जनजातीय क्षेत्र में कार्य करने वाले सेवाव्रतियों को पद्मश्री
नई दिल्ली। देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं: पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री। ये पुरस्कार कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामलों, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार और उद्योग, चिकित्सा, साहित्य और शिक्षा, खेल, सिविल सेवा आदि विभिन्न क्षेत्रों में दिए जाते हैं। इन पुरस्कारों […] The post जनजातीय क्षेत्र में कार्य करने वाले सेवाव्रतियों को पद्मश्री appeared first on VSK Bharat.
नई दिल्ली। देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं: पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री। ये पुरस्कार कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामलों, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार और उद्योग, चिकित्सा, साहित्य और शिक्षा, खेल, सिविल सेवा आदि विभिन्न क्षेत्रों में दिए जाते हैं। इन पुरस्कारों की घोषणा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है।
वर्ष 2026 के लिए, राष्ट्रपति ने 131 पद्म पुरस्कारों के प्रदान करने की स्वीकृति दी है, जिनमें 2 युगल पुरस्कार (युगल पुरस्कार को एक ही माना जाता है) शामिल हैं। सूची में 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। पुरस्कार प्राप्त करने वालों में 19 महिलाएं भी हैं।
जनजातीय क्षेत्र में कार्य के लिए अरुणाचल प्रदेश के सामाजिक कार्यकर्ता एवं निशि हेरिटेज फेथ एंड कल्चरल सोसायटी के मार्गदर्शक तेचि गुबिन जी को पद्म श्री देने की घोषणा की गई है। मूलत: अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर के रहने वाले गुबिन जी अरुणाचल प्रदेश सरकार में आर्किटेक्ट के नाते कार्यरत थे। अरुणाचल प्रदेश में पहले आर्किटेक्टचर की डिग्री प्राप्त करने वाले वह पहले व्यक्ति थे। दो वर्ष पहले ही सेवानिवृत्त होने के बाद पूरा समय विभिन्न संगठनों के मार्गदर्शक के नाते कार्य कर रहे हैं। गुबिन जी 2000 से अरुणाचल विकास परिषद से कार्य से जुड़े। लंबे समय से वह परिषद के अध्यक्ष के नाते कार्य कर रहे हैं। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के नाते भी वह सभी कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शक कर रहे हैं।
जनजातीय क्षेत्र में शिक्षा जगत में कार्य के लिए त्रिपुरा के प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं साहित्यकार नरेशचंद्र देव बर्मा जी को पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा हुई। अगरतला के निवासी देव बर्मा जी जनजाति समाज के एक ख्यातनाम सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
त्रिपुरा सरकार की असेंबली के ग्रंथालय से सेवानिवृत्त हुए देव बर्मा जी विभिन्न सामाजिक कार्य में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। अनेक वर्ष तक त्रिपुरा कल्याण आश्रम के उपाध्यक्ष और अध्यक्ष के नाते संगठन के कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन करते रहे है। त्रिपुरा के शिक्षा क्षेत्र में नरेशचंद्र देव बर्मा जी का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। त्रिपुरा यूनिवर्सिटी और स्टाफ सिलेक्शन कॉलेज में आप विजिटिंग लेक्चरर के नाते कॉकपोरस भाषा भी सिखाते रहे हैं।
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