वही जीवित है, जिसका मस्तिष्क ठंढा, रक्त गरम, हृदय कोमल, और पुरुषार्थ प्रखर है।
वही जीवित है, जिसका मस्तिष्क ठंढा, रक्त गरम, हृदय कोमल, और पुरुषार्थ प्रखर है।
वही जीवित है, जिसका मस्तिष्क ठंढा, रक्त गरम, हृदय कोमल, और पुरुषार्थ प्रखर है।
सच्चा जीवन वही जीता है, जिसका मस्तिष्क शांत और विचारशील होता है, जो हर परिस्थिति में धैर्य बनाए रखता है। उसका रक्त उत्साह और जोश से भरा होता है, जो हर चुनौती का सामना करने की शक्ति देता है।
उसका हृदय कोमल और संवेदनशील होता है, जो दूसरों की पीड़ा समझने और उनकी सहायता करने के लिए प्रेरित करता है।
साथ ही, उसका पुरुषार्थ दृढ़ और अटूट होता है, जो उसे कठिनाइयों से लड़ने और अपने लक्ष्य को पाने के लिए निरंतर प्रयास करने की शक्ति देता है। ऐसे ही व्यक्ति वास्तव में जीवित कहलाते हैं।