व्यवसाय के साथ राष्ट्र धर्म, समाज धर्म का भी पालन हो – दत्तात्रेय होसबाले जी

काशी, 24 जनवरी। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित युवा व्यवसायी सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि भारतीय उद्योगों में तकनीकी के साथ रोजगार सृजन भी आवश्यक है, हर हाथ को काम मिलना चाहिए। वर्तमान परिवेश में सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय का ध्यान रखना आवश्यक है। व्यवसाय को […] The post व्यवसाय के साथ राष्ट्र धर्म, समाज धर्म का भी पालन हो – दत्तात्रेय होसबाले जी appeared first on VSK Bharat.

Jan 27, 2026 - 08:14
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व्यवसाय के साथ राष्ट्र धर्म, समाज धर्म का भी पालन हो – दत्तात्रेय होसबाले जी

काशी, 24 जनवरी। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित युवा व्यवसायी सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि भारतीय उद्योगों में तकनीकी के साथ रोजगार सृजन भी आवश्यक है, हर हाथ को काम मिलना चाहिए। वर्तमान परिवेश में सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय का ध्यान रखना आवश्यक है। व्यवसाय को सुदृढ़ करने हेतु गांव से पलायन अनिवार्य नहीं है। व्यवसाय के साथ राष्ट्र धर्म, समाज धर्म का भी पालन हो।

उन्होंने कहा कि संघ का लक्ष्य भारत को वैभव के शिखर पर पहुंचाना है। यह शिखर भौतिक और आर्थिक रूप से सुदृढ़ तो होगा ही, परंतु आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी मजबूती आवश्यक है। भारत में आयोजित जी-20 सम्मेलन का उल्लेख करते हुए वक्ता ने कहा कि उस सम्मेलन का घोष वाक्य था एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य। वास्तव में यह उक्ति भारत की प्राचीन काल से आत्मा रही है, हमने इसी दृष्टि से देखा और ऐसा ही व्यवहार जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में किया है। एंगस मेडिसन नामक पश्चिमी विद्वान ने अध्ययन से निष्कर्ष निकाला कि बाहरी आक्रमणकारियों के आने से पूर्व दुनिया में भारत की आर्थिक क्षेत्र में 23% हिस्सेदारी थी।

युवा व्यवसायियों के चरित्र संबंधी गुणों की चर्चा करते हुए सरकार्यवाह जी ने कहा कि संघ ने राष्ट्रीय चरित्र तथा व्यक्तिगत चरित्र विकसित करने का प्रयास किया है। राष्ट्रीय धर्म को निभाने के लिए युग धर्म को देखना होगा। देश के पराभव काल में मनुष्य का धर्म अलग था, तब भामाशाह जैसे व्यक्ति महाराणा प्रताप को दान देते हैं, यही राष्ट्रीय चरित्र है। सामाजिक समरसता के संदर्भ में कहा कि जिस प्रकार किसी खिलाड़ी के मैडल लाने पर हम उसकी जाति नहीं देखते, सीमा पर किसी सैनिक के बलिदान होने पर हम उसकी जाति नहीं देखते। सामान्य जीवन में भी हमें यही भावना दिखानी होगी। राष्ट्र है तो हम हैं, समाज है तो हम हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इसी भावना को युवा व्यवसायियों में जागृत करने का प्रयास करता है। भारत में रोजगार को बढ़ाने के लिए सरकार के साथ-साथ समाज की सहभागिता भी आवश्यक है। हमें अपने देश की शिक्षा, अर्थ, न्याय, प्रशासन के क्षेत्र में भी परिवर्तन करना होगा। सरकार से आवश्यक बातों की मांग करना हमारा अधिकार है, पर समाज के सुशिक्षित लोगों को अपने आत्म बल से कार्य को आगे बढ़ाना होगा। समाज की चेतना केवल मीडिया के मध्य चर्चा का विषय ना होकर हमारे कार्यों में दिखनी चाहिए। भारत के बदलते चित्र में कौन सा रंग भरना है, यह युवा व्यवसायियों पर निर्भर करता है। हमारा समाज चेतना युक्त, सकारात्मक चिंतन युक्त होना चाहिए। सज्जन शक्ति को एक साथ जोड़ने का प्रयत्न सतत् चलना चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून के भरोसे ना होकर सामाजिक नैतिकता द्वारा होनी चाहिए। मतांतरण, राष्ट्र विरोधी हिंसा फैलाने वाली शक्तियों के विरुद्ध समाज को जागृत होना होगा।

जिज्ञासा समाधान में सरकार्यवाह जी ने ग्रामीण भारत के स्वावलंबन के संदर्भ में बताया कि समाज में सब प्रकार के लोग जब एक साथ विकास की रस्सी को खींचेंगे, तभी स्वावलंबी ग्रामीण भारत आगे आएगा। व्यापार में विश्वास के संकट पर कहा कि विश्वास अर्जित करना व्यापारी का धर्म है, व्यापारी स्वत: न्यायमित्र बने और अपने ग्राहक से संवाद स्थापित करे। मंच पर काशी विभाग के सह विभाग संघचालक त्रिलोक जी भी उपस्थित रहे।

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