नेपाल में समय से पहले मानसून से बढ़ी चिंता, बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास पर खतरा
नेपाल में समय से पहले मानसून से बढ़ी चिंता, बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास पर खतरा, Concerns rise due to premature monsoon in Nepal, threat to rehabilitation of flood victims,
नेपाल में समय से पहले मानसून से बढ़ी चिंता, बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास पर खतरा
काठमांडू/नार्के – नेपाल में समय से पहले पहुंचे मानसून और आगामी दिनों में औसत से अधिक वर्षा की आशंका ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नई चिंता खड़ी कर दी है। सितंबर 2024 में आई विनाशकारी बाढ़ के आठ महीने बाद भी हजारों पीड़ित पूरी तरह से सामान्य जीवन में नहीं लौट सके हैं।
विशेष रूप से कावरेपालनचोक जिले में बीपी हाईवे के किनारे स्थित नार्के में अस्थायी शिविरों में रह रहे बाढ़ बचे लोग अब एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की आशंका से जूझ रहे हैं। इन शिविरों में जीवन पहले से ही कठिन है, और अब समय से पहले आई बारिश ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
स्थानीय अधिकारियों और राहत एजेंसियों का कहना है कि अभी भी बड़ी संख्या में लोग स्थायी आवास और बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। अगर मानसून की बारिश सामान्य से अधिक हुई, तो ये अस्थायी ठिकाने भारी जोखिम में आ सकते हैं।
मौसम विभाग ने चेताया है कि जून के अंत से ही नेपाल में मानसून सक्रिय हो गया है, जबकि आमतौर पर यह जुलाई में आता है। इससे नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि और भूस्खलन की घटनाओं की संभावना बढ़ गई है।
पीड़ितों ने सरकार से जल्द पुनर्वास की प्रक्रिया तेज करने और सुरक्षित स्थानों पर शरण दिलाने की मांग की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम चक्रों में हो रहे बदलाव अब नेपाल जैसे पर्वतीय देशों के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं।