सहारनपुर सीट की हार पर समीक्षा जारी
सहारनपुर लोकसभा सीट पर दूसरी बार भाजपा को बड़ी हार का मुंह देखना - पड़ा है। यहीं कारण है कि सप्ताह भर से गहन समीक्षा चल रही है।
सहारनपुर लोकसभा सीट पर दूसरा बार भाजपा को बड़ी हार का मुंह देखना - पड़ा है। यहीं कारण है कि सप्ताह भर से गहन समीक्षा चल रही है। समीक्षा में जो तथ्य सामने आ रहे है, उसमें हार के ठीकरे को लेकर विधायक से मंत्री तक पर निशाना है। कम वोट प्रतिशत और दलित वोटों के डायवर्जन को जनप्रतिनिधियों की बड़ी नाकामी माना जा रहा है। साथ ही भीतरघात पर भी पार्टी की बारीक नजर है।
सहारनपुर लोकसभा प्रत्याशी राघव लखनपाल शर्मा इस बार 64 हजार से ज्यादा मतों से सीधे मुकाबले में हारे है। 2019 में पार्टी प्रत्याशी करीब 22 हजार मतों से हारी थी। सबसे खास बात यह है कि इस बार न सिर्फ पार्टी की हार का अंतर बढ़ा है, बल्कि पार्टी अपनी परंपरागत अपनी शहर सीट को भी हार गई है। बेहट और सहारनपुर देहात विधानसभा में पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। दूसरी बात यह है कि विपक्ष में दो मुस्लिम उम्मीदवार होते हुए भाजपा की हार का अंतर बढ़ना पार्टी नेतृत्व को बेचैन किये हुए है।
हाइकमान की ओर से हारी हुई सीटों पर बारीकी से मंथन किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार कई मंत्री और विधायकों की भी वोटरों को बाहर न निकलवा पाने और दलित वोटों का डायवर्जन रोकने में नाकामी रही है। यह रिपोर्ट प्रदेश संगठन मंत्री को भेजी जा रही है।
(कम वोट प्रतिशत और दलित वोटों के डायवर्जन को जनप्रतिनिधियों की बड़ी नाकामी माना)
एक नेता पर भीतर घात का भी इशारा
पार्टी सूत्रों के अनुसार समीक्षा रिपोर्ट में जहां कई नेताओं पर वोटों को डलवाने में सूची न लेने जैसे आरोप बताये जा रहे है, वहीं पार्टी के एक युवा नेता पर भीतरघात का जैसे गंभीर आरोपों की ओर इशारा किया गया है।
संघ की और से भी भेजी गई एक रिपोर्ट
भाजपा प्रत्याशी की हार के बाद एक रिपोर्ट राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर से भी भेजी गई है। इस रिपोर्ट में भी कई दिग्गजों की कार्यप्रणाली का जिक्र किया गया है।