RSS से जनसंघ से बीजेपी तक: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी का सफर
RSS जनसंघ से बीजेपी तक
जनसंघ से बीजेपी तक: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी का सफर
प्रस्तावना:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का रिश्ता भारतीय राजनीति में एक गहरी जड़ें रखने वाली परंपरा का प्रतीक है। यह लेख आरएसएस और जनसंघ के ऐतिहासिक सफर से लेकर बीजेपी की स्थापना तक के सफर को विस्तार से बताएगा।
1. आरएसएस की स्थापना और उद्देश्य:
- 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा आरएसएस की स्थापना।
- राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक पुनरुत्थान और संगठनात्मक ताकत को प्राथमिकता।
- राजनीति में सीधी भूमिका न निभाने की नीति।
2. भारतीय जनसंघ का गठन (1951):
- डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा जनसंघ की स्थापना।
- आरएसएस के स्वयंसेवकों की मुख्य भूमिका।
- कांग्रेस के वर्चस्व के विकल्प के रूप में उभरना।
- हिंदुत्व, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, और स्वदेशी अर्थव्यवस्था के सिद्धांत।
3. आपातकाल और जनता पार्टी का गठन (1977):
- आपातकाल के दौरान जनसंघ का अन्य विपक्षी दलों के साथ विलय।
- जनता पार्टी का गठन और विजय।
- 'डुअल मेंबरशिप' विवाद के कारण आरएसएस और जनसंघ का पुनर्गठन।
4. भारतीय जनता पार्टी की स्थापना (1980):
- जनसंघ के पुनर्गठन के रूप में बीजेपी की शुरुआत।
- अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं की भूमिका।
- गांधीवादी समाजवाद से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ओर बढ़ता रुझान।
5. बीजेपी का विकास और आरएसएस का मार्गदर्शन:
- रामजन्मभूमि आंदोलन और बीजेपी का विस्तार।
- आरएसएस की वैचारिक और संगठनात्मक सहायता।
- वर्तमान राजनीति में बीजेपी की प्रमुख भूमिका।
6. निष्कर्ष:
आरएसएस और बीजेपी का संबंध न केवल वैचारिक बल्कि संगठनात्मक भी है। जनसंघ से बीजेपी तक का सफर भारतीय राजनीति के एक नए अध्याय को परिभाषित करता है। यह रिश्ता देश की राजनीति और समाज पर गहरा प्रभाव डालता रहा है और आगे भी डालेगा।
इस तरह का लेख आपके पाठकों को आरएसएस और बीजेपी के ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व को समझने में मदद करेगा।