पाठ्यक्रम में मनुस्मृति व बाबरनामा जोड़ने का प्रस्ताव
दिल्ली विश्वविद्यालय, पाठ्यक्रम में मनुस्मृति व बाबरनामा जोड़ने का प्रस्ताव, Proposal to add Manusmriti and Baburnama in the syllabus,
पाठ्यक्रम में मनुस्मृति व बाबरनामा जोड़ने का प्रस्ताव
छात्रों के विरोध के बाद डीयू ने समीक्षा के दिए आदेश, विशेषज्ञ बोले, इतिहास को जानने के लिए एक अच्छा स्रोत
दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास आनर्स के पाठ्यक्रम में मनुस्मृति और तुजुक-ए-बाबरी (बाबरनामा) को शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया है। चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (एफवाईयूपी) के अंतर्गत डीयू में चौथे वर्ष के लिए पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। इसके लिए समितियां गठित की गई हैं। इतिहास विभाग की समिति ने सातवें सेमेस्टर के लिए जो नया पाठ्यक्रम तैयार किया है, उसमें मनुस्मृति और बाबरनामा को शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। कुछ छात्रों के विरोध के बाद पाठ्यक्रम की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
एफवाईयूपी के तहत डीयू में अगले वर्ष से चौथे वर्ष यानी सातवें और आठवें सेमेस्टर की पढ़ाई शुरू होगी। उसके लिए पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। इतिहास विभाग में इतिहास आनर्स के कोर पेपर 'भारतीय इतिहास के स्रोत' को 15 सदस्यीय समिति ने तैयार किया है। समिति की 19 फरवरी को हुई बैठक में में इसे मंजूर किया गया है। इसके बाद इसे स्टैंडिंग कमेटी और अकादमिक परिषद में प्रस्तुत किया जाना था। लेकिन, डीयू प्रशासन ने विवाद के कारण पहले ही समीक्षा के निर्देश दे दिए हैं। समिति ने पाठ्यक्रम में हर्ष चरित, मत्स्यपुराण, संगम कविताएं और दिल्ली सल्तनत के संस्कृत शिलालेख आदि को भी शामिल किया है। लेकिन, मनुस्मृति व बाबरनामा को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। समिति ने कहा है कि इससे छात्र किसी पुराने समय के लिखित पाठ को स्रोत के रूप में पढ़ सकेंगे, ऐतिहासिक दृष्टिकोण से विभिन्न प्रकार के स्रोतों का विभिन्न तरीकों से उपयोग कर सकेंगे।
डीयू में इतिहास के एक प्रोफेसर ने कहा, कोर पेपर स्रोत पर आधारित है। प्राचीन इतिहास को जानने के लिए मनुस्मृति एक अच्छा स्रोत है। इसी तरह मध्यकाल के लिए बाबरनामा एक स्रोत है। इसलिए इन्हें जोड़ने का प्रस्ताव है। विरोध कर रहे एक छात्र ने कहा, मनुस्मृति या बाबरनामा ही स्रोत क्यों होंगे। धर्म सूत्र, नारद सूत्र स्रोत क्यों नहीं हो सकते। मध्य भारत के इतिहास के लिए गुरु ग्रंथ साहिब, फतहनामा, जफरनामा और दासबोध स्रोत क्यों नहीं हो सकते। डीयू के एक अधिकारी ने कहा, समिति ने पाठ्यक्रम तैयार किया है और विश्वविद्यालय प्रशासन तक वह नहीं आया है। पहले वह स्टैंडिंग कमेटी में जाता है और फिर अकादमिक परिषद में। विश्वविद्यालय की ओर से पाठ्यक्रम की समीक्षा करने को कहा गया है।
पहले भी हुआ है विवाद: पिछले वर्ष डीयू में विधि संकाय के पेपर में मनुस्मृति को जोड़ दिया गया था। शिक्षक संगठनों व छात्रों के विरोध जताने पर कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने इसे हटाने की बात की थी। दोबारा पाठ्यक्रम में जोड़ने से विवि असहज हो गया है।
क्या है मनुस्मृति और बाबरनामा: डीयू में हिंदू अध्ययन केंद्र में प्रो. प्रेरणा मल्होत्रा ने कहा, मनु स्मृति ढाई हजार वर्ष पूर्व लिखी मानी जाती है।