शादी के 6 दिन बाद आतंकियों ने छीना सुहाग: पहलगाम में लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की हत्या, पत्नी की चीखों से कांप उठा कश्मीर
आतंकियों ने एक न सुनी और बेरहमी से गोलीबारी कर दी। यह घटना न सिर्फ एक परिवार की खुशियां छीन ले गई, बल्कि इस्लामी आतंकवाद की क्रूरता को भी उजागर कर गई। देशभर में इस घटना को लेकर आक्रोश है और लोग न्याय की मांग कर रहे हैं। 6 days after marriage terrorists snatched away the husband, Indian Army, Lieutenant Vinay Narwal, Pahalgam, Terrorist Attack, Kashmir, Islamic Terrorism, Army Martyr, Newlywed Couple, Wife's Plea, Gunshots, Jammu and Kashmir, Army Soldier, Terrorism in India, National Security, Justice for Vinay Narwal, Attack on Army, Military Hero, Heartbreaking Incident, Terrorist Violence, Killed by Terrorists, Unresolved Terrorism, Army Soldier's Sacrifice, National Grief, Kashmir Terror Attack 4o mini
शादी के 6 दिन बाद आतंकियों ने छीना सुहाग: पहलगाम में लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की हत्या, पत्नी की चीखों से कांप उठा कश्मीर
शुक्रवार की शाम करीब 6 बजे, जब विनय अपनी पत्नी के साथ पहलगाम के एक खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट पर थे, तभी अचानक आतंकी हमला हुआ। चश्मदीदों के अनुसार, लेफ्टिनेंट विनय को पहचान कर आतंकियों ने उन्हें निशाना बनाया। विनय की पत्नी ने हाथ जोड़कर गुहार लगाई – "मेरे पति को छोड़ दो..." लेकिन आतंकियों ने एक न सुनी और विनय को गोलियों से भून दिया।
घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया है, लेकिन इस हमले ने एक बार फिर इस्लामी आतंकवाद की भयावहता को सामने ला दिया है।
विनय नरवाल हरियाणा के झज्जर जिले के रहने वाले थे। उनके पिता खुद भी सेना में रह चुके हैं और बेटे की शहादत पर फख्र करते हुए कहते हैं, "मुझे गर्व है कि मेरा बेटा देश के लिए शहीद हुआ, लेकिन उसका अपराध सिर्फ इतना था कि वो एक भारतीय फौजी था।"
उनकी पत्नी, जो अभी तक शादी की खुशियों में मग्न थीं, अब पूरी तरह टूट चुकी हैं। उनका कहना है, "हमने सपने देखे थे साथ जीने के, लेकिन अब वो बस एक सपना ही रह गया।"
इस हृदयविदारक घटना ने देश को झकझोर दिया है। लोग सोशल मीडिया पर #JusticeForVinayNarwal ट्रेंड कर रहे हैं और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सवाल यही है – कब तक हमारे जवान ऐसे ही निशाना बनते रहेंगे? कब तक आतंकवाद मासूम जिंदगियों को निगलता रहेगा?