संघ की गतिविधियों में कर्मियों के शामिल होने पर आपत्ति नहीं : केंद्र

केंद्रीय कर्मचारियों के आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने संबंधी दशकों पुराने आदेश में नौ जुलाई को संशोधन कर दिया गया है। केंद्र ने यह शपथ पत्र उस याचिका के तहत प्रस्तुत किया है, जिसमें केंद्रीय कर्मचारियों के संघ की गतिविधियों में शामिल होने की मनाही को चुनौती दी गई थी।

संघ की गतिविधियों में कर्मियों के शामिल होने पर आपत्ति नहीं : केंद्र

संघ की गतिविधियों में कर्मियों के शामिल होने पर आपत्ति नहीं : केंद्र

  • मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में दाखिल किया शपथ पत्र
  • बताया गया, दशकों पुराने आदेशों में कर दिया है संशोधन
  • शपथ पत्र को रिकार्ड पर लेते हुए कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा 

केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष शपथ पत्र देकर कहा है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की गतिविधियों में केंद्रीय कर्मचारियों के शामिल होने पर केंद्र को कोई आपत्ति नहीं है। केंद्रीय कर्मचारियों के आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने संबंधी दशकों पुराने आदेश में नौ जुलाई को संशोधन कर दिया गया है। केंद्र ने यह शपथ पत्र उस याचिका के तहत प्रस्तुत किया है, जिसमें केंद्रीय कर्मचारियों के संघ की गतिविधियों में शामिल होने की मनाही को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया है कि आरएसएस गैर राजनीतिक संगठन है और याची को अन्य संगठनों की तरह इसकी गतिविधियों में शामिल होने का अधिकार है। केंद्र सरकार के शपथ पत्र को रिकार्ड पर लेते हुए कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है। इस मामले की सुनवाई गुरुवार को होगी।


बता दें कि मप्र हाई कोर्ट में यह याचिका केंद्र सरकार के सेवानिवृत्त अधिकारी पुरुषोत्तम गुप्ता ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि आरएसएस द्वारा की जाने वाली सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों से प्रभावित होकर याचिकाकर्ता एक सक्रिय सदस्य के रूप में आरएसएस में शामिल होना चाहते हैं और उसकी गतिविधियों का हिस्सा बनना चाहते हैं।


याचिका में यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 1966 से आरएसएस की गतिविधियों को राजनीतिक गतिविधियां मानकर केंद्रीय कर्मचारियों के इसकी गतिविधियों में शामिल होने पर प्रतिबंध लगा रखा है। इससे सेवानिवृत्त कर्मी भी प्रभावित होते हैं। संघ की गतिविधियों में शामिल होने वाले कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित  की जाती है। यह याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों का हनन है। इस याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडवोकेट हिमांशु जोशी ने कोर्ट को बताया कि केंद्र ने वर्ष 1966, 1975 और 1980 में पारित आदेशों में संशोधन कर दिया है और इनमें से आरएसएस का नाम हटा दिया है। केंद्र की ओर से इस संबंध में शपथ पत्र भी दिया गया है।

बार-बार समय देने के बाद भी नहीं आ रहा था जवाब
याचिका में हाई कोर्ट द्वारा बार-बार समय देने के बावजूद केंद्र की ओर से जवाब नहीं आ रहा था। हाई कोर्ट ने इसे लेकर नाराजगी जताते हुए केंद्र शासन के अधिकारियों को वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से तलब भी किया था। अंततः केंद्र की ओर से 11 जुलाई को कोर्ट में शपथ पत्र के साथ जवाब प्रस्तुत किया गया।