चुपचाप आओ, अपना योगदान दो और आगे बढ़ जाओ, ठाकुर रामसिंह जी इसी परम्परा के संवाहक थे – सुरेश सोनी जी
नेरी, हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश)। ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी में ठाकुर रामसिंह जी की 111वां जयंती समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य सुरेश सोनी जी, कार्यक्रम अध्यक्ष अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के […] The post चुपचाप आओ, अपना योगदान दो और आगे बढ़ जाओ, ठाकुर रामसिंह जी इसी परम्परा के संवाहक थे – सुरेश सोनी जी appeared first on VSK Bharat.
नेरी, हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश)।
ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी में ठाकुर रामसिंह जी की 111वां जयंती समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य सुरेश सोनी जी, कार्यक्रम अध्यक्ष अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा, विशिष्ट अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल, डॉ. प्रेम लाल गौतम, कुलाधिपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा बिहार; प्रो. शशि बाला, अधिष्ठाता, भारतीय विज्ञान केन्द्र भारतीय विद्या भवन, दिल्ली; शैलजा कटोच, कटोच राजवंश तथा शोध संस्थान अध्यक्ष प्रो. भाग चन्द चौहान एवं निदेशक व संगठन सचिव डॉ. चेतराम गर्ग मंचासीन रहे। कार्यक्रम से पूर्व अतिथियों ने श्रद्धेय ठाकुर रामसिंह जी की आदमकद प्रतिमा का अनावरण, शोध संस्थान के कार्य का डिजिटलीकरण व संस्थान द्वारा लगाई प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन तथा सरस्वती वंदना के साथ हुआ। शोध संस्थान के संगठन सचिव डॉ. चेतराम गर्ग ने सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत व अभिनन्दन किया तथा शोध संस्थान के उद्देश्य एवं गतिविधियों को सबके समक्ष रखा।
मुख्य अतिथि जगत प्रकाश नड्डा ने ठाकुर रामसिंह जी का स्मरण करते हुए कहा कि आज ऐसी शख्सियत की जयन्ती मना रहे हैं जो आने वाली पीढ़ियों को सदा-सदा के लिए प्रेरणा देती रहेगी। हम सभी जानते हैं कि भारत की बीसवीं शताब्दी कैसी रही है, उन परिस्थितियों में 1941 में एक युवा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क में आया और अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा को समर्पित कर दिया। 88 वर्ष की आयु में इतिहास संकलन जैसे नए प्रकल्प को शुरू करना और उसे पूरा करना ठाकुर रामसिंह जी की दृढ़ इच्छा शक्ति एवं संगठन कौशल को दर्शाता है। आज शोध संस्थान ठाकुर जी के दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ रहा है और उच्च कोटि का शोध कार्य कर रहा है।
मुख्यवक्ता सुरेश सोनी जी ने कहा कि हम आज ऐसे इतिहासकार का 111वें जन्मदिवस पर स्मरण करने के लिए एकत्रित हुए हैं, जिन्होंने अपने लेखन से न केवल हिमाचल की सांस्कृतिक चेतना को स्वर दिया। बल्कि इतिहास और लोक परम्पराओं को नई पहचान भी दिलाई। भारत की परम्परा रही है कि चुपचाप आओ, अपना योगदान दो और आगे बढ़ जाओ, ठाकुर रामसिंह जी इसी परम्परा के संवाहक थे। हम हर वर्ष ठाकुर रामसिंह जी की जयन्ती मना रहे हैं, किन्तु ठाकुर जी के दिखाए मार्ग पर हम सभी आगे बढ़ें, यही उन्हें वास्तविक श्रद्धांजलि होगी। ठाकुर रामसिंह जी ने एक लम्बा समय संगठन योजना से पूर्वोतर भारत में बिताया। वहां के लोग अक्सर कहते हैं कि उनका जैसा स्वभाव था, वैसा उन्होंने काम किया। सुरेश सोनी जी ने कहा कि शोध संस्थान गांव के इतिहास लेखन में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। इसी निरन्तरता में हिमाचल के प्रत्येक गांव के ऐतिहासिक संदर्भों को संकलित किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने कहा कि ठाकुर रामसिंह जी हमारे मनस्वी थे। उन्होंने इतिहास के लिए स्वयं को समर्पित किया था। 1994, 1995 व 1996 में इतिहास संकलन के तीन बड़े अधिवेशन ठाकुर रामसिंह जी के नेतृत्व में हुए थे। उनके साथ की स्मृतियां आज भी हमें इतिहास संकलन योजना के कार्य में मार्गदर्शन करती हैं। विकसित भारत 2047 में हम इतिहासकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि यदि हम भारतीय जनमानस को प्रामाणिक इतिहास नहीं दे पाए तो भारत की आत्मा पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाएगी।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि ठाकुर रामसिंह जी का व्यक्तित्व बहुत महान था और इतिहास के लिए उन्होंने जो कुछ किया व स्वयं इतिहास बन गया। उनके सम्पर्क में जो भी आता था, प्रभावित हुए बिना नहीं रहता था। 88 वर्ष की आयु में शोध संस्थान की स्थापना का लिया संकल्प आज फलीभूत हो रहा है। ठाकुर रामसिंह जी ने इतिहास को केवल पढ़ा ही नहीं, उसे नई दिशा दी है। ठाकुर रामसिंह जी को मैं हृदय से नमन करता हूं कि उनका जीवन हम सबके लिए एक प्रकाश स्तम्भ है जो हमें अपनी संस्कृति, इतिहास और मूल्यों से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर संस्थान द्वारा प्रकाशित ‘स्मारिका वार्षिक प्रतिवेदन (2025-26)’, तथा पांच पुस्तकें ‘ऋग्वेद में पश्चिमी हिमालय के संदर्भ’ सम्पादक डॉ. ओम दत्त सरोच, अमित शर्मा, शशि शर्मा; ‘हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत’, सम्पादक बारू राम ठाकुर, मिहिर बोराना; ‘हिमाचल प्रदेश के गांव’ संपादक डॉ. राकेश कुमार शर्मा, ऋषि कुमार; ‘Pastoralists and Forests Under Colonial Rule: The Gujjars of Himachal Pradesh’ लेखक डॉ. बिन्दू साहनी; ‘Faith, Economy and Habitat: A Study of Janjati Society in North-west Bharat’ सम्पादक राजेन्द्र कुमार व बिन्दू साहनी का विमोचन किया गया।
कार्यक्रम के अन्त में शोध संस्थान के अध्यक्ष प्रो. भाग चन्द चौहान ने उपस्थित सभी गणमान्यों अतिथियों का धन्यवाद किया।
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