दिल्ली में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के समर्थन में प्रदर्शन, अभिनेता वरुण शर्मा भी हुए शामिल
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दिल्ली में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के समर्थन में प्रदर्शन, अभिनेता वरुण शर्मा भी हुए शामिल
नई दिल्ली:
one nation one election जंतर-मंतर पर रविवार को संविधान सपोर्ट ग्रुप द्वारा ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के समर्थन में एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के साथ बॉलीवुड अभिनेता वरुण शर्मा भी शामिल हुए।
प्रदर्शन के दौरान वरुण शर्मा ने कहा, "यह बहुत अच्छी पहल है। मैं 2-3 महीने से इस बारे में पढ़ रहा हूं। आप भी जितनी जानकारी प्राप्त कर सकें, उतनी जानकारी लें। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से देश का बहुत समय बचेगा और प्रशासनिक कार्यों में भी सुधार आएगा।"
क्या है ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’?
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‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का मतलब है कि पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं। वर्तमान में भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं, जिससे बार-बार चुनावी प्रक्रिया से सरकार और प्रशासन का ध्यान बंटता है।
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के फायदे:
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सरकारी खर्च में कमी: बार-बार चुनाव कराने से सरकारी संसाधनों पर भारी खर्च होता है। यदि चुनाव एक साथ हों, तो इससे खर्च कम किया जा सकता है।
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प्रशासनिक कार्यों में सुधार: चुनावों के कारण सरकारी कामकाज पर असर पड़ता है। एक साथ चुनाव कराने से प्रशासनिक कार्यों में रुकावट कम होगी।
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स्थिरता: लगातार चुनावी माहौल से राजनीतिक अस्थिरता बनी रहती है। एक साथ चुनाव होने से सरकार को पूरे कार्यकाल के लिए स्थिरता मिलेगी।
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मतदाताओं की भागीदारी: बार-बार चुनाव से लोगों की मतदान में रुचि कम हो सकती है। एक बार में चुनाव होने से मतदान प्रतिशत बढ़ सकता है।
विपक्ष और चुनौतियाँ:
हालांकि, कुछ राजनीतिक दल और विशेषज्ञ इस विचार का विरोध भी करते हैं। उनके अनुसार:
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संविधान में बदलाव की आवश्यकता होगी।
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राज्य सरकारों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।
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यदि किसी राज्य सरकार को भंग किया जाता है, तो दोबारा चुनाव कैसे होंगे?
सरकार का रुख:
भारत सरकार इस विचार पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी। हाल ही में इस विषय पर संसद में भी चर्चा हुई है, और आने वाले समय में इस पर कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर समर्थन और विरोध दोनों मौजूद हैं। जहां एक ओर यह खर्च कम करने और प्रशासनिक स्थिरता लाने का सुझाव देता है, वहीं दूसरी ओर यह संवैधानिक और तकनीकी चुनौतियों से भी जुड़ा हुआ है। इस मुद्दे पर अभी और भी व्यापक चर्चा की जरूरत है।