संगठित हिन्दू समाज ही भारत को फिर से विश्वगुरु बनाएगा – भागैय्या जी
बैतूल। सामाजिक परिवर्तन का मूल मंत्र क्या है, राष्ट्र निर्माण का आधार क्या है और आने वाले 25 वर्षों में भारत की दिशा क्या होगी, संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में इन विषयों पर मंथन हुआ। गोष्ठी की अध्यक्षता खेमराज जी डढोरे ने की। गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल […] The post संगठित हिन्दू समाज ही भारत को फिर से विश्वगुरु बनाएगा – भागैय्या जी appeared first on VSK Bharat.
बैतूल। सामाजिक परिवर्तन का मूल मंत्र क्या है, राष्ट्र निर्माण का आधार क्या है और आने वाले 25 वर्षों में भारत की दिशा क्या होगी, संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में इन विषयों पर मंथन हुआ। गोष्ठी की अध्यक्षता खेमराज जी डढोरे ने की। गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य वी. भागैय्या जी ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन किसी कानून या आंदोलन से नहीं, स्वयं के आचरण में परिवर्तन से होगा। पूरे विश्व को आज भारत के मार्गदर्शन की आवश्यकता है और अगले 25 वर्षों में भारत को विश्वगुरु बनना ही है, यह केवल सपना नहीं संकल्प है।
उन्होंने कहा कि देश की रक्षा संगठित समाज करेगा। संघ विरोधियों का विरोध नहीं करता, राजनीतिक कृपा से नहीं चलता और स्वावलंबी संगठन है। संघ में खेल है, लेकिन वह स्पोर्ट्स क्लब नहीं, योग है लेकिन योगा क्लब नहीं है, क्योंकि उसका लक्ष्य संपूर्ण हिन्दू समाज को संगठित करना है।
संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि वे जन्मजात देशभक्त थे। महारानी विक्टोरिया के सम्मान में बांटी गई मिठाई को फेंक दिया था और वंदे मातरम कहने पर उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। अनुशीलन समिति के संयोजक रहे। वर्ष 1925 में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की और सबको मिलकर कार्य करने तथा साथ विचार करने का संदेश दिया।
प्रतिबंधों के बाद भी बढ़ता संगठन
भागैय्या जी ने कहा कि वर्ष 1948, 1975 और 1992 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाए गए, लेकिन संघ का कार्य नहीं रुका। संघ शाखा की अभिनव पद्धति से चलता है। देश के एक लाख ग्रामों में विद्यार्थी शाखाओं का लक्ष्य लेकर कार्य हो रहा है। संघ में व्यक्ति पूजा नहीं, तत्व पूजा है और भगवा ध्वज को गुरु माना गया है। वर्ष 1936 में राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना मौसी जी के नेतृत्व में हुई। पूर्वोत्तर राज्यों में सीमा जागरण, मानचित्र सेवा और सेवा भारती तथा रामकृष्ण मिशन के माध्यम से सेवा कार्य चल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज और संस्कृति पर गर्व और सम्मान आवश्यक है। बाबर से पूर्व 11 मुगल शासकों के आक्रमणों का उल्लेख करते हुए बताया कि गुरु नानक देव जी ने हिन्दू शब्द में समग्र समाज का उल्लेख किया। संघ जाति-पाति से ऊपर एकात्मक संस्कृति की बात करता है। स्वदेशी सामग्री का उपयोग, गौ आधारित कृषि, गोबर गैस प्लांट, जैविक कृषि और चिकित्सा पर चिंतन का आह्वान किया गया।
उन्होंने कहा कि समर्पित और ज्ञानवान शिक्षक बनना समय की आवश्यकता है। संस्कार केंद्र, चिकित्सा शिक्षा, उच्च शिक्षा संस्थानों में निःशुल्क शिक्षा दिवस पर शासन को विचार करना चाहिए और राष्ट्रीय शिक्षा नीति से परिवर्तन संभव है। पर्यावरण संरक्षण के लिए जल संचय, नल का सीमित उपयोग, सिंगल यूज पॉलिथीन का त्याग, पेड़ लगाना और उनका संरक्षण आवश्यक है। कुटुंब, मातृभाषा, भजन, परिवार के इतिहास पर चर्चा और पंचमहाभूतों को नमन करना भारतीय जीवन शैली का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि मातृभूमि की सेवा ही हमारा कर्तव्य है और संगठित हिन्दू समाज ही भारत को फिर से विश्वगुरु बनाएगा।
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