पुलवामा बलिदानी दिवस Pulwama Balidan Diwas

पुलवामा हमले के 7 साल: जानें कैसे 14 फरवरी 2019 के बलिदान ने 'नये भारत' की नींव रखी। 12 दिन में बालाकोट एयरस्ट्राइक, अनुच्छेद 370 की समाप्ति और जम्मू-कश्मीर से आतंकी तंत्र के खात्मे की पूरी गौरवगाथा।

Feb 14, 2026 - 08:38
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पुलवामा बलिदानी दिवस Pulwama Balidan Diwas
  • पुलवामा हमला: ब्लैक डे नहीं, आतंक के समूल नाश का शंखनाद और भारत का बदला

  • पुलवामा के 7 साल: शहादत से बालाकोट एयरस्ट्राइक और अनुच्छेद 370 की समाप्ति तक

  • पुलवामा बलिदानी दिवस Pulwama Balidani Diwas,

  • बालाकोट एयरस्ट्राइक ऑपरेशन बंदर Balakot Airstrike Operation Bandar,

  • अनुच्छेद 370 की समाप्ति Abrogation of Article 370,

  • जैश-ए-मोहम्मद पुलवामा हमला Jaish-e-Mohammed Pulwama Attack,

  • 14 फरवरी ब्लैक डे बनाम संकल्प दिवस 14 Feb Black Day vs Sankalp Diwas,

  • जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का अंत End of Terrorism in J&K,

हमला और शहादत

  1. तारीख: यह हमला 14 फरवरी 2019 को हुआ था, जिसे अब 7 साल पूरे हो चुके हैं।

  2. स्थान: हमला श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुलवामा जिले के लेथपोरा में हुआ था।

  3. शहादत: इस कायरतापूर्ण हमले में 40 सीआरपीएफ (CRPF) जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे।

  4. विस्फोट: केसर की क्यारियों के पास हुए इस धमाके में बारूद और जलते मांस की गंध फैल गई थी।

  5. साजिशकर्ता: इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी।

  6. विस्फोटक की मात्रा: हमले के लिए लगभग 200 किलो विस्फोटक (IED) जमा किया गया था।

  7. आत्मघाती हमलावर: स्थानीय आतंकी आदिल डार को इस आत्मघाती हमले के लिए तैयार किया गया था।

आतंकी साजिश का खुलासा

  1. तैयारी: जैश ने इस हमले की तैयारी 2017-18 में ही शुरू कर दी थी।

  2. अफगानिस्तान कनेक्शन: मुख्य सूत्रधार उमर फारूक ने अफगानिस्तान में तालिबान के साथ मिलकर नाटो सेनाओं के खिलाफ लड़ने और IED बनाने की ट्रेनिंग ली थी।

  3. दूसरा हमला: जैश घाटी में एक और बड़ा हमला करने की फिराक में था, लेकिन बालाकोट स्ट्राइक के बाद उसने तौबा कर ली।

  4. देरी का कारण: खराब मौसम के कारण काफिले की आवाजाही बंद थी, वरना हमला 14 फरवरी से पहले ही होना था।

भारत का पलटवार (बालाकोट एयरस्ट्राइक)

  1. समय सीमा: हमले के ठीक 12 दिन बाद भारत ने बदला लिया।

  2. ऑपरेशन: 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने 'ऑपरेशन बंदर' चलाया।

  3. ऐतिहासिक कदम: 48 वर्षों में पहली बार भारतीय वायुसेना ने शत्रु देश की सीमा में घुसकर हमला किया।

  4. नुकसान: पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित आतंकी शिविरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया।

जम्मू-कश्मीर में बदलाव (अनुच्छेद 370)

  1. संवैधानिक बदलाव: पुलवामा हमले के बाद अनुच्छेद 370 के उन प्रावधानों को समाप्त किया गया जो अलगाववाद को बढ़ावा देते थे।

  2. आतंकी तंत्र का अंत: राज्य में अब आतंकियों का 'इकोसिस्टम' (पारिस्थितिक तंत्र) लगभग नष्ट हो चुका है।

  3. भर्ती में कमी: स्थानीय युवाओं की आतंकी संगठनों में भर्ती अब अपने न्यूनतम स्तर पर है।

  4. सुरक्षा का माहौल: अब घाटी में असुरक्षा और भय का माहौल नहीं है, लोगों में विश्वास बढ़ा है।

आतंकियों का हश्र

  1. सफाया: सुरक्षाबलों ने उमर फारूक और इस्माइल अल्वी जैसे मुख्य कमांडरों को '72 हूरों' तक पहुँचा दिया है।

  2. बचाव की मुद्रा: जैश अब सीधा हमला करने के बजाय छद्म (fake) संगठनों का सहारा ले रहा है।

  3. मदद का अभाव: आतंकियों को अब घाटी में न तो 'ओवरग्राउंड वर्कर' मिल रहे हैं और न ही स्थानीय कैडर।

  4. मुख्य अपराधी: हालांकि मसूद अजहर अभी भी पाकिस्तान में है, लेकिन उसके नेटवर्क को भारत ने तोड़ दिया है।

नया नजरिया: संकल्प दिवस

  1. ब्लैक डे नहीं: कई जानकार इसे 'ब्लैक डे' के बजाय 'संकल्प दिवस' मानते हैं।

  2. आतंक का नाश: यह दिन आतंकवाद के समूल नाश के निर्णायक शंखनाद का प्रतीक बन गया है।

  3. नया भारत: उड़ी और बालाकोट ने दुनिया को 'नये भारत' की ताकत का एहसास कराया है।

  4. राजनीतिक इच्छाशक्ति: हमले के बाद देश की एकजुटता ने सरकार को कड़े फैसले लेने की शक्ति दी।

  5. बलिदान की सार्थकता: 40 वीरों के बलिदान ने ही अनुच्छेद 370 की समाप्ति की पटकथा लिखी।

  6. अखंडता का संदेश: भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह अपनी अखंडता के लिए घर में घुसकर मारना जानता है।

  7. शाश्वत श्रद्धा: 14 फरवरी अब केवल दुख का नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के संकल्प का दिन है।

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