भारत की अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपरा रही है – पराग अभ्यंकर जी
ब्यावरा, मध्यभारत। संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मंगलवार को सरस्वती शिशु मंदिर, ब्यावरा में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सेवा प्रमुख पराग अभ्यंकर जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य संपूर्ण हिन्दू समाज को एकरस बनाकर भारत […] The post भारत की अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपरा रही है – पराग अभ्यंकर जी appeared first on VSK Bharat.
ब्यावरा, मध्यभारत। संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मंगलवार को सरस्वती शिशु मंदिर, ब्यावरा में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सेवा प्रमुख पराग अभ्यंकर जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य संपूर्ण हिन्दू समाज को एकरस बनाकर भारत को परम वैभव तक पहुंचाना है। एक समय भारत विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित था। हमारे ऋषि-मुनियों के चिंतन और जीवन मूल्यों के कारण विश्व भारत का अनुसरण करता था। भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था, इसी कारण ग्रीक, हूण, शक, इस्लामिक आक्रमणकारियों और अंग्रेजों ने बार-बार आक्रमण किए, जिससे देश की शक्ति और व्यवस्था कमजोर हुई। कुछ लोगों ने यह भ्रम फैलाया कि सभ्यता अंग्रेजों ने सिखाई, जबकि भारत की अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपरा रही है।
उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ समाज में आत्मविश्वास जगाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इसी उद्देश्य से डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की।
जब-जब देश पर संकट आया, संघ के स्वयंसेवक समाज और राष्ट्र के लिए आगे आए। संघ की शक्ति सरकार नहीं, बल्कि समाज है।
संघ द्वारा समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए चलाए जा रहे पांच प्रमुख आयामों का उल्लेख किया। इनमें परिवार प्रबोधन के माध्यम से परिवार को सशक्त बनाना, समरसता के माध्यम से जातिगत भेदभाव समाप्त करना, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता, स्वदेशी अपनाने की भावना और नागरिक कर्तव्यों के प्रति समाज को सजग करना शामिल है। परिवार समाज की सबसे बड़ी ताकत है और समाज की एकता से ही राष्ट्र मजबूत होता है।
उन्होंने कहा कि जातिगत भेदभाव समाज की कमजोरी है और इसे समाप्त करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें जाति के भेद भूलकर एकात्मता और समरसता का भाव विकसित करना चाहिए। उन्होंने नागरिकों से अपने गांव, गली और मोहल्ले को स्वच्छ, सुंदर और विकसित बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। जिज्ञासा समाधान सत्र में उपस्थितजनों के प्रश्नों के उत्तर मुख्य वक्ता ने दिए।
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