कृष्ण कूप की पूजा के अधिकार के लिए अर्जी

ज्ञानवापी में लोहे का जूता रैक ले जाने का मां श्रृंगार गौरी मुकदमे की वादी महिलाओं ने विरोध किया है। उन्होंने बुधवार को कमिश्नर, पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी को पत्र देकर जूता रैक हटाने की मांग की है।

कृष्ण कूप की पूजा के अधिकार के लिए अर्जी

कृष्ण कूप की पूजा के अधिकार के लिए अर्जी

मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामला

मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले में जन्मभूमि के पक्षकार अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से कृष्ण कूप की पूजा के अधिकार की मांग की है। उन्होंने इस आशय की अर्जी दाखिल की है। अधिवक्ता के अनुसार मस्जिद की सीढ़ियों के पास कृष्ण कूप है। इस कुएं का निर्माण बज्रनाभ ने कराया था।

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यह भी कहा गया है कि मुस्लिम पक्ष, हिंदुओं के पूजा करने का विरोध करता है। पिछली बार पुलिस बल की तैनाती के बाद पूजन किया गया था। इस अर्जी पर अभी कोई आदेश नहीं हुआ है। इलाहाबाद हाई कोर्ट में श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह मस्जिद विवाद की सुनवाई 13 मार्च को नियत है। पिछली दो सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष की तरफ से दलील रखी गई। मस्जिद पक्ष की तरफ से सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता तसनीम अहमदी का कहना था कि सिविल वाद पोषणीय ही नहीं है।


परिसर में नहीं है कोई कूप, बस्ती वासियों ने खुद बनाया थाः शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी के सचिव तनवीर अहमद कहते हैं कि शाही मस्जिद ईदगाह में इस तरह का कोई कूप नहीं है। परिसर के बाहर एक कुआं है। इसका निर्माण बस्ती वालों ने कराया था। यह कई वर्ष पूर्व बंद हो गया है। हाई कोर्ट में दिया प्रार्थना पत्र निरर्थक है। ज्ञानवापी से जूता रैक हटाने की वादी महिलाओं ने मांग की 

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ज्ञानवापी में लोहे का जूता रैक ले जाने का मां श्रृंगार गौरी मुकदमे की वादी महिलाओं ने विरोध किया है। उन्होंने बुधवार को कमिश्नर, पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी को पत्र देकर जूता रैक हटाने की मांग की है। वादी महिलाओं ने पत्र में लिखा है कि ज्ञानवापी का मामला अदालत में विचाराधीन है। इसके बावजूद अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद बिना किसी आदेश और सहमति के जूता-चप्पल रखने वाला रैक परिसर में बैरिकेडिंग के अंदर ले गया।

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अदालत की अनुमति के बिना परिसर में किसी भी प्रकार का फेरबदल गैरकानूनी है। ज्ञानवापी हिंदू व सनातन धर्म के लोगों की आस्था का केंद्र है। वहां परिवर्तन के लिए अदालत से या दोनों पक्षों की सहमति ली जाती है। जूता रैक अंदर ले जाते समय ऐसा नहीं किया गया।