मणिपुर – जेलियांगरोंग हेराका मंदिर का उद्घाटन

नागा पहाड़ी के शिखर पर स्थित मणिपुर के तमेंन्लोंग जिले के लुग्काऊ गांव में रोंगमई नागा समाज के लोग रहते हैं। 24 दिसंबर 2025 को लुग्काऊ गांव में प्रात: काल से ही लोगों की चहलपहल शुरु हो गई थी। गांव के सभी लोग और बाहर से पधारे लगभग सौ से अधिक अतिथि भी स्नानादी से […] The post मणिपुर – जेलियांगरोंग हेराका मंदिर का उद्घाटन appeared first on VSK Bharat.

Jan 8, 2026 - 20:40
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मणिपुर – जेलियांगरोंग हेराका मंदिर का उद्घाटन

नागा पहाड़ी के शिखर पर स्थित मणिपुर के तमेंन्लोंग जिले के लुग्काऊ गांव में रोंगमई नागा समाज के लोग रहते हैं। 24 दिसंबर 2025 को लुग्काऊ गांव में प्रात: काल से ही लोगों की चहलपहल शुरु हो गई थी। गांव के सभी लोग और बाहर से पधारे लगभग सौ से अधिक अतिथि भी स्नानादी से निवृत्त होकर तैयार होकर गांव के पुजारी के घर (पाईकी) के पास जमा हो रहे थे। अब जक दिन भी नहीं खुला था। ठंडी हवा बह रही थी। धीरे –धीरे लगभग 300 लोग जमा हो गए। ठीक 5.30 बजे जेलियांगरोंग हेराका (हिन्दू) समाज के लोग ढोल के ताल पर पारंपरिक गीत गाने लगे।

समाज प्रमुखों के नेतृत्व में धीरे-धीरे चहल कदमी करते हुए लोगों का कारवां आगे जाने लगा। और सभी लोग पहुँचे हेराका मंदिर (केलुमकाई) के पास। इसमें महिला पुरुष बच्चे सब थे, फिर भी कोई अनावश्यक भाग दौड़ नहीं, शोर शराबा नहीं। सभी लोग मंदिर के प्रांगण में खड़े हो गए और तीन युवक पारंपरिक प्रार्थना का परिधान पहनकर पूर्व दिशा की ओर मुंह कर के खड़े हो गए।

सामने पहाड़ों से सूर्य भगवान ने धीरे-धीरे दर्शन देना शुरु किया और सभी लोग सुस्वर धीर गंभीर स्वर में भगवान सूर्य की प्रार्थना करने लगे। सामने खड़े तीन युवक प्रार्थना के ताल पर सूर्य देवता को  प्रणाम करते हुए नृत्य करने लगे। बाद में पुजारी ने प्रार्थना की। पश्चात सभी लोगों ने मंदिर में प्रवेश किया और भगवान की वेदी पर जाकर भक्तिभाव से मस्तक टेकने लगे। भावना से पूरित भक्ति का दर्शन हो रहा था। पुजारी एवं जेलियांगरोंग हेराका समाज के प्रमुखों का मार्गदर्शन सभी को प्राप्त हुआ।

प्रसाद रूप भोजन के बाद सभी बंधु-भगिनी रानी गाईदिन्ल्यू की समाधी के पास बनाए पंडाल में एकत्रित हुए। सम्मेलन में स्वागत गीत, पारंपरिक नृत्य का प्रदर्शन मनमोहक रहा। मंचासीन अतिथियों का स्वागत सम्मान किया गया। गाँव के सचिव ने मंदिर का इतिहास एवं पुनर्निर्माण के कार्य का हिसाब सामने रखा।

गाँव में हेराका पंथ के संस्थापक हेपाऊ जादोनांग ने लगभग 100 वर्ष पूर्व जो प्रथम 4 मंदिर बनाए, उसमें इस लुग्काऊ गांव में मंदिर बनाया। रानी गाईदिन्ल्यू का जन्म इसी गाँव में 1915 में हुआ था। जादोनांग के साथ गाईदिन्ल्यू भी 1928 से (13 वर्ष की आयु में) हेराका पंथ के भक्ति आंदोलन एवं स्वतंत्रता आन्दोलन में कंधे से कंधा मिलाकर सक्रिय रहीं। ब्रिटिश सैनिकों ने यह मंदिर तोड़ दिया था। समय समय पर निर्माण हुआ। लेकिन सभी लोगों ने उसे भव्य बनाने की योजना बनाकर पुनर्निर्माण किया। इस कार्य में लगभग 40 लाख की लागत आई है, विशेष यह कि 55 परिवार वाले इस गाँव के लोगों ने ही 28 लाख रुपये का सहयोग जुटाया। गाँव के लोगों के कच्चे घर हैं, लेकिन मंदिर भव्य बनाया है। हर परिवार से लगभग 50 हजार का सहयोग मिला है। समाज में भक्तिभाव जगता है तो समर्पण की भावना भी प्रबल होती है।

कार्यक्रम में अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सुदर्शन भगत जी, विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मंत्री अरुण जी नेटके, कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय संगठन मंत्री अतुल जोग एवं हेराका संगठन के प्रमुख हेगाऊकाम्बे पामे जी उपस्थित रहे।

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