राष्ट्रीय सवर्ण शक्ति मोर्चा का ऐतिहासिक मार्च, UGC नियमों पर आपत्ति
राष्ट्रीय सवर्ण शक्ति मोर्चा का ऐतिहासिक मार्च, UGC नियमों पर आपत्ति
सभी सवर्ण संगठनों ने भारतीय सवर्ण संघ परिवार के लोग एकजूट होकर एक टीम बनाकर राष्ट्रीय सवर्ण शक्ति मोर्चा के बैनर तले रामजी तिवारी के अध्यक्षता बस्ती जिले में जीआईसी मैदान से शास्त्री चौक तक विशाल पैदल मार्च,
राष्ट्रपति महोदया को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा गया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा अधिसूचित “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” के विरोध में राष्ट्रीय सवर्ण शक्ति मोर्चा के तत्वावधान में राजकीय इंटर कॉलेज (GIC) मैदान से शास्त्री चौक तक एक ,हजारों की संख्या में सवर्ण युवा ऐतिहासिक शांतिपूर्ण एवं अनुशासित पैदल मार्च का आयोजन किया गया।
इस पैदल मार्च का उद्देश्य उक्त विनियमन से जुड़ी गंभीर संवैधानिक आपत्तियों को लोकतांत्रिक एवं विधिसम्मत तरीके से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद, महामहिम राष्ट्रपति महोदया, तक पहुँचाना था। मार्च के उपरांत जिलाधिकारी बस्ती के माध्यम से राष्ट्रपति महोदया को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया।
प्रदर्शन में हजारों की संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, युवा, शिक्षक, अधिवक्ता एवं विभिन्न वर्गों के नागरिक सम्मिलित हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान शांति, अनुशासन और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन किया गया। प्रतिभागियों ने हाथों में संविधान, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता से जुड़े संदेशों की तख्तियाँ लेकर शांतिपूर्ण ढंग से अपना पक्ष रखा।
ज्ञापन में यह चिंता व्यक्त की गई कि UGC का उक्त विनियमन “Equity” के नाम पर संवैधानिक समानता, निष्पक्षता एवं संवैधानिक नैतिकता के सिद्धांतों के विपरीत जाता प्रतीत होता है तथा इससे शैक्षणिक परिसरों में सामाजिक विभाजन और वैचारिक टकराव को बढ़ावा मिल सकता है। भारतीय सवर्ण संघ के राष्ट्रीय महासचिव पँडित साधू तिवारी ने बताया कि एससीएसटी एक्ट यूजीसी जबतक समाप्त नही होगा सवर्णों के लिए सवर्ण आयोग का गठन नही होगा सवर्ण समाज प्रदेश ही देश मे संयुक सवर्ण संगठनों का प्रदर्शन होता रहेगा सवर्ण समाज जाग गया है। राष्ट्रीय सवर्ण शक्ति मोर्चा के अध्यक्ष श्री रामजी पाण्डेय ने कहा—“हमारा यह आंदोलन किसी वर्ग के विरुद्ध नहीं, बल्कि संविधान की मूल भावना के पक्ष में है। Equity के नाम पर यदि किसी समाज को पूर्वधारणा के आधार पर दोषी ठहराया जाता है, तो यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 की आत्मा के विरुद्ध है। शिक्षा के मंदिरों को सामाजिक संघर्ष का अखाड़ा नहीं बनने दिया जा सकता।”सरकार सवर्ण आयोग का गठन करे। इससे समाज में समरसता बढ़ेगी।
संयोजक ,एवं जन आंदोलन मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष,श्री अभयदेव शुक्ल ने कहा—“UGC का यह विनियमन औपनिवेशिक मानसिकता की याद दिलाता है, जहाँ कुछ समुदायों को जन्म से ही संदेह की दृष्टि से देखा गया। हम राष्ट्रपति महोदया से अपेक्षा करते हैं कि वे इस विषय पर संवैधानिक हस्तक्षेप कर राष्ट्र को विभाजन से बचाने का कार्य करें।”राजपूत करणी सेना के जिलाध्यक्ष श्री राम प्रताप सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा,“शोषण या उत्पीड़न की रोकथाम के लिए तकनीकी और तटस्थ उपाय होने चाहिए, न कि सामाजिक वर्गीकरण। CCTV, पारदर्शी शिकायत प्रणाली और निष्पक्ष जांच—यही समाधान हैं, न कि सामूहिक दोषारोपण।” श्री यशवंत सिंह रोलु सिंह ने कहा—
“आज का यह पैदल मार्च यह संदेश देता है कि समाज संविधान के साथ खड़ा है। हम चाहते हैं कि विश्वविद्यालय ज्ञान, चरित्र और राष्ट्र निर्माण के केंद्र बने रहें, न कि राजनीतिक और जातिगत संघर्ष के मंच।”राष्ट्रीय सवर्ण शक्ति मोर्चा ने स्पष्ट किया कि यह पैदल मार्च पूर्णतः अहिंसक, लोकतांत्रिक और संविधानसम्मत था तथा भविष्य में भी संगठन अपनी बात संवाद, संवैधानिक प्रक्रिया और शांतिपूर्ण आंदोलनों के माध्यम से ही रखेगा।