वायुसेना के लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या में आई कमी
वायुसेना के लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या में आई कमी, Reduction in the number of fighter squadrons of the Air Force,
वायुसेना के लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या में आई कमी
रक्षा मंत्रालय ने संसद की समिति को को दी जानकारी
पिछले पांच वर्षों में वायुसेना में जासूसी के चार मामले
रक्षा मंत्रालय ने एक संसदीय समिति को बताया है कि हाल के वर्षों में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या कम आई है। यह कमी मिग-21, मिग-23 और मिग- 27 लड़ाकू विमानों के पुराने वैरिएंट को चरणबद्ध तरीके से हटाने के कारण आई है। इस कमी के संभावित असर को दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
वर्ष 2024-25 के लिए रक्षा मंत्रालय की अनुदान मांगों पर रक्षा संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट मंगलवार को संसद में पेश की गई। इसमें रक्षा संबंधी स्थायी समिति ने यह भी कहा कि रक्षा मंत्रालय ने समिति को वायुसेना में 'जासूसी की घटनाओं' और की गई कार्रवाई के बारे में बताया है। मंत्रालय ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में चार मामले सामने आए हैं। जासूसी में सभी शामिल कर्मियों को वायुसेना से बर्खास्त कर दिया गया है। उनमें से एक मामले को पुलिस को सौंप दिया गया है। उस पर सिविल कोर्ट में मुकदमा चल रहा है।
स्क्वाड्रन में कमी के मुद्दे पर मंत्रालय ने समिति को चौथी पीढ़ी के हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस की लड़ाकू क्षमताओं के बारे में बताया। मंत्रालय ने कहा, वायुसेना को तेजस एमके। एसी के दो स्क्वाड्रन प्राप्त हुए हैं और उन्हें परिचालन में लाया गया है। इसने हाल ही में संपन्न अंतरराष्ट्रीय अभ्यास तरंग शक्ति में भाग लिया है। वायुसेना ने 83 एलसीए एमके 1ए की खरीद के लिए अनुबंध किया है। डिलीवरी फरवरी 2024 से शुरू होनी थी, डिजाइन और विकास संबंधी मुद्दों के कारण इसमें देरी हुई है।
हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को तेजस का उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा गया है। इसके अलावा तेजस एमके-2 का विकास किया जा रहा है।