7 जून का इतिहास – आज की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ, जन्म, पुण्यतिथि
जानिए 7 जून का इतिहास – इस दिन भारत और विश्व में घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ, प्रसिद्ध व्यक्तियों के जन्म व निधन की जानकारी। आज के दिन से जुड़ी रोचक और महत्वपूर्ण बातें। Information about six important historical events of June 7, 7 जून की छह महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में जानकारी
7 जून का इतिहास – आज की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ, जन्म, पुण्यतिथि
1. 1539 - चौसा की लड़ाई:
7 जून 1539 को बिहार के बक्सर के निकट चौसा में मुग़ल बादशाह हुमायूँ और अफ़गान शासक शेरशाह सूरी के बीच ऐतिहासिक युद्ध हुआ। इस लड़ाई में शेरशाह ने हुमायूँ को बुरी तरह पराजित किया और मुग़ल सेना को भारी नुकसान पहुंचाया। हुमायूँ को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। इस विजय के बाद शेरशाह ने खुद को 'हिंदुस्तान का सम्राट' घोषित किया और दिल्ली की गद्दी पर कब्जा किया। यह युद्ध भारतीय इतिहास में मुग़लों की सत्ता पर एक बड़े संकट का प्रतीक बना और शेरशाह सूरी की बुद्धिमत्ता और सैन्य रणनीति का प्रमाण बना।
2. 1631 - मुमताज़ महल का निधन:
7 जून 1631 को मुग़ल सम्राट शाहजहाँ की पत्नी मुमताज़ महल का निधन बुरहानपुर में हुआ। वे 39 वर्ष की थीं और अपने 14वें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हुई। मुमताज़ शाहजहाँ की प्रिय पत्नी थीं, जिनकी याद में उन्होंने विश्व प्रसिद्ध ताजमहल का निर्माण कराया। मुमताज़ का असली नाम अरजुमंद बानो बेगम था। उनकी मृत्यु के बाद शाहजहाँ गहरे शोक में डूब गए और उन्होंने ताजमहल को एक प्रेम और श्रद्धांजलि के प्रतीक के रूप में बनवाया, जो आज भी प्रेम का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।
3. 1893 - गांधी का सविनय अवज्ञा आंदोलन:
7 जून 1893 को महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ़्रीका में नस्लीय भेदभाव के विरुद्ध पहली बार सविनय अवज्ञा का प्रयोग किया। यह घटना उस समय हुई जब उन्हें प्रिटोरिया की एक ट्रेन से केवल अपनी नस्ल के कारण बाहर फेंक दिया गया। इस अपमान ने गांधीजी को सामाजिक अन्याय के विरुद्ध शांतिपूर्ण और अहिंसक आंदोलन की राह पर चलने के लिए प्रेरित किया। यहीं से उनके सत्याग्रह और सविनय अवज्ञा के सिद्धांतों की नींव पड़ी, जो बाद में भारत की स्वतंत्रता संग्राम का आधार बने। यह घटना उनके जीवन का निर्णायक मोड़ बनी।
4. 1981 - भास्कर प्रथम का प्रक्षेपण:
7 जून 1981 को भारत ने अपने दूसरे उपग्रह ‘भास्कर-प्रथम’ का सफल प्रक्षेपण किया। यह उपग्रह भारत और सोवियत संघ के सहयोग से लॉन्च किया गया था और इसका उद्देश्य पृथ्वी के संसाधनों की जानकारी जुटाना था। भास्कर-1 एक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट था, जिससे जलवायु, भूमि उपयोग, और वनस्पति संबंधी डाटा प्राप्त किया गया। यह उपग्रह भारत की अंतरिक्ष तकनीक की प्रगति का प्रतीक बना और इसने आगे चलकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को सुदृढ़ आधार प्रदान किया। यह भारत के वैज्ञानिक इतिहास में एक उल्लेखनीय उपलब्धि रही।
5. 1995 - नार्मन थैगार्ड की उपलब्धि:
7 जून 1995 को अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री नार्मन थैगार्ड अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय तक रहने वाले पहले अमेरिकी बने। उन्होंने रूसी अंतरिक्ष स्टेशन ‘मीर’ पर लगभग 115 दिन बिताए, जो उस समय तक किसी अमेरिकी द्वारा अंतरिक्ष में बिताया गया सबसे लंबा समय था। यह उपलब्धि अमेरिका और रूस के अंतरिक्ष सहयोग का प्रतीक भी बनी। थैगार्ड की यह यात्रा मानव अंतरिक्ष उड़ानों के इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जाती है। उनकी यह उपलब्धि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सहयोग के नए आयाम खोलने वाली रही।
6. 1998 - कार्लोस मोया की जीत:
7 जून 1998 को स्पेन के टेनिस खिलाड़ी कार्लोस मोया ने फ्रेंच ओपन का पुरुष एकल खिताब जीता। उन्होंने फाइनल में हमवतन खिलाड़ी एलेक्स कोरेचा को हराकर यह खिताब अपने नाम किया। यह जीत मोया के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है। उनकी आक्रामक शैली और क्ले कोर्ट पर शानदार प्रदर्शन ने उन्हें उस समय का शीर्ष खिलाड़ी बना दिया। यह स्पेन के लिए गर्व का क्षण था क्योंकि फ्रेंच ओपन जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में स्पेनिश वर्चस्व दिखा। यह जीत यूरोपीय टेनिस जगत में स्पेन की मजबूत उपस्थिति का संकेत बनी।
2. महेश भूपति (जन्म: 7 जून 1974)
महेश भूपति भारत के सर्वश्रेष्ठ टेनिस खिलाड़ियों में से एक हैं। वे ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बने, जब उन्होंने 1997 में फ्रेंच ओपन मिक्स्ड डबल्स जीता। उनका सबसे प्रसिद्ध जोड़ीदार लिएंडर पेस रहा, जिनके साथ उन्होंने कई डबल्स खिताब जीते, जिनमें 1999 में तीन ग्रैंड स्लैम फाइनल शामिल हैं। भूपति ने कुल 12 ग्रैंड स्लैम खिताब (डबल्स और मिक्स्ड डबल्स मिलाकर) जीते हैं। वे भारत में टेनिस को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं और कई युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बने हैं।
3. ख़्वाजा अहमद अब्बास (जन्म: 7 जून 1914)
ख़्वाजा अहमद अब्बास भारतीय सिनेमा और साहित्य की दुनिया के एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे। वे एक प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक, पटकथा लेखक, पत्रकार और उर्दू लेखक थे। उन्होंने 'आवारा', 'श्री 420', और 'मेरा नाम जोकर' जैसी कई प्रसिद्ध फिल्मों की पटकथाएँ लिखीं। अब्बास सामाजिक विषयों पर आधारित सिनेमा के अग्रदूत माने जाते हैं। उनकी फिल्में आम आदमी की समस्याओं और सामाजिक विषमताओं को प्रभावशाली ढंग से दर्शाती थीं। उन्होंने 'बंबई रात की बाहों में', 'धर्ती के लाल' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया और भारतीय यथार्थवादी सिनेमा को नई दिशा दी।
4. वर्जीनिया एपगर (जन्म: 7 जून 1909)
वर्जीनिया एपगर एक प्रसिद्ध अमेरिकी प्रसूति रोग विशेषज्ञ (Obstetric Anesthetist) थीं, जिन्होंने नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य का मूल्यांकन करने के लिए “एपगार स्कोर” विकसित किया। यह स्कोर नवजात के जन्म के बाद उसके शारीरिक लक्षणों—दिल की धड़कन, साँस, मांसपेशियों की गति, त्वचा की रंगत और प्रतिक्रिया—को मापकर उसकी स्थिति का त्वरित मूल्यांकन करता है। यह प्रणाली आज भी दुनिया भर में उपयोग की जाती है और neonatal care में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आई। एपगर महिलाओं के लिए विज्ञान और चिकित्सा में अग्रणी रोल मॉडल बनीं और उन्हें व्यापक सम्मान मिला।
7 जून को हुए प्रमुख निधन एवं उनके संक्षिप्त परिचय
1. नटराज रामकृष्ण (निधन: 7 जून 2011)
नटराज रामकृष्ण भारत के प्रतिष्ठित नृत्य गुरु और शास्त्रीय नृत्य के संवाहक थे। उन्होंने खासतौर पर आंध्र प्रदेश में कुचिपुड़ी नृत्य शैली को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे नृत्य को केवल कला नहीं बल्कि आध्यात्मिक अनुभव मानते थे। उन्होंने 'नृत्य निकेतन' की स्थापना की, जहाँ अनेक छात्रों को प्रशिक्षित किया। उन्हें नृत्य के क्षेत्र में योगदान के लिए कई राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए, जिनमें पद्मश्री भी शामिल है। उनकी मृत्यु भारतीय शास्त्रीय नृत्य-जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति थी।
2. बी. डी. जत्ती (निधन: 7 जून 2002)
बसप्पा दानप्पा जत्ती, जिन्हें बी. डी. जत्ती के नाम से जाना जाता है, भारत के उपराष्ट्रपति और 1977 में राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद के निधन के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति भी रहे। वे एक ईमानदार, सादगीपूर्ण और विचारशील राजनेता माने जाते थे। कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में भी उन्होंने काम किया। उनकी पहचान संवैधानिक मूल्यों के प्रति समर्पित एक राजनेता के रूप में होती है। 7 जून 2002 को उनका निधन हुआ। उनका सार्वजनिक जीवन पारदर्शिता और सेवा भावना का आदर्श उदाहरण रहा।
3. ऐलन ट्यूरिंग (निधन: 7 जून 1954)
ऐलन ट्यूरिंग एक महान अंग्रेज़ गणितज्ञ, तर्कशास्त्री और कंप्यूटर विज्ञान के जनक माने जाते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने जर्मनी के "एनिग्मा कोड" को तोड़कर युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने ट्यूरिंग मशीन और ट्यूरिंग टेस्ट जैसे सिद्धांत दिए, जो आज भी कंप्यूटर विज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मूल आधार हैं। समाज की उपेक्षा और कानूनी भेदभाव के कारण उनका जीवन दुखद रूप से समाप्त हुआ। 7 जून 1954 को उन्होंने आत्महत्या कर ली। बाद में उन्हें मरणोपरांत ब्रिटेन की ओर से क्षमा और सम्मान मिला।
7 जून के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस (World Food Safety Day):
हर वर्ष 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत 2019 में संयुक्त राष्ट्र संघ और WHO द्वारा की गई। इसका उद्देश्य सुरक्षित और पौष्टिक भोजन के महत्व को बढ़ावा देना है, जिससे खाद्य जनित बीमारियों से बचाव किया जा सके। यह दिन खाद्य उत्पादकों, वितरकों, उपभोक्ताओं और नीति निर्माताओं को इस दिशा में जिम्मेदारी और जागरूकता की प्रेरणा देता है। हर साल इसकी थीम तय की जाती है, जो खाद्य सुरक्षा से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करती है।
1. सुमित अंतिल (जन्म: 7 जून 1998)
सुमित अंतिल एक भारतीय पैरा एथलीट हैं, जिन्होंने भाला फेंक (जैवेलिन थ्रो) में देश का नाम रोशन किया है। एक सड़क दुर्घटना में अपना पैर गंवाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और खेल में नई ऊँचाइयाँ हासिल कीं। टोक्यो पैरालंपिक 2020 में उन्होंने F64 श्रेणी में 68.55 मीटर भाला फेंककर विश्व रिकॉर्ड बनाया और भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता। उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्म श्री जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उनका जीवन साहस, संघर्ष और प्रेरणा का प्रतीक है।
2. महेश भूपति (जन्म: 7 जून 1974)
महेश भूपति भारत के पहले पुरुष टेनिस खिलाड़ी हैं जिन्होंने ग्रैंड स्लैम खिताब जीता। उन्होंने 1997 में फ्रेंच ओपन मिक्स्ड डबल्स जीतकर इतिहास रचा। लिएंडर पेस के साथ उनकी जोड़ी ने 1999 में तीन ग्रैंड स्लैम फाइनल खेले और फ्रेंच ओपन भी जीता। भूपति ने करियर में 12 ग्रैंड स्लैम खिताब (डबल्स और मिक्स्ड डबल्स मिलाकर) जीते। वे पेशेवर युग में भारत के अग्रणी टेनिस सितारों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने टेनिस प्रमोटर और कोच की भूमिका में भी योगदान दिया। उनकी उपलब्धियाँ भारतीय टेनिस को वैश्विक मंच पर स्थापित करती हैं।
3. ख़्वाजा अहमद अब्बास (जन्म: 7 जून 1914)
ख़्वाजा अहमद अब्बास भारतीय फिल्म उद्योग और साहित्य के एक बहुप्रतिभाशाली व्यक्ति थे। वे एक प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक, पत्रकार और लेखक थे। उन्होंने राज कपूर की फिल्मों जैसे 'आवारा', 'श्री 420', और 'मेरा नाम जोकर' की पटकथा लिखी। उनकी फिल्मों में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को गहराई से छुआ गया। उन्होंने 'धर्ती के लाल', 'बंबई रात की बाहों में' जैसी यथार्थवादी फिल्मों का निर्देशन किया। अब्बास उर्दू साहित्य में भी प्रसिद्ध थे। वे सच्चे अर्थों में जनसरोकारों से जुड़ी सृजनात्मकता के प्रतीक थे।
4. वर्जीनिया एपगर (जन्म: 7 जून 1909)
वर्जीनिया एपगर एक प्रसिद्ध अमेरिकी प्रसूति एनेस्थेटिस्ट थीं जिन्होंने नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य मूल्यांकन के लिए 'एपगर स्कोर' विकसित किया। यह स्कोर जन्म के तुरंत बाद शिशु की शारीरिक स्थिति का आँकलन करता है और आज भी दुनिया भर में अपनाया जाता है। वह कोलंबिया यूनिवर्सिटी की पहली महिला प्रोफेसर बनीं और महिलाओं के लिए चिकित्सा के क्षेत्र में प्रेरणा बनीं। उनके काम ने नवजात मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सा जगत में उनके योगदान को सम्मानपूर्वक याद किया जाता है।