आतंकियों से मिला था अल्लाह हू अकबर बोलने वाला जिपलाइन ऑपरेटर?

अहमदाबाद के ऋषि भट्ट पहलगाम में हुए आतंकी हमले के दौरान बाल-बाल बचे। ज़िपलाइनिंग करते समय, उन्होंने देखा कि ऑपरेटर 'अल्लाहु अकबर' बोल रहा था जिसके तुरंत बाद गोलीबारी शुरू हो गई। ऋषि ने ज़िपलाइन से कूदकर अपनी पत्नी और बच्चे के साथ गड्ढे में छिपकर जान बचाई। NIA ने जिपलाइन ऑपरेटर से पूछताछ शुरू कर दी है।

Apr 29, 2025 - 05:28
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आतंकियों से मिला था अल्लाह हू अकबर बोलने वाला जिपलाइन ऑपरेटर?
अहमदाबाद : ऋषि भट्ट नाम के शख्स के कुछ वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं। ये वीडियो हैं 22 अप्रैल के पहलगाम इलाके में शूट किए गए। जिस समय बैसरन घाटी पर पर्यटकों पर गोलियां बरसाई गईं। इनके सामने आने के बाद जो सच्चाई सामने आई है, वह हिला देने वाली है। अहमदाबाद के रहने वाले ऋषि भट्ट के वीडियो में दिख रहा है कि वह ज़िपलाइनिंग कर रहे हैं और नीचे गोलियां बरस रही हैं। खास बात है कि जिपलाइन वाले ने आतंकी हमले के बाद भी उन्हें जिपलाइन पर मरने के लिए भेज दिया। हालांकि ऋषि की जान बच गई। जो एक और नोटिस करने वाली बात है, वह यह कि जिस समय जिपलाइन ऑपरेटर ने ऋषि को छोड़ा वह आतंकियों की फायरिंग पर अल्लाह हू अकबर कर रहा था। फिलहाल एनआईए ने उस जिपलाइन ऑपरेटर को हिरासत में ले लिया है।ऋषि ने बताया कि जिपलाइन में उनकी पत्नी पहले गईं। उसके बाद उनका बेटा और तीसरी बार वह गए। उन्होंने बताया कि जब घर आने के बाद उन्होंने वीडियो देखे तो हैरान हो गए। उन्होंने ध्यान दिया कि में जिपलाइन ऑपरेटर ने उन्हें छोड़ने के बाद तीन बार सिर हिलाकर अल्लाह-हू-अकबर बोला।

नीचे लाशें देखकर घबराए

जिपलाइन ऑपरेटर को अल्लाह हू अकबर बोलने के बाद ताबड़तोड़ फायरिंग होने लगती है। वह ऋषि को छोड़ देता है। हालांकि ऋषि को जब एहसास होता है कि आतंकी हमला हुआ है तो वह घबरा गए, नीचे लाशें पड़ी थीं। उन्होंने तुरंत बीच में ही जिपलाइन रोक दिया और हुक खोलकर लगभग 20 फीट की ऊंचाई से कूद गए। नीचे आकर अपनी पत्नी और बच्चे के साथ वहां से जान बचाकर भागे।

जिपलाइन वाले पर शक

यह आतंकी हमला 22 अप्रैल को हुआ था। यह जगह पर्यटकों के बीच बहुत मशहूर है। आतंकियों ने यहां 26 पर्यटकों को गोली मार दी। ऋषि भट्ट ने बताया कि उन्हें ज़िपलाइन चलाने वाले कश्मीरी पर शक है। उसने तीन बार 'अल्लाहु अकबर' बोला, और फिर गोलीबारी शुरू हो गई। ऋषि भट्ट ने कहा, 'मुझसे पहले 9 लोगों ने ज़िपलाइनिंग की, लेकिन ऑपरेटर ने कुछ नहीं कहा। जब मैं स्लाइड कर रहा था, तब उसने यह बोला और फिर फायरिंग शुरू हो गई। मुझे उस आदमी पर शक है। वह एक आम कश्मीरी जैसा दिखता था।'

गड्ढे में छिपकर बचाई जान

ऋषि ने बताया कि हमने देखा कि लोग एक गड्ढे जैसी जगह पर छिप रहे थे। वहां किसी को आसानी से नहीं देखा जा सकता था। हम भी वहीं छिप गए। ऋषि भट्ट के अनुसार, गोलीबारी 8-10 मिनट तक चली। फिर थोड़ी देर के लिए रुकी, और फिर दोबारा शुरू हुई और 4-5 लोगों को गोली मार दी गई। उन्होंने बताया कि जब हम गेट पर पहुंचे, तो हमने देखा कि स्थानीय लोग पहले ही जा चुके थे। एक टट्टू गाइड हमें वहां से दूर ले गया, हमें जल्द ही भारतीय सेना के जवान भी हमारे सामने मिल गए। उन्होंने सभी पर्यटकों को कवर दिया...सेना ने 20-25 मिनट के भीतर पहलगाम को कवर कर लिया। जब सेना ने हमें सुरक्षा प्रदान की तो हम सुरक्षित महसूस कर रहे थे।

लोग कश्मीरी लोगों पर उठा रहे सवाल

ऋषि के वीडियो सामने आने के बाद लोग जिपलाइन ऑपरेटर पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उन्होंने उसके अल्लाह हू अकबर बोलकर ऋषि को जिपलाइन पर छोड़ने पर भी सवाल किए। लोगों ने कहा कि फायरिंग के दौरान वह डरा नहीं आराम से खड़ा है। उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं दिख रही है। वह न तो घबराया न ही डरा। आराम से खड़ा है जैसे कुछ हुआ ही न हो। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे साबित होता है कि स्थानीय लोग आतंकियों से मिले हैं।
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