प्रेमानंद महाराज: कानपुर से वृंदावन तक आध्यात्मिक यात्रा की प्रेरक कहानी

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Apr 2, 2025 - 18:35
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प्रेमानंद महाराज: कानपुर से वृंदावन तक आध्यात्मिक यात्रा की प्रेरक कहानी
प्रेमानंद महाराज

प्रेमानंद महाराज: कानपुर से वृंदावन तक आध्यात्मिक यात्रा की प्रेरक कहानी

भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में संतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन्हीं संतों में से एक हैं वृंदावन के प्रसिद्ध संत स्वामी प्रेमानंद महाराज। उनके प्रवचनों को सुनने के लिए आम जनमानस के साथ-साथ कई बड़े अभिनेता, नेता और खिलाड़ी भी पहुंचते हैं। प्रेमानंद महाराज के जीवन का सफर अत्यंत रोचक और प्रेरणादायक है।

प्रेमानंद महाराज का प्रारंभिक जीवन

प्रेमानंद महाराज का जन्म वर्ष 1969 में उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के सरसौल ब्लॉक के अखरी गांव में एक सात्विक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका असली नाम अनिरुद्ध पांडे था। उनके पिता शंभू पांडे और माता रमा देवी भी भक्तिमय प्रवृत्ति के थे। परिवार के आध्यात्मिक माहौल का प्रभाव उनके मन पर पड़ा और बचपन से ही वह धार्मिक ग्रंथों में रुचि लेने लगे। पाँचवीं कक्षा में ही उन्होंने सुखसागर पढ़ लिया था और श्रीमद् भागवत के श्लोकों का पाठ करना शुरू कर दिया था।

घर छोड़कर सन्यास की ओर अग्रसर

प्रेमानंद महाराज ने 12-13 वर्ष की उम्र में सन्यास लेने का निर्णय लिया और घर छोड़ दिया। आध्यात्मिक जिज्ञासा के चलते वे वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने संतों का संग प्राप्त किया और शास्त्रों का अध्ययन किया। उन्होंने श्री राधाबल्लभ संप्रदाय से दीक्षा ग्रहण कर भक्ति मार्ग में पूर्ण रूप से समर्पित हो गए। उनकी साधना और प्रवचनों की ख्याति धीरे-धीरे बढ़ती गई और वे करोड़ों भक्तों के प्रिय बन गए।

वृंदावन में आध्यात्मिक सेवा

आज प्रेमानंद महाराज वृंदावन के वराह घाट स्थित श्रीहित राधा केली कुंज आश्रम में निवास करते हैं। उनके सत्संग और प्रवचन कार्यक्रमों में लाखों लोग शामिल होते हैं। सोशल मीडिया पर भी उनके प्रवचन करोड़ों लोग देखते और सुनते हैं।

उनके सत्संगों में किसी भी व्यक्ति के लिए कोई विशेष वीआईपी व्यवस्था नहीं होती। महाराज न तो किसी चमत्कार का दावा करते हैं और न ही अपनी सिद्धियों का प्रदर्शन करते हैं। उनके शिष्यों में क्रिकेटर विराट कोहली और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जैसी हस्तियां भी शामिल हैं।

स्वास्थ्य संघर्ष और अटूट भक्ति

प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनियां कई वर्षों से खराब हैं। बताया जाता है कि 35 वर्ष की आयु में उन्हें पेट में संक्रमण हुआ था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में पता चला कि उनकी दोनों किडनियां काम नहीं कर रही हैं और डॉक्टरों ने उनकी उम्र ज्यादा लंबी न होने की बात कही। लेकिन उनकी अटूट श्रद्धा और भक्ति ने उन्हें आज भी जीवित रखा है।

उनका रोजाना डायलिसिस होता है, फिर भी वे सत्संग और प्रवचन करना जारी रखते हैं। कई भक्तों ने उन्हें किडनी दान करने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने विनम्रता से मना कर दिया। महाराज ने अपनी किडनियों को राधा और कृष्ण नाम दिया है। उनका मानना है कि ईश्वर की कृपा से ही जीवन चलता है

प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता और भक्ति संदेश

प्रेमानंद महाराज की सादगी और प्रेमभाव से ओतप्रोत प्रवचन भक्तों को अत्यंत आकर्षित करते हैं। वे भक्ति को केवल कर्मकांड नहीं बल्कि हृदय की निष्ठा और समर्पण का मार्ग मानते हैं। उनकी बातों में गहराई, सहजता और ईश्वरीय प्रेम का स्पर्श होता है, जिससे हर उम्र के लोग जुड़ाव महसूस करते हैं।

उनके सत्संगों में रामकथा, कृष्ण लीला, भगवद्गीता और श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रसंगों का समावेश होता है। उनके विचारों में आध्यात्मिकता और व्यवहारिकता का सुंदर संतुलन देखने को मिलता है।

स्वामी प्रेमानंद महाराज एक ऐसे संत हैं, जिन्होंने अपने जीवन को राधा-कृष्ण की भक्ति में समर्पित कर दिया। उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने धैर्य, श्रद्धा और समर्पण के साथ हर चुनौती का सामना किया। उनकी प्रेरणादायक कहानी यह दर्शाती है कि सच्ची भक्ति और आध्यात्मिकता किसी भी कठिनाई से ऊपर होती है। उनके प्रवचन और शिक्षाएं लोगों को प्रेम, भक्ति और सादगी का मार्ग दिखाती हैं।

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@Dheeraj kashyap युवा पत्रकार- विचार और कार्य से आने वाले समय में अपनी मेहनत के प्रति लगन से समाज को बेहतर बना सकते हैं। जरूरत है कि वे अपनी ऊर्जा, साहस और ईमानदारी से र्काय के प्रति सही दिशा में उपयोग करें , Bachelor of Journalism And Mass Communication - Tilak School of Journalism and Mass Communication CCSU meerut / Master of Journalism and Mass Communication - Uttar Pradesh Rajarshi Tandon Open University पत्रकारिता- प्रेरणा मीडिया संस्थान नोएडा 2018 से केशव संवाद पत्रिका, प्रेरणा मीडिया, प्रेरणा विचार पत्रिका,