समरस, संगठित, अनुशासित हिन्दू समाज ही सभी समस्याओं का समाधान है

मेरठ, 21 फरवरी 2026। संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि संघ की तुलना किसी से नहीं हो सकती क्योंकि संघ जैसा कोई दूसरा है ही नहीं। संघ की शाखा एवं संचलन को देखकर कोई सोचता है कि संघ […] The post समरस, संगठित, अनुशासित हिन्दू समाज ही सभी समस्याओं का समाधान है appeared first on VSK Bharat.

Feb 21, 2026 - 21:59
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समरस, संगठित, अनुशासित हिन्दू समाज ही सभी समस्याओं का समाधान है

मेरठ, 21 फरवरी 2026। संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि संघ की तुलना किसी से नहीं हो सकती क्योंकि संघ जैसा कोई दूसरा है ही नहीं। संघ की शाखा एवं संचलन को देखकर कोई सोचता है कि संघ कोई पैरा मिलिट्री संगठन है, लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि संघ व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है और शाखा में व्यक्ति के हर पक्ष के विकास और निर्माण की प्रक्रिया को मूर्त रूप दिया जाता है।

संघ स्थापना से पूर्व देश की परिस्थिति से आप सब परिचित ही हैं। डॉ. हेडगेवार जी का सम्बन्ध एवं सम्पर्क बाल गंगाधर तिलक, मदन मोहन मालवीय, सुभाष चन्द्र बोस, वीर सावरकर, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद अर्थात ऐसे सभी लोगों से थे जो उस समय देश की आजादी के आन्दोलन के साथ-साथ देश में व्याप्त कुरीतियों से लड़ रहे थे और देश के भविष्य की चिन्ता कर रहे थे। ऐसे में इन सबका जो विचार था वही डॉ. हेडगेवार जी का विचार था। अक्सर उनके चिन्तन का विषय होता था कि हम बार-बार पराधीन क्यों हो रहे हैं? सभी के विचारों का एक मात्र आशय रहता था कि हम अपने स्व को भूल गए, जिस कारण हम बंट गए, अनेक कुरीतियां आईं, कई असमानताएं समाज में व्याप्त हुईं। डॉ. हेडगेवार जी ने विचार कर निष्कर्ष निकाला कि समरस, संगठित, अनुशासित हिन्दू समाज ही सभी समस्याओं का समाधान है।

उन्होंने कहा कि भारत में जो भी निवास करता है, वह हिन्दू है। हमारे मत, पन्थ, पूजा पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन हम सब हिन्दू ही हैं। हिन्दू का मतलब जोड़ना, सबके हित के विषय में विचार करना, सबके कल्याण की कामना करना, इतना ही नहीं हम सम्पूर्ण धरती पर जीव-जन्तु, चर-अचर तथा ब्रह्मांड के कल्याण की कामना करते हैं। पिछले दो सौ वर्षों में भारत में जितने महापुरूष हुए हैं, उतने दुनिया के किसी भी देश में नहीं हुए। यह हमारे लिए प्रेरणा का विषय है।

सरसंघचालक जी ने कहा कि विविधता हमारे देश का स्वभाव रहा है। लेकिन हम इतिहास को देखें तो इन सबके बावजूद भी हम एक साथ मिलकर एक राष्ट्र में रहे हैं। हमारे पूर्वज जानते थे कि बाहर सुख मिलता नहीं, अन्दर किसी ने खोजा नहीं, इसीलिए आध्यात्मिक रूप से उन्होंने इस तत्व को समझा और कहा कि विविधता मिथ्या है और एकता सत्य है।

उन्होंने कहा कि संघ को सौ वर्ष पूर्ण हो गए। इन सौ वर्षों में संघ ने प्रतिबन्ध भी झेला, झूठी हत्याओं के आरोप भी लगे, राजनीतिक विरोध भी झेलना पड़ा, स्वयंसेवकों की हत्याएं भी हुईं, अत्यंत अभाव भी देखा। लेकिन स्वयंसेवकों की दृढ़ संकल्प शक्ति, असीम इच्छा शक्ति के चलते अपने आप को बचाते हुए आज अनुकूलता के काल में हम आए हैं और स्वयंसेवक समाज जीवन के अनेक क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। शताब्दी वर्ष में हमने सोचा कि समाज के पास जाएं और संघ के विषय में बताएं। उन्होंने आह्वान किया कि संघ तो कार्य कर ही रहा है। आप सब समाज की सज्जन शक्ति हैं, आप भी राष्ट्र उत्थान के लिए प्रयत्नशील रहें।

जिज्ञासा समाधान सत्र में सरसंघचालक जी ने अनेक प्रश्नों के उत्तर दिए। कम शिक्षा बजट व सर्व सुलभ शिक्षा के प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि बजट बढ़ाने का काम सरकार का है। लेकिन संघ का मत है कि शिक्षा सभी के लिए सुलभ हो। प्राचीन काल में भी आप देखते हैं कि समाज के सहयोग से अनेक विद्यालय चलते थे, आज भी हमें वैसे ही परस्पर सहयोग और संस्कार की आवश्यकता है कि समाज बिना सरकारी सहायता के वंचितों को शिक्षित करे।

एक अन्य प्रश्न समानता लाने के लिए एक राष्ट्र-एक शिक्षा तथा एक राष्ट्र-एक स्वास्थ्य नीति की आवश्यकता के संबंध में सरसंघचालक जी ने कहा कि एक शिक्षा नीति है, एक स्वास्थ्य नीति भी है और इसमें क्षेत्रीय आवश्कताओं को दृष्टिगत्रखते हुए कुछ विषय जोड़ने की भी छूट है। लेकिन इसे लागू करना राज्यों का विषय है। इसलिए संघ का प्रयास है कि ऐसे विषयों पर एक राय बने और समाज में एकरूपता आए।

आदर्श मूल्यों के क्षरण से संबंधित प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि सबसे पहले मूल्य आधारित शिक्षा लागू करनी होगी। समाज को संस्कारयुक्त वातावरण देना होगा। समृद्धि होना अच्छी बात है, किन्तु वेदों में कहा गया है कि आप भरपूर कमाएं, लेकिन अपनी जरूरत के हिसाब से रखते हुए शेष समाज हित में प्रयोग करें।

प्रश्न, संघ सामाजिक समरसता पर कार्य कर रहा है। लेकिन आज भी राजनीतिक दल जाति देखकर टिकट देते हैं,……इस पर मोहन भागवत जी ने कहा कि संघ इस क्षेत्र में अत्यंत गहनता से कार्य कर रहा है, जो भी तत्व समाज को विघटित करने वाले हैं, उनसे सावधान होना होगा और वह यह तभी करते हैं, जब समाज ऐसा होता है। इसलिए हमें अपने व्यवहार में समरसता लानी होगी। समाज का वातावरण बदलना होगा और यह भाषण नहीं वरन् करने से होगा। यदि आप संघ को समझते हैं तो देखेंगे कि संघ में जाति विस्मरण होता है। ओटीटी पर प्रसारित होने वाली सामग्री से संबंधित प्रश्न पर उन्होंने कहा कि विषय वस्तु देखना हमारे विवेक पर निर्भर करता है। ओटीटी पर रामायण एवं हनुमान चालीसा भी है।

क्षेत्र कार्यवाह डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि यह प्रमुख जन गोष्ठी समाज जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में नेतृत्व करने वाले लोगों के बीच हमारा विषय जाए इस हेतु से रखी गयी है। आप सामाजिक चेतना के विषयों से जुड़ें और भारत को पुर्नवैभव पर पहुंचाने का कार्य करें।

कार्यक्रम अध्यक्ष पद्मश्री भारत भूषण त्यागी जी (जैविक कृषि करने वाले कृषक) ने कहा कि संघ की पंच परिवर्तन की संकल्पना समाज में परिवर्तन ला रही है। यह विषय इतने गम्भीर हैं जो जन-जन से जुड़े हैं। उन्होंने खेती में रासायनिक पदार्थों के प्रयोग पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्वास्थ्य एवं पर्यावरण दोनों के लिए अत्यंत हानिकारक है। इसलिए हमें इसके प्रयोग को वर्जित करना होगा। उन्होंने संघ कार्य की सरहाना करते हुए कहा कि मैं अपना शेष जीवन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के कार्य को समर्पित करता हूं।

कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि चोटीपुरा गुरूकुल की संस्थापिका डॉ. सुमेधा आचार्य ने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि आज हम विकसित राष्ट्र बनने की संकल्पना को साकार करने की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन हमें ध्यान रखना होगा कि केवल भौतिक उन्नति किसी भी राष्ट्र के लिए अच्छी नहीं होती। भौतिक विकास के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति भी उतनी ही आवश्यक है। आज समूचा विश्व बहुत चुनौतियों से जूझ रहा है। जिसमें पर्यावरण, नैतिकता का पतन, मानसिक अवसाद और सामाजिक विघटन प्रमुख हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इन सब मुद्दों पर काम कर रहा है। यह अत्यंत ही सराहनीय है।

कार्यक्रम का संचालन बृज प्रान्त के सम्पर्क प्रमुख प्रमोद कुमार ने किया। धन्यवाद ज्ञापन मेरठ के विभाग सम्पर्क प्रमुख निपुण अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम में कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, सामाजिक संगठनों के प्रमुख व अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।

 

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