पेड़ के नीचे लेटे थे, तभी आतंकी ने पास में लेटे व्यक्ति को गोली मार दी: देबाशीष भट्टाचार्य का अनुभव
मैंने कलमा पढ़ना शुरू कर दिया, इसलिए बच गया : देबाशीष भट्टाचार्य, चश्मदीद पेड़ के नीचे लेटे थे, तभी आतंकी ने पास में लेटे व्यक्ति को गोली मार दी: देबाशीष भट्टाचार्य का अनुभव was lying under tree when the terrorist shot person lying nearby Debashish Bhattacharya experience
पेड़ के नीचे लेटे थे, तभी आतंकी ने पास में लेटे व्यक्ति को गोली मार दी: देबाशीष भट्टाचार्य का अनुभव
मैंने कलमा पढ़ना शुरू कर दिया, इसलिए बच गया : देबाशीष भट्टाचार्य, चश्मदीद
नई दिल्ली। पहलगाम में हुए आतंकी हमले की भयावहता को याद करते हुए देबाशीष भट्टाचार्य ने बताया कि वह उस समय अपने परिवार के साथ वहां मौजूद थे। उन्होंने कहा कि हमला होते ही अफरातफरी मच गई और वह अपने परिवार को लेकर एक पेड़ के नीचे छिप गए।
देबाशीष ने बताया, "हम सब जान बचाने के लिए ज़मीन पर लेट गए। तभी मैंने सुना कि मेरे आसपास लेटे लोग जोर-जोर से कलमा पढ़ रहे थे। माहौल इतना डरावना था कि मैंने भी उनके साथ कलमा पढ़ना शुरू कर दिया, ताकि मेरी पहचान न हो सके।"
उन्होंने बताया कि तभी एक आतंकी उनकी ओर बढ़ा और उनके पास ही लेटे एक व्यक्ति के सिर में गोली मार दी। यह देख देबाशीष स्तब्ध रह गए लेकिन डर के मारे हिले तक नहीं।
देबाशीष ने इस घटना को अपनी जिंदगी का सबसे भयावह अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि अगर उस समय उन्होंने कोई हरकत की होती या घबरा गए होते, तो शायद आज जिंदा न होते।
इस हमले में कई पर्यटक घायल हुए थे और कुछ की मौत भी हुई थी। यह हमला घाटी में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने घटना के बाद इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया था।
देबाशीष भट्टाचार्य ने कहा कि जब पहलगाम में आतंकवादियों ने पर्यटकों पर हमला किया था, तब वह अपने परिवार के साथ वहीं मौजूद थे और आतंकियों के डर के एक पेड़ के नीचे लेटे हुए थे. उन्होंने कहा, “मैं अपने परिवार के साथ पेड़ के नीचे लेटा हुआ था. तभी अचानक मैंने सुना कि मेरे आसपास मौजूद सभी लोग जोर-जोर से कलमा पढ़ रहे थे. यह सुनकर मैंने भी कलमा पढ़ना शुरू कर दिया. तभी एक आतंकी मेरी ओर बढ़ा और मेरे बगल में लेटे शख्स के सिर में गोली मार दी