DRDO के पूर्व अध्यक्ष जी. सतीश रेड्डी बने आंध्र प्रदेश सरकार के मानद सलाहकार, कैबिनेट रैंक में मिली नियुक्ति

DRDO के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जी. सतीश रेड्डी को आंध्र प्रदेश सरकार ने एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण हब के लिए मानद सलाहकार नियुक्त किया। जानिए उनके योगदान और नई भूमिका के बारे में। Former DRDO Chairman G. Satish Reddy became honorary advisor to Andhra Pradesh government, got appointment in cabinet rank

DRDO के पूर्व अध्यक्ष जी. सतीश रेड्डी बने आंध्र प्रदेश सरकार के मानद सलाहकार, कैबिनेट रैंक में मिली नियुक्ति

DRDO के पूर्व अध्यक्ष जी. सतीश रेड्डी बने आंध्र प्रदेश सरकार के मानद सलाहकार, कैबिनेट रैंक में मिली नियुक्ति

आंध्र प्रदेश सरकार ने देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक और DRDO (रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जी. सतीश रेड्डी को एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें राज्य सरकार का मानद सलाहकार (एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण हब) नियुक्त किया गया है। खास बात यह है कि उनकी यह नियुक्ति कैबिनेट मंत्री के रैंक में की गई है। उनका अनुभव राज्य में रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर के विकास में अहम भूमिका निभाएगा।

आंध्र प्रदेश सरकार ने यह कदम राज्य को एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में एक ग्लोबल हब के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से उठाया है। मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी का मानना है कि डॉ. रेड्डी के मार्गदर्शन में राज्य में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।


कौन हैं डॉ. जी. सतीश रेड्डी?

डॉ. जी. सतीश रेड्डी भारत के प्रमुख रक्षा वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। वे DRDO के चेयरमैन और रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार रह चुके हैं। उनका जन्म तेलंगाना के महबूबनगर जिले में हुआ। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (JNTU), हैदराबाद से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक किया और फिर रक्षा प्रौद्योगिकी में मास्टर्स व डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।

डॉ. रेड्डी ने मिसाइल तकनीक और रक्षा प्रणालियों के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई। विशेष रूप से, स्वदेशी रूप से विकसित मिसाइलों जैसे आकाश, नाग, पृथ्वी और अग्नि जैसी परियोजनाओं में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं, जिनमें पद्मश्री (2015) और डॉ. वीके आत्रे साइंटिस्ट ऑफ द ईयर अवॉर्ड शामिल हैं।

उनकी नियुक्ति से उम्मीद है कि आंध्र प्रदेश न केवल देश बल्कि दुनिया भर में रक्षा निर्माण के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाएगा।