नथूराम गोडसे ने अपने परिवार को पत्र में क्या लिखा
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मृत्युपत्र नथूराम गोडसे ने अपने परिवार को पत्र में क्या लिखा
पत्र लिख 14-11-1949
प्रिय बंधो। चि. दत्तात्रय वि. गोडसे मेरे बीमा के रुपिया अगर आ जायेंगे तो उस रुपिया का विनिभोग आपके परिवार के कार्य के लिए करना। रु २००० आपकी पत्नी के नाम पर। रु. ३००० चि. गोपाल की धर्मपत्नी के नाम पर और रु.२००० आपके नाम पर। इस तरह से बीमा के कागजों पर मैंने रुपिया मेरी मृत्यु के बाद मिलने के लिये लिला है।
मेरी उत्तर क्रिया करने का अधिकार अगर आपको मिलेगा तो आप आपकी इच्छा से किसी तरह से भी इस शुभ कार्य को समाप्त करना। लेकिन मेरी अन्तिम विशेष इच्छा यही लिखता है।
अपने भारत वर्ष की सीमारेषा सिंधू नदी है। जिसके किनारों पर वेदों की रचना प्राचीन दृष्टाओं ने की है। वह सिंधु नदी जिस शुभ दिन में फिर भारत वर्ष के ध्वज की छाया में स्वच्छदत. बहती रहेगी उन दिनों में मेरी अस्थियों या रक्षा का कुछ छोटा सा हिस्सा उस सिंधु नदी में बहा दिया जाय ।
यह मेरी इच्छा सत्यसृष्टि में आने के लिये शायद और भी एक दो पीढ़ी (Generations) का समय लग जाय तो भी चिंता नहीं। उस दिन तक वह अवशेष वैसा ही रखो और आपके जीवन में वह शुभ दिन न आये तो आपके वारिसों को ये मेरी अन्तिम इच्छा बतलाते जाना ।
अगर मेरा न्यायालयीन वक्तव्य कभी सरकार बन्ध मुक्त करेगी तो
उसके प्रकाशन का अधिकार भी मैं आपको दे रहा हूँ।
मैंने १०१ रुपिया आपको आज दिये हैं जो आप सौराष्ट्र सोमनाथ
मन्दिर का पुनरुद्धार हो रहा है उसके कलश कार्य के लिये भेज देना
(नाथूराम वि. गोडसे) १५.११.९३
समय ७.१५ प्रातः
आपका शुभेच्छु
नाथूराम वि. गोडसे
१४-११-४९