भारतीय मरीजों पर केंद्रित शोध से ही असरदार होगा मधुमेह का इलाज
मधुमेह और चयापचय बीमारियों को लेकर बढ़ती चुनौती पर बात की गई। संगोष्ठी
भारतीय मरीजों पर केंद्रित शोध से ही असरदार होगा मधुमेह का इलाज
भारत में मधुमेह के मरीजों का इलाज पश्चिमी देशों पर आधारित पारंपरिक शोध के आधार पर उतना प्रभावी नहीं हो सकता। इसके लिए यहां के मरीजों के डाटा का विश्लेषण जरूरी है, क्योंकि भारतीय मरीजों पर केंद्रित शोध के जरिए मधुमेह के इलाज अधिक असरदार साबित होगा।
यह बात गुरुग्राम में आयोजित 13वीं आहूजा बजाज संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने कही। इस दौरान मधुमेह और चयापचय बीमारियों को लेकर बढ़ती चुनौती पर बात की गई। संगोष्ठी के प्रमुख आयोजक डॉ अनूप मिश्रा ने संगोष्ठी में मौजूद विशेषज्ञ।
कहा कि इस संगोष्ठी उद्देश्य केवल ज्ञान बढ़ाना नहीं, बल्कि हर सत्र का उद्देश्य वह ज्ञान देना है जिसे डॉक्टर मरीज के इलाज में तुरंत लागू कर सकें। संगोष्ठी में क्रोनिक किडनी बीमारी की नई दवाओं, जीएलपी-1 आधारित वजन घटाने की थेरेपी के दौरान पोषण रणनीतियों, पैरों की धमनियों में ब्लॉकेज के उभरते उपचार और माइक्रोप्लास्टिक जैसे नए खतरों पर भी बात की गई।
विशेषज्ञों ने डाइट दिमागी सेहत, आंखों पर दवाओं के प्रभाव व चयापचय बीमारियों में पोषण की नई भूमिका पर भी जानकारी साझा की। दिल्ली एम्स के पूर्व निदेशक प्रो पीके दवे मुख्य अतिथि रहे। इसके साथ ही एम्स के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एएन मालवीय और आईएलबीएस अस्पताल के निदेशक डॉ एसके सरीन ने कई अहम जानकारियां साझा की। ब्यूरो