कैलाश व्यू प्वाइंट: एक नया ऐतिहासिक मार्ग और श्रद्धालुओं के लिए सौगात
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कैलाश व्यू प्वाइंट: एक नया ऐतिहासिक मार्ग और श्रद्धालुओं के लिए सौगात
कैलाश पर्वत, जिसे हिन्दू धर्म में भगवान शिव का निवास स्थल माना जाता है, हमेशा से ही श्रद्धालुओं के लिए एक पवित्र स्थान रहा है। कैलाश-मानसरोवर यात्रा, जो भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए एक अहम धार्मिक यात्रा है, कोविड-19 महामारी के कारण लंबे समय तक स्थगित रही थी। अब, भारत सरकार के प्रयासों से, इस यात्रा को एक नए मार्ग के माध्यम से पुनः शुरू किया जा रहा है। लिपुलेख दर्रे के माध्यम से कैलाश-मानसरोवर यात्रा को फिर से खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इस यात्रा को और भी सुगम बनाने के लिए 'कैलाश व्यू प्वाइंट' का निर्माण किया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए एक नई सौगात होगी।
कैलाश पर्वत के दृश्य के लिए नया दृष्टिकोण
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित नाभीढांग में एक 2 किलोमीटर ऊँची पहाड़ी से कैलाश पर्वत का दृश्य स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। हालांकि यह स्थान पहले अधिक प्रसिद्ध नहीं था, लेकिन स्थानीय लोगों ने जब ओल्ड लिपुपास की पहाड़ी पर चढ़ाई की, तो उन्हें वहाँ से कैलाश पर्वत का दृश्य बेहद नजदीक और दिव्य दिखाई दिया। यह दृश्य इतना आकर्षक था कि यहाँ से श्रद्धालुओं को कैलाश पर्वत के दर्शन कराना एक नई पहल बन गई। हालांकि, ओल्ड लिपुपास तक पहुँचने के लिए 2 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई चढ़नी पड़ती है, जो सामान्य यात्रियों के लिए आसान नहीं है, लेकिन इसे एक सरल और सुगम मार्ग में बदलने के प्रयास जारी हैं।
इस स्थान से कैलाश पर्वत का दृश्य दर्शाने के लिए एक विशेष 'कैलाश व्यू प्वाइंट' का निर्माण किया जाएगा। यह स्थान एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां लोग न केवल कैलाश पर्वत के दर्शन कर सकेंगे, बल्कि यह क्षेत्र स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने में भी मदद करेगा। बीआरओ (बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन) ने इस व्यू प्वाइंट के निर्माण के लिए अपनी पूरी कोशिश की है और जल्द ही यह श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध होगा।
भारत सरकार के प्रयास और सड़क निर्माण
भारत सरकार के एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए एक नया मार्ग तैयार किया जा रहा है। यह मार्ग लिपुलेख दर्रे के माध्यम से कैलाश पर्वत तक पहुंचने का एक नया रास्ता खोलने वाला है। इसके तहत, पिथौरागढ़ जिले के नाभीढांग में 6.5 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है, जो भारतीय सीमा से कैलाश पर्वत के नजदीक स्थित लिपुलेख दर्रे तक पहुँचेगी। यह सड़क भारतीय क्षेत्र से कैलाश पर्वत के दर्शन करने के लिए एक सीधा और आसान मार्ग प्रदान करेगी। बीआरओ के अनुसार, यह सड़क पूरी होने के बाद, भक्तों के लिए कैलाश पर्वत तक पहुँचने का रास्ता काफी सुविधाजनक हो जाएगा।
बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) ने इस प्रोजेक्ट के तहत नाभीढांग से लिपुलेख दर्रे तक सड़क काटने का काम शुरू कर दिया है। उम्मीद की जा रही है कि यह काम सितंबर तक पूरा हो जाएगा। बीआरओ के चीफ इंजीनियर विमल गोस्वामी ने बताया कि सड़क कटाई का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है और अगर मौसम अनुकूल रहता है, तो सितंबर तक सड़क पूरी तरह से तैयार हो जाएगी।
कैलाश व्यू प्वाइंट: तीर्थयात्रियों के लिए सौगात
सड़क के किनारे एक आकर्षक कैलाश व्यू प्वाइंट का निर्माण किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को कैलाश पर्वत के दर्शन का एक अद्वितीय अनुभव मिलेगा। यह व्यू प्वाइंट न केवल कैलाश पर्वत के दृश्य का एक बेहतरीन स्थान होगा, बल्कि यह स्थल स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। कैलाश पर्वत के दर्शन के लिए पहले जो कठिन रास्ते थे, अब इस नए मार्ग और व्यू प्वाइंट के कारण यात्रा अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।
'कैलाश व्यू प्वाइंट' का विकास उत्तराखंड सरकार के हीरक प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट एक ऐतिहासिक पहल है, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे पर्यटन उद्योग को भी एक नया आयाम मिलेगा। इस व्यू प्वाइंट के माध्यम से पर्यटकों को एक अद्भुत अनुभव मिलेगा और वे कैलाश पर्वत के नजदीक पहुंचने का आनंद उठा सकेंगे।
कैलाश मानसरोवर यात्रा: नई संभावनाएँ
कैलाश मानसरोवर यात्रा भारतीय हिंदू धर्म के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण यात्रा रही है। इसे लेकर लोगों में हमेशा उत्साह और श्रद्धा रही है। हालांकि, पहले यह यात्रा कठिन मार्गों के माध्यम से होती थी, अब लिपुलेख दर्रे के माध्यम से कैलाश पर्वत तक पहुँचने का एक नया, आसान और सुरक्षित मार्ग तैयार किया जा रहा है। इस मार्ग के खुलने से, विशेष रूप से उत्तराखंड और सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग इसे अपनी यात्रा का हिस्सा बना सकेंगे।
भारत में कैलाश-मानसरोवर यात्रा के दो प्रमुख मार्ग हैं: एक सिक्किम के रास्ते और दूसरा काठमांडू के रास्ते। सिक्किम रूट पर, बागडोगरा तक उड़ान भरने के बाद, 1,665 किलोमीटर की सड़क यात्रा और 43 किलोमीटर की पैदल परिक्रमा होती है। वहीं, काठमांडू के रास्ते पर भी यात्रा का एक लंबा और कठिन मार्ग है। लेकिन लिपुलेख दर्रे से जुड़ा नया मार्ग श्रद्धालुओं को एक सरल और अधिक सुगम यात्रा का अनुभव कराएगा।
उम्मीदें और भविष्य की दिशा
कैलाश व्यू प्वाइंट का निर्माण और लिपुलेख दर्रे के माध्यम से कैलाश पर्वत तक पहुँचने का मार्ग निश्चित रूप से भारत और नेपाल के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगा। इसके अलावा, यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण होगा और स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
भारत सरकार द्वारा इस परियोजना पर किए जा रहे प्रयासों से यह उम्मीद जताई जा रही है कि सितंबर 2025 तक इस मार्ग और कैलाश व्यू प्वाइंट का उद्घाटन किया जाएगा। इस नए मार्ग के खुलने से श्रद्धालुओं को कैलाश पर्वत के दर्शन के लिए एक सरल और सुरक्षित रास्ता मिलेगा, जिससे उनकी यात्रा अधिक सुविधाजनक और सुखद हो सकेगी।
इस प्रकार, कैलाश व्यू प्वाइंट और लिपुलेख दर्रे का नया मार्ग भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण और सुखद बदलाव लेकर आएगा।