प्यार, नफरत और एआई से बना इंतकाम: इंजीनियर ने पूर्व प्रेमिका को बना दिया 'इंटरनेशनल पोर्न स्टार'
असम के इंजीनियर प्रतीम बोरा ने अपनी पूर्व प्रेमिका से बदला लेने के लिए AI का दुरुपयोग कर उसकी फर्जी अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार किए। "बेबीडॉल आर्ची" नाम से बनाई गई फेक प्रोफ़ाइल इंटरनेशनल पोर्न स्टार के रूप में वायरल हो गई। यह मामला AI तकनीक के खतरनाक दुरुपयोग और डिजिटल दुनिया में बढ़ते रिवेंज पोर्न की चेतावनी है।
प्यार, नफरत और एआई से बना इंतकाम: इंजीनियर ने पूर्व प्रेमिका को बना दिया 'इंटरनेशनल पोर्न स्टार'
नई दिल्ली/गुवाहाटी — यह एक ऐसी चौंकाने वाली कहानी है, जो तकनीक के अंधेरे पक्ष को उजागर करती है। असम के रहने वाले एक मैकेनिकल इंजीनियर प्रतीम बोरा ने अपनी पूर्व प्रेमिका से मिले धोखे और अपमान का बदला लेने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया — और नतीजा बेहद खतरनाक निकला।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली में रहकर इंजीनियरिंग का काम करने वाले प्रतीम बोरा ने अपनी पुरानी प्रेमिका की सिर्फ कुछ तस्वीरों के सहारे एआई टूल्स की मदद से अश्लील वीडियो और फोटोज बनाए। उसने "बेबीडॉल आर्ची" नाम से एक फेक ऑनलाइन पोर्न स्टार प्रोफ़ाइल तैयार की, जिसे अमेरिका की एडल्ट एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जोड़कर प्रचारित किया गया।
जब इस प्रोफाइल पर बनी अश्लील सामग्री पोर्न वेबसाइटों पर वायरल होने लगी, तो यह मामला सिर्फ निजी बदले की कहानी नहीं रहा — यह एक फाइनेंशियल स्कीम में तब्दील हो गया। बोरा ने AI जनरेटेड कंटेंट को बेचना शुरू किया और कथित तौर पर इससे मोटी कमाई भी की।
इस मामले की सनसनी तब और बढ़ी, जब बोरा ने मशहूर अमेरिकी एडल्ट स्टार केंडा लस्ट के साथ लड़की की फर्जी AI तस्वीर भी शेयर कर दी, जिससे लोगों को लगा कि यह लड़की वास्तव में इंटरनेशनल पोर्न इंडस्ट्री में कदम रख चुकी है।
⚠️ गंभीर चिंता का विषय:
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यह मामला सिर्फ "रिवेंज पोर्न" नहीं है, बल्कि AI के दुरुपयोग का खतरनाक उदाहरण है।
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यह घटना दर्शाती है कि कैसे किसी की एक पुरानी तस्वीर से उसकी पहचान, प्रतिष्ठा और निजी जीवन को पूरी तरह बर्बाद किया जा सकता है।
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AI तकनीक के गलत इस्तेमाल से उत्पन्न खतरे अब सिर्फ कल्पना की चीज नहीं रहे — वे असल दुनिया में नुकसान पहुंचा रहे हैं।
क्या कहता है कानून?
भारत में रिवेंज पोर्न, साइबर स्टॉकिंग, पहचान की चोरी और अश्लील सामग्री प्रसारण से जुड़े कई कड़े साइबर कानून मौजूद हैं। लेकिन AI टेक्नोलॉजी की तेज़ी से बढ़ती शक्ति ने इन कानूनों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं।
लड़की की पहचान छिपाई गई:
गोपनीयता की रक्षा को ध्यान में रखते हुए, पीड़िता की पहचान उजागर नहीं की गई है और संबंधित सभी चित्रों में चेहरे ब्लर कर दिए गए हैं।
यह मामला तकनीक, मानसिक प्रतिशोध और डिजिटल नैतिकता की त्रासदी है। यह हमें याद दिलाता है कि भविष्य में किसी भी दृश्य सामग्री को "सच मान लेना" खतरनाक हो सकता है। AI के ज़रिये झूठी वास्तविकताएं बनाना जितना आसान हो गया है, उससे कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो गया है कि हम उसकी सच्चाई को परखने की क्षमता विकसित करें — ताकि किसी की ज़िंदगी यूं बर्बाद न हो।
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