कानून से ऊपर नहीं ईडी, आम नागरिकों के विरुद्ध नहीं कर सकती सख्त कार्रवाई: कोर्ट

नागरिकों को परेशान करते हैं, जिनकी रक्षा करने की वे कसम खाते हैं। हालांकि अदालत ने कत्याल की अंतरिम जमानत को बढ़ाने से इन्कार कर दिया।

कानून से ऊपर नहीं ईडी, आम नागरिकों के विरुद्ध नहीं कर सकती सख्त कार्रवाई: कोर्ट

कानून से ऊपर नहीं ईडी, आम नागरिकों के विरुद्ध नहीं कर सकती सख्त कार्रवाई: कोर्ट

जमीन के बदले रेलवे में नौकरी घोटाले के आरोपित अमित कत्याल से जुड़े मामले में की टिप्पणी
कत्याल के डाक्टरों के बयान दर्ज करने के लिए पीएमएलए की धारा 50 के उपयोग का मामला

रेलवे में जमीन के बदले नौकरी घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में आरोपित व पूर्व रेल मंत्री लालू यादव के करीबी व्यवसायी अमित कत्याल का उपचार कर रहे निजी डाक्टरों के बयान दर्ज करने के लिए मनी लांड्रिंग कानून का इस्तेमाल करने पर राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने ईडी की खिंचाई की है।

प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने कहा कि ईडी कानून से बंधी है और आम नागरिकों के खिल खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं कर सकती है। विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने कहा कि नेता, कानून और एजेंसियां आमतौर पर उन्हीं नागरिकों को परेशान करते हैं, जिनकी रक्षा करने की वे कसम खाते हैं। हालांकि अदालत ने कत्याल की अंतरिम जमानत को बढ़ाने से इन्कार कर दिया।


अमित कत्याल को पांच फरवरी को चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत मिली थी, जिसे बढ़ाने के लिए उन्होंने याचिका दायर की थी। कोर्ट ने नोट किया कि कत्याल ठीक हो रहे हैं और जेल में निर्धारित जीवन शैली का पालन कर सकते हैं। विशेष जज विशाल गोगने ने कहा कि भारत जैसे लोकतंत्र में नागरिकों के पास अधिकार और राज्य के पास कुछ कर्तव्य हैं। इस मौलिक संबंध को एक सत्तावादी तर्क को लागू करने के लिए बदला नहीं जा सकता है। अदालत ने कहा, कानून और अदालतों के प्रति जवाबदेह एजेंसी के रूप में ईडी अपने अधिकार अपने पास नहीं रख सकती।