"जीवन में त्याग का महत्व" "Sacrifice in Life"
आज के इस समय में किसी के लिए कुछ भी अच्छा करने का भाव 'त्याग' है। जो आपके लिए त्याग करता है वही आपका अपना.
मां-बाप-गुरु का त्याग
एक माँ के सपनो का बच्चों के सपने पूरे करने में त्याग, एक बाप की इच्छाओं का बच्चों की इच्छा पूरी करने में त्याग, एक गुरु के जीवन का शिष्य के भविष्य के लिए त्याग, एक बडे भाई का अपने छोटे भाई-बहनों के लिए त्याग। इन्हीं सब त्याग के कारण रिश्तो की ना टूटने वाली डोर बँधी हुई है। परिवार की खुशी के किसी ना किसी एक को अपनी खुशी, सपनो का त्याग करना पड़ता है। पेड़ भी तो इसी भाव से खुद धूप में तपकर ओरों को फल एवं छाया प्रदान करते हैं। धरती पर महान पुरुषों का आना और समाज के लिए काम करना भी त्याग का ही संकेत है।
जीवन में अगर कोई व्यक्ति आपके लिए एक छोटा सा भी त्याग करे, उस व्यक्ति का सम्मान हमेशा रखे, क्योंकि जो खुशी वह खुद ले सकता था, वह आपको दी। खुशी का समर्पण ही तो वास्तविक समर्पण हैं। बच्चा समय से खाना खा पाये, खुद के खाने का त्याग करने वाली माँ त्याग का पर्याय है। बच्चे समय से पढ़ पाये, उसके लिए अपने शौक का त्याग करने वाला पिता त्याग का पर्याय है। बुढापे में माता-पिता जो प्यार चाहते हैं, उसी प्यार का त्याग सिर्फ इसलिए कर देते हैं, क्योंकि बच्चे की नौकरी घर से दूर है।
फंडा यह है..... आज के इस समय में कुछ भी अच्छा करने का भाव त्याग है। जो आपके लिए त्याग करता है वही आपका अपना हैं।