AI समिट की चमक और ज़मीनी सच्चाई

Feb 17, 2026 - 23:29
Feb 17, 2026 - 23:33
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AI समिट की चमक और ज़मीनी सच्चाई
AI समिट की चमक और ज़मीनी सच्चाई
एक पत्रकार की दृष्टि
हाल ही में भारत मंडपम में आयोजित AI समिट के कारण लुटियंस दिल्ली—विशेषकर कनॉट प्लेस (CP), पालिका बाज़ार, जनपथ लेन, बाबा खड़ग सिंह मार्ग और संसद मार्ग—असाधारण रूप से साफ़, खुला और अतिक्रमण-मुक्त दिखाई दिया। यह दृश्य इस बात का प्रमाण है कि यदि प्रशासन चाहे तो राजधानी को सुव्यवस्थित और सुंदर बनाया जा सकता है। लेकिन यह बदलाव क्या केवल अंतरराष्ट्रीय मंचों और वीआईपी आगमन तक सीमित रहेगा, या फिर आम नागरिक के रोज़मर्रा जीवन में भी उतर पाएगा? यही इस लेख का मूल प्रश्न है।

1. NDMC की तत्परता NDMC द्वारा 1200 से अधिक अतिक्रमण हटाकर यह दिखा दिया गया कि प्रशासन के पास न केवल संसाधन हैं, बल्कि इच्छाशक्ति भी है। साफ़ फुटपाथ, खुली सड़कें और व्यवस्थित बाज़ार किसी भी महानगर की पहचान होते हैं।
AI समिट के दौरान यह आदर्श व्यवहार में साकार हुआ।
2. सार्वजनिक स्थानों का सही उपयोग फुटपाथ पैदल यात्रियों के लिए और सड़कें वाहनों के लिए होती हैं। समिट के समय यह नियम स्पष्ट रूप से लागू होते दिखे—जिससे ट्रैफिक भी सुगम रहा और नागरिकों को चलने की जगह मिली।
3. पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा अतिक्रमण-मुक्त CP में घूमना, खरीदारी करना और बैठना एक बेहतर अनुभव बना।
दुकानदारों, खरीदारों और पर्यटकों—तीनों ने इस बदलाव की सराहना की।

 इवेंट-आधारित प्रशासन 2023 के G-20 समिट के दौरान भी यही हुआ—सजावट, सफ़ाई और अतिक्रमण हटाना। समिट खत्म होते ही सब कुछ फिर पुराने ढर्रे पर लौट आया। प्रश्न यह है कि कानून किसी आयोजन का मोहताज क्यों हो?
2. डबल स्टैंडर्ड नीति विदेशी मेहमानों के लिए सख़्ती और आम दिनों में ढील—यह लोकतंत्र की नहीं, बल्कि दिखावे की नीति है।3. स्ट्रीट वेंडर्स के लिए समाधान का अभाव हटाना आसान है, बसाना कठिन। न पुनर्वास की योजना, न वैकल्पिक ज़ोन—इससे हज़ारों परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ता है।

गलती कहाँ हो रही है? नीति में नहीं, क्रियान्वयन में। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देश हैं कि CP को स्ट्रीट वेंडर-फ्री रखा जाए—पर पालन तभी होता है जब दुनिया देख रही हो। स्थायी निगरानी का अभाव। समिट के बाद पेट्रोलिंग कम और राजनीतिक दबाव अधिक हो जाता है—और अतिक्रमण फिर लौट आता है। साझा संवाद की कमी। दुकानदार, वेंडर, NDMC और सरकार—चारों के बीच कोई स्थायी और व्यावहारिक समझौता नहीं बन पाया है।

AI समिट ने यह आईना दिखा दिया है कि दिल्ली कैसी हो सकती है। अब सवाल यह है—क्या हम इसे रोज़ का सच बनाएँगे, या फिर यह भी एक और “इवेंट मैनेजमेंट” बनकर रह जाएगा? शहर सजाने से नहीं, सुधारने से महान बनता है। और सुधार तभी टिकता है, जब नियम सभी के लिए, हर दिन समान हों। 
लेखक: धीरज कश्यप
वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार एवं सामाजिक विषयों पर स्तंभकार
@Dheeraj kashyap युवा पत्रकार- विचार और कार्य से आने वाले समय में अपनी मेहनत के प्रति लगन से समाज को बेहतर बना सकते हैं। जरूरत है कि वे अपनी ऊर्जा, साहस और ईमानदारी से र्काय के प्रति सही दिशा में उपयोग करें , Bachelor of Journalism And Mass Communication - Tilak School of Journalism and Mass Communication CCSU meerut / Master of Journalism and Mass Communication - Uttar Pradesh Rajarshi Tandon Open University पत्रकारिता- प्रेरणा मीडिया संस्थान नोएडा 2018 से केशव संवाद पत्रिका, प्रेरणा मीडिया, प्रेरणा विचार पत्रिका,