कालेज में शनिवार सुवह सनातन शाखा में भाग लेने पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डा. मोहन भागवत।