समरसता के महान पुरोधा थे डा. आंबेडकर, देश रखेगा यादः भागवत
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर को सामाजिक समरसता का अग्रदूत बताया और नागरिकों से स्वदेशी को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने एकता, वंचित क्षेत्रों में सेवा और भारतीय मूल्यों के पुनरुद्धार पर जोर दिया। समरसता के महान पुरोधा थे डा. आंबेडकर, देश रखेगा यादः भागवत, Dr Ambedkar was a great pioneer of harmony the country will remember him Bhagwat,
समरसता के महान पुरोधा थे डा. आंबेडकर, देश रखेगा यादः भागवत
कहा-स्वदेशी को बढ़ावा दें देशवासी, सबसे पहले स्वयंसेवक करें इसकी शुरुआत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डा. मोहन भागवत ने कहा है कि संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर समरसता के महान पुरोधा थे। उनके योगदान को देश हमेशा याद रखेगा। सामाजिक समरसता में भी उनका प्रमुख योगदान रहा है। संघ के पंच परिवर्तन में समरसता भी एक बिंदु है। भाजपा पर विपक्ष द्वारा लगातार संविधान खत्म करने का आरोप लगाए जाने के बीच संघ प्रमुख का यह बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने स्वदेशी को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। कहा, स्वदेशी की भावना घर-घर तक पहुंचाएं। दैनिक जीवन में स्वदेशी लाना है।
पांच दिवसीय प्रवास के अंतिम दिन सोमवार को संघ प्रमुख ने सबसे अधिक जोर सामाजिक समरसता पर दिया। केशव सेवाधाम में ब्रज प्रांत के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में उन्होंने कहा कि सेवा बस्तियों में जाएं। वहां के लोगों के बीच समरसता का भाव पैदा करें। विभिन्न प्रकल्प और आयामों के माध्यम से उन्हें संघ की विचारधारा से जोड़ें। हमें भी जातिभेद मिटाकर सर्व समाज के घरों तक जाना है। उन्हें अपने घर भोजन और जलपान पर बुलाना है। भागवत ने कहा कि स्वयंसेवक ही सामाजिक समरसता का अच्छा उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं। हिंदुओं को एकजुट करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने पंच परिवर्तन के बिंदु, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, सामाजिक समरसता, 'स्व' का जागरण व नागरिक कर्तव्य पर भी बात की।