माया से मोह का एक पल: भंवरलाल रघुनाथ दोशी का 600 करोड़ का साम्राज्य छोड़कर साधु बने
बिजनेसमैन का संन्यासी जीवन Success Story
इस अरबपति कारोबारी ने 2015 में 'संन्यासी' या भिक्षु के जीवन को अपनाने के लिए अपनी
करोड़ों की संपत्ति त्याग दी. किसी समय यह दिल्ली में 'प्लास्टिक किंग' के रूप में पहचान रखते थे.
भंवरलाल रघुनाथ दोशी की यह अनूठी कहानी बताती है कि कैसे एक सफल बिजनेसमैन ने संन्यासी जीवन को अपनाया। उन्होंने अपने पिता से मिली विरासत को त्यागकर एक नए जीवन की ओर कदम रखा।
भंवरलाल रघुनाथ दोशी का बिजनेस उनके पिता के छोटे कपड़ा व्यापार से शुरू हुआ था, जो महज 30,000 रुपये की पूंजी से आरंभ हुआ था। इस छोटे व्यापार से शुरू होकर उन्होंने एक करोड़ों की फर्म बनाई।
इसके बाद, भंवरलाल रघुनाथ दोशी ने सूरीश्वरजी महाराज के मार्गदर्शन में भिक्षुत्व ग्रहण किया। इस रूप में, उन्होंने अपने समृद्धि भरे व्यापार से संन्यासी जीवन की राह चुनी। इसके पीछे सूरीश्वरजी महाराज के उपदेश और धार्मिक भक्ति के प्रति उनकी भावना थी।
इस रूप में, भंवरलाल रघुनाथ दोशी ने अपनी 600 करोड़ की संपत्ति को त्यागकर भिक्षु बनने का समर्थन किया और एक साधु की जीवनशैली को अपनाया। उन्होंने दिल्ली में 'प्लास्टिक किंग' के रूप में जाने जाते हुए एक पल में अपने बड़े साम्राज्य को ठुकरा दिया और साधु बनने का मार्ग चुना।
भंवरलाल रघुनाथ दोशी की कहानी हमें यह सिखाती है कि पैसा और समृद्धि के बावजूद, धार्मिक भक्ति और आत्मा के साथ संबंध बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने आत्मनिर्भरता और आत्मा की खोज में अपने जीवन को दिखाने का निर्णय किया, जिससे उन्होंने अपने बिजनेस साम्राज्य को छोड़कर एक नए और सत्याग्रही जीवन की ओर कदम बढ़ाया।