वक्फ संशोधन बिल से कब्जाधारियों को दिक्कत, पसमांदा समाज खुश
वक्फ संशोधन विधेयक पर जहां कुछ मुस्लिम संगठन विरोध कर रहे हैं, वहीं पसमांदा समाज इसे ऐतिहासिक पहल बताते हुए समर्थन में अभियान चला रहा है Wakf Amendment Bill causes problems for occupiers Pasmanda community happy, वक्फ संशोधन बिल से कब्जाधारियों को दिक्कत, पसमांदा समाज खुश
वक्फ संशोधन बिल से कब्जाधारियों को दिक्कत, पसमांदा समाज खुश
▶ विभिन्न राज्यों में पसमांदा समाज के लोग विधेयक के समर्थन में चला रहे अभियान
▶ कहा, वक्फ संपत्तियों पर अवैध रूप से कब्जा किए लोगों की हिलने वाली है नींव
वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड समेत अन्य मुस्लिम संगठनों ने भले ही केंद्र सरकार व सत्तारूढ़ गठबंधन दलों के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया हो, लेकिन मुस्लिम समाज का एक बड़ा तबका पसमांदा समाज इस संशोधन को ऐतिहासिक पहल बताते हुए इसके समर्थन में जागरूकता अभियान चला रहा है। उसके अनुसार, संशोधन से अगड़ी जाति के उन लोगों की नींव हिलने वाली है, जो वक्फ संपत्तियों पर अवैध रूप से कब्जा किए हुए हैं। इसलिए वे विरोध कर रह हैं और मुस्लिम समाज को बरगला रहे हैं।
पसमांदा समाज का मानना है कि बदलाव से वक्फ संपत्तियों का बेहतर रखरखाव होगा और ये शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार व आर्थिकी सहायता जैसे मामलों में मददगार साबित होंगी। इससे समाज में बेहतरी आएगी। पसमांदा समाज वक्फ बोर्ड में अन्य धर्म के लोगों को लाने व महिलाओं की मौजूदगी की हिमायत करते हुए अपने लिए आरक्षण की भी मांग कर रहा है। जेपीसी में ये मांगें रखी हैं। पसमांदा समाज देश की कुल मुस्लिम आबादी में करीब 80 प्रतिशत का वजूद रखता है, जो पिछड़े, अनुसूचित और जनजाति से हैं। उनके अनुसार, संशोधन से वक्फ संपत्तियों के असली अवैध कब्जेदारों अशराफ (अगड़ी जाति के आधिपत्य वाले बड़े मुस्लिम संगठनों की नींव हिलने वाली है, इसलिए वे विरोध में हैं और मुस्लिम समाज को बरगला रहे हैं। पसमांदा समाज के लोग खुद को भारत के वंशज तथा मुस्लिम आबादी में 20 प्रतिशत अशराफ को विदेशी आक्रांताओं के मूल का भी बताते हैं।
राष्ट्रवादी मुस्लिम पसमांदा समाज के अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष आतिफ रशीद के अनुसार, वक्फ बोर्ड की स्थापना इसलिए की गई थी कि उससे विधवा, गरीब और यतीम का कल्याण हो, लेकिन हो इसके उलट रहा है। हैदराबाद जैसे शहरों में 90 प्रतिशत से अधिक संपत्तियों पर कब्जा अशराफ समाज से आने वाले वहां के सांसद असदुद्दीन ओवैसी और उनके करीबियों का है। यह कब्जा कैसे छोड़ना चाहेंगे? इसी तरह की स्थिति जमीयत व जमात-ए-इस्लामी जैसे अन्य धार्मिक संगठनों की है।