देश विदेश का इतिहास 1 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ जरुर जाने
1 फरवरी के दिन कई ऐतिहासिक घटनाएँ घटी हैं, जिनमें भारत और विश्व से जुड़ी प्रमुख घटनाएँ शामिल हैं। देश विदेश का इतिहास 1 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ जरुर जाने, आज का इतिहास, 1 फरवरी का इतिहास, 1 फरवरी की प्रमुख घटनाएँ, इतिहास में आज का दिन, 1 फरवरी को क्या हुआ था, भारतीय इतिहास, विश्व इतिहास, महत्वपूर्ण घटनाएँ, प्रसिद्ध व्यक्तित्व, ऐतिहासिक घटनाएँ, 1 फरवरी के जन्मदिवस, 1 फरवरी की पुण्यतिथि, आज का दिन विशेष, इतिहास में आज, Today in History, February 1 History, Historical Events on February 1
1 फरवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
1 फरवरी का दिन इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी रहा है, जिनमें भारतीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाएँ शामिल हैं। इस दिन की कुछ प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं
1 फरवरी 1786 - लॉर्ड कार्नवालिस भारत के गवर्नर जनरल बने
लॉर्ड कार्नवालिस 1786 में भारत के गवर्नर जनरल बने। वे ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रभावशाली प्रशासक और सैन्य अधिकारी थे। उनके कार्यकाल में प्रशासनिक सुधारों के तहत स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) लागू किया गया, जिससे जमींदारी व्यवस्था को मजबूती मिली। इसके अलावा, उन्होंने भारतीय सिविल सेवा में सुधार किए और कंपनी शासन को व्यवस्थित किया। कार्नवालिस को 1793 में बंगाल में न्यायिक व प्रशासनिक सुधारों के लिए भी जाना जाता है। वे 1805 में फिर से भारत लौटे, लेकिन कुछ ही महीनों बाद उनकी मृत्यु हो गई।
1 फरवरी 1790 - न्यूयार्क शहर में पहली बार 'सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स' का आयोजन
1 फरवरी 1790 को न्यूयॉर्क शहर में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट का पहला सत्र आयोजित किया गया। यह अमेरिका की न्यायिक व्यवस्था की एक ऐतिहासिक घटना थी। सुप्रीम कोर्ट की स्थापना अमेरिकी संविधान के तहत की गई थी और यह देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था बनी। पहले सत्र में छह जजों ने भाग लिया, जिनमें मुख्य न्यायाधीश जॉन जे भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी संविधान की व्याख्या करना और संघीय कानूनों की समीक्षा करना था। वर्तमान में यह न्यायालय अमेरिका की न्यायिक प्रणाली की सबसे ऊंची संस्था है।
1 फरवरी 1793 - फ्रांस ने यूनाइटेड किंगडम और नीदरलैंड पर युद्ध की घोषणा की
फ्रांस की क्रांतिकारी सरकार ने 1 फरवरी 1793 को यूनाइटेड किंगडम और नीदरलैंड के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। यह युद्ध फ्रांसीसी क्रांतिकारी युद्धों का हिस्सा था, जिसे 'फर्स्ट कोएलिशन वार' (First Coalition War) कहा जाता है। फ्रांस में क्रांति के बाद यूरोपीय शक्तियों को डर था कि क्रांति उनके देशों में भी फैल सकती है, इसलिए उन्होंने फ्रांस के खिलाफ मोर्चा बनाया। फ्रांस ने इन युद्धों में अपनी सैन्य शक्ति का विस्तार किया और अंततः 1804 में नेपोलियन बोनापार्ट की सत्ता में वृद्धि हुई। यह युद्ध यूरोप में सत्ता संतुलन को बदलने वाला साबित हुआ।
1 फरवरी 1797 - लॉर्ड कार्नवालिस ने बंगाल के गवर्नर जनरल के पद की शपथ ली
लॉर्ड कार्नवालिस 1 फरवरी 1797 को दूसरी बार बंगाल के गवर्नर जनरल बने। उनके इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्रशासनिक सुधारों और न्याय प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किए। उनके द्वारा लागू किया गया स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) भारत में ब्रिटिश शासन की नीतियों में एक महत्वपूर्ण आर्थिक बदलाव था। इस नीति के तहत किसानों और जमींदारों के बीच एक नई व्यवस्था लागू की गई, जिसने राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया को स्थिर किया। कार्नवालिस ने भारतीय सिविल सेवा में सुधार करते हुए भ्रष्टाचार कम करने की दिशा में भी प्रयास किए।
1 फरवरी 1814 - फिलीपींस में ज्वालामुखी विस्फोट से 1,200 लोगों की मृत्यु
1 फरवरी 1814 को फिलीपींस के मायोन ज्वालामुखी (Mayon Volcano) में भयानक विस्फोट हुआ, जिससे लगभग 1,200 लोगों की मृत्यु हो गई। मायोन ज्वालामुखी अपनी शंक्वाकार आकृति और लगातार होने वाले विस्फोटों के लिए प्रसिद्ध है। इस विनाशकारी घटना के दौरान लावा और राख ने कई गांवों को तबाह कर दिया था। इस विस्फोट के कारण आसपास के इलाकों में कृषि को भारी नुकसान पहुंचा और पर्यावरणीय असंतुलन उत्पन्न हुआ। यह घटना फिलीपींस के इतिहास में सबसे घातक ज्वालामुखी आपदाओं में से एक मानी जाती है।
1 फरवरी 1827 - कलकत्ता बंगाल क्लब की स्थापना
1 फरवरी 1827 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में 'बंगाल क्लब' की स्थापना हुई। यह क्लब ब्रिटिश अधिकारियों और समाज के संभ्रांत वर्ग के लिए बनाया गया था। यह उस समय का एक महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्र था, जहां प्रशासनिक अधिकारी, व्यवसायी और बुद्धिजीवी एकत्र होते थे। बंगाल क्लब का उद्देश्य औपनिवेशिक प्रशासन के बीच सामाजिक संपर्क को बढ़ावा देना था। यह भारत के शुरुआती सामाजिक क्लबों में से एक था और ब्रिटिश साम्राज्य की सांस्कृतिक और राजनीतिक नीतियों को प्रभावित करने का एक प्रमुख स्थल बन गया था।
1 फरवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
1835 - ईस्ट इंडिया कंपनी ने दार्जिलिंग को सिक्किम के पट्टे पर लिया
1 फरवरी 1835 को ईस्ट इंडिया कंपनी ने दार्जिलिंग को सिक्किम से पट्टे पर लिया। उस समय दार्जिलिंग एक छोटा पहाड़ी क्षेत्र था, जिसे ब्रिटिश अधिकारियों ने सैन्य और स्वास्थ्य उद्देश्यों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान माना। इसे एक सैनिटोरियम और हिल स्टेशन के रूप में विकसित किया गया। दार्जिलिंग बाद में चाय उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हुआ और ब्रिटिश शासन के दौरान एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल बन गया। इस क्षेत्र का प्रशासनिक नियंत्रण धीरे-धीरे ब्रिटिश भारत के हाथ में चला गया और यह एक महत्वपूर्ण ब्रिटिश संपत्ति बन गया।
1835 - मॉरीशस में 'गुलामी प्रथा' का समापन
1 फरवरी 1835 को मॉरीशस में औपचारिक रूप से गुलामी प्रथा समाप्त कर दी गई। ब्रिटिश सरकार ने 1833 में 'स्लेवरी एबॉलिशन एक्ट' पारित किया था, जिसके तहत ब्रिटिश उपनिवेशों में दास प्रथा को समाप्त किया जाना था। मॉरीशस में बड़ी संख्या में अफ्रीकी और भारतीय मूल के लोग दास के रूप में काम कर रहे थे। दास प्रथा समाप्त होने के बाद ब्रिटिश सरकार ने 'गिरमिटिया मजदूर प्रणाली' लागू की, जिसके तहत बड़ी संख्या में भारतीयों को मॉरीशस ले जाया गया। इस ऐतिहासिक बदलाव से मॉरीशस की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना में बड़ा परिवर्तन आया।
1855 - ईस्ट इंडिया रेलवे का विधिवत उद्घाटन
1 फरवरी 1855 को ईस्ट इंडिया रेलवे का विधिवत उद्घाटन हुआ। यह भारत में रेलवे के शुरुआती विकास का एक महत्वपूर्ण चरण था। इस रेलवे लाइन ने औपनिवेशिक शासन के दौरान माल और यात्री परिवहन को आसान बनाया। ईस्ट इंडिया रेलवे ने औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया और ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में रेल नेटवर्क के विस्तार की नींव रखी। यह रेलवे प्रणाली बाद में भारतीय रेलवे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई, जिसने देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1881 - दिल्ली के सबसे पुराने कॉलेज सेंट स्टीफन कॉलेज की स्थापना
1 फरवरी 1881 को दिल्ली में सेंट स्टीफन कॉलेज की स्थापना हुई। यह कॉलेज दिल्ली का सबसे पुराना शिक्षण संस्थान है और इसे ब्रिटिश मिशनरियों ने स्थापित किया था। सेंट स्टीफन कॉलेज उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक बन गया। यह कॉलेज शुरू में चांदनी चौक में स्थापित हुआ था, लेकिन बाद में इसे नॉर्थ कैंपस, दिल्ली विश्वविद्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया। यहां से कई प्रमुख राजनीतिज्ञ, विद्वान और प्रशासक निकले हैं। आज भी यह कॉलेज अकादमिक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है।
1884 - डाक बीमा योजना लागू हुई
1 फरवरी 1884 को भारत में डाक बीमा योजना लागू की गई। इस योजना का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को बीमा सुरक्षा प्रदान करना था। डाक बीमा योजना को भारतीय डाक विभाग द्वारा संचालित किया गया और इसे विशेष रूप से सरकारी कर्मचारियों के लिए शुरू किया गया था। यह योजना बाद में विस्तारित हुई और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए भी उपलब्ध कराई गई। यह भारत की सबसे पुरानी बीमा योजनाओं में से एक है और आज भी कई लोगों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान कर रही है।
1884 - 'ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी' का पहला वॉल्यूम 'A to Ant' प्रकाशित
1 फरवरी 1884 को 'ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी' (OED) का पहला वॉल्यूम 'A to Ant' प्रकाशित हुआ। यह अंग्रेजी भाषा की सबसे प्रतिष्ठित और व्यापक शब्दकोश परियोजनाओं में से एक थी। इस डिक्शनरी का उद्देश्य अंग्रेजी भाषा के शब्दों का ऐतिहासिक और व्याकरणिक विश्लेषण प्रस्तुत करना था। इसकी शुरुआत 1857 में हुई थी, और इसका पहला संस्करण कई वर्षों तक विकसित होता रहा। OED आज भी अंग्रेजी भाषा के विकास और इतिहास को समझने का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और लगातार अपडेट होता रहता है।
1908 - पुर्तगाल नरेश कार्लोस प्रथम और युवराज लुइस फिलिप की हत्या
1 फरवरी 1908 को पुर्तगाल के राजा कार्लोस प्रथम और उनके पुत्र युवराज लुइस फिलिप की लिस्बन में हत्या कर दी गई। इस राजनीतिक हत्याकांड के पीछे पुर्तगाल की अस्थिर राजनीतिक स्थिति और गणतंत्रवादी आंदोलन थे। हत्या के बाद मैनुअल द्वितीय को पुर्तगाल का नया शासक घोषित किया गया, लेकिन उनकी सत्ता भी अधिक समय तक नहीं चल पाई। 1910 में पुर्तगाल में क्रांति हुई और देश को गणराज्य घोषित कर दिया गया। इस घटना ने पुर्तगाल के राजशाही युग के अंत की नींव रखी।
1922 - महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन तेज करने की जानकारी भारत के वायसराय को दी
1 फरवरी 1922 को महात्मा गांधी ने भारत के वायसराय को पत्र लिखकर असहयोग आंदोलन को और तेज करने की सूचना दी। यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण चरण था, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के खिलाफ शांतिपूर्ण असहयोग करना था। गांधीजी ने जनता से ब्रिटिश वस्त्रों और सरकारी संस्थानों का बहिष्कार करने का आह्वान किया। हालांकि, फरवरी 1922 में चौरी चौरा कांड के बाद गांधीजी ने आंदोलन को वापस ले लिया, लेकिन इस आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी और स्वराज की मांग को मजबूत किया।
1 फरवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
1924 - यू.एस.एस.आर. और यूनाइटेड किंगडम ने एक-दूसरे को मान्यता दी
1 फरवरी 1924 को सोवियत संघ (यू.एस.एस.आर.) ने यूनाइटेड किंगडम को औपचारिक मान्यता प्रदान की और इसके बदले ब्रिटेन ने भी सोवियत संघ को मान्यता दी। यह निर्णय अक्टूबर क्रांति (1917) और गृहयुद्ध के बाद सोवियत संघ की स्थिरता को स्वीकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। इससे पहले पश्चिमी देश सोवियत संघ को मान्यता देने में झिझक रहे थे, लेकिन बढ़ते राजनीतिक और आर्थिक कारकों के चलते ब्रिटेन ने यह फैसला किया। इस मान्यता ने सोवियत संघ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करने में मदद की।
1949 - 'प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया' ने 'एसोसिएटेड प्रेस ऑफ इंडिया' का अधिग्रहण किया
1 फरवरी 1949 को 'प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया' (PTI) ने 'एसोसिएटेड प्रेस ऑफ इंडिया' (API) का अधिग्रहण कर लिया। API भारत की पहली समाचार एजेंसियों में से एक थी, लेकिन स्वतंत्रता के बाद इसे एक अधिक स्वतंत्र और सशक्त समाचार एजेंसी की आवश्यकता थी। PTI का गठन इसी उद्देश्य से किया गया था, जिससे भारतीय पत्रकारिता को मजबूती मिली। यह अधिग्रहण भारतीय मीडिया जगत में एक बड़ा बदलाव था, जिससे समाचारों का प्रसार अधिक व्यापक और प्रभावी हुआ। आज भी PTI भारत की प्रमुख समाचार एजेंसियों में से एक है।
1953 - नीदरलैंड, बेल्जियम, इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में आई भीषण बाढ़
1 फरवरी 1953 को नीदरलैंड, बेल्जियम, इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में विनाशकारी बाढ़ आई, जिससे 2500 से अधिक लोगों की मौत हुई। अकेले नीदरलैंड में 1836 लोगों की जान गई। इस आपदा का मुख्य कारण एक शक्तिशाली उत्तरी सागर तूफान था, जिसने समुद्री जल स्तर को खतरनाक रूप से बढ़ा दिया। नीदरलैंड में इस बाढ़ के बाद 'डेल्टा वर्क्स' परियोजना शुरू की गई, जिसमें बड़े पैमाने पर जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण प्रणाली विकसित की गई। यह घटना यूरोप के सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक मानी जाती है।
1956 - दक्षिण अफ्रीका ने सोवियत संघ के वाणिज्य दूतावास के कर्मचारियों को वापिस बुलाने की माँग की
1 फरवरी 1956 को दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने सोवियत संघ से उसके वाणिज्य दूतावास के कर्मचारियों को वापस बुलाने की मांग की। यह मांग उस समय की शीत युद्ध की राजनीति से जुड़ी थी। दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद (Apartheid) नीति लागू थी, और सोवियत संघ रंगभेद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध कर रहा था। दक्षिण अफ्रीका की सरकार को डर था कि सोवियत दूतावास कम्युनिस्ट विचारधारा के प्रसार में सहायता कर सकता है, इसलिए उसने इस प्रकार का कदम उठाया। यह घटना शीत युद्ध के दौरान कूटनीतिक संघर्षों का एक उदाहरण थी।
1958 - मिस्र और सीरिया को 'यूनाइटेड अरब रिपब्लिक' में मिला दिया गया
1 फरवरी 1958 को मिस्र और सीरिया को मिलाकर 'यूनाइटेड अरब रिपब्लिक' (UAR) का गठन किया गया। यह अरब देशों के एकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था। इस संघ का नेतृत्व मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्देल नासिर ने किया। हालांकि, यह एकीकरण लंबे समय तक नहीं चला और 1961 में सीरिया ने खुद को इस संघ से अलग कर लिया। इसके बावजूद, मिस्र 1971 तक आधिकारिक रूप से 'यूनाइटेड अरब रिपब्लिक' के नाम का उपयोग करता रहा। यह घटना अरब राष्ट्रवाद की एक महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति थी।
1964 - भारत में 'यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया' (UTI) की स्थापना
1 फरवरी 1964 को भारत में 'यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया' (UTI) की स्थापना हुई। यह भारत की पहली म्यूचुअल फंड संस्था थी, जिसे सरकार ने पूंजी बाजार को बढ़ावा देने और छोटे निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू किया था। UTI ने भारतीयों को बचत और निवेश की नई सुविधाएं प्रदान कीं और देश में म्यूचुअल फंड उद्योग की नींव रखी। बाद में 2002 में इसे पुनर्गठित किया गया और अलग-अलग वित्तीय संस्थानों में विभाजित किया गया। UTI आज भी भारतीय वित्तीय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
1972 - 'भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विमानपतन प्राधिकरण' का गठन
1 फरवरी 1972 को 'भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विमानपतन प्राधिकरण' (IAAI) की स्थापना की गई। यह प्राधिकरण मुख्य रूप से भारत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के प्रबंधन और संचालन के लिए बनाया गया था। IAAI ने भारतीय हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में 1995 में इसे 'भारतीय विमानपतन प्राधिकरण' (Airports Authority of India - AAI) में विलय कर दिया गया, जिससे हवाई अड्डों की समग्र निगरानी और संचालन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हुई।
1 फरवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
1974 - ब्राजील के साओ पाउलो में बैंक की इमारत में आग, 227 लोगों की मृत्यु
1 फरवरी 1974 को ब्राजील के साओ पाउलो शहर में जोएलमा बैंक बिल्डिंग में भीषण आग लग गई। यह इमारत 25 मंजिला थी और इस हादसे में 227 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए। आग लगने का मुख्य कारण विद्युत शॉर्ट सर्किट माना गया। इस दुर्घटना ने ऊँची इमारतों में अग्नि सुरक्षा उपायों की गंभीरता को उजागर किया और इसके बाद भवन सुरक्षा नियमों को सख्त किया गया। यह घटना ब्राजील के इतिहास की सबसे भीषण आग त्रासदियों में से एक मानी जाती है।
1974 - क्वालालंपुर को संघीय क्षेत्र घोषित किया गया
1 फरवरी 1974 को मलेशिया की राजधानी क्वालालंपुर को आधिकारिक रूप से 'संघीय क्षेत्र' (Federal Territory) घोषित किया गया। इससे पहले यह सेलांगोर राज्य का हिस्सा था, लेकिन इसे सीधे मलेशिया सरकार के प्रशासन के अधीन लाया गया। यह कदम क्वालालंपुर के तेजी से शहरीकरण और आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए उठाया गया था। आज क्वालालंपुर मलेशिया का सबसे बड़ा और आर्थिक रूप से समृद्ध शहर है, जो वैश्विक व्यापार और पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।
1976 - 'राष्ट्रीय संवाद समिति समाचार' का गठन
1 फरवरी 1976 को भारत में 'राष्ट्रीय संवाद समिति समाचार' (संवाद) की स्थापना की गई। यह समाचार एजेंसी भारत सरकार द्वारा संचालित की गई थी और इसका उद्देश्य विश्वसनीय व सटीक समाचार प्रसारित करना था। इसका गठन भारत में समाचार एजेंसियों को एक संगठित और प्रभावी रूप देने के लिए किया गया था। बाद में इसे 'संवाद समिति' के रूप में जाना जाने लगा और यह भारत के मीडिया नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।
1977 - 'भारतीय तट रक्षक बल' (Indian Coast Guard) का गठन
1 फरवरी 1977 को भारत सरकार ने 'भारतीय तट रक्षक बल' (Indian Coast Guard) की स्थापना की। यह बल समुद्री सुरक्षा, तस्करी रोकथाम, बचाव कार्यों और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों के लिए गठित किया गया। भारतीय तटरक्षक बल रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और यह समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी स्थापना के बाद से, यह संगठन भारतीय समुद्री क्षेत्र में लगातार सुरक्षा और निगरानी कार्यों को प्रभावी ढंग से अंजाम दे रहा है।
1977 - भारत के पहले राष्ट्रीय रेल संग्रहालय की स्थापना, दिल्ली
1 फरवरी 1977 को दिल्ली में भारत के पहले 'राष्ट्रीय रेल संग्रहालय' (National Rail Museum) की स्थापना हुई। यह संग्रहालय भारतीय रेलवे के समृद्ध इतिहास और विकास को दर्शाने के लिए बनाया गया। इसमें कई ऐतिहासिक रेल इंजनों, भाप इंजनों, सैलून और कोचों को प्रदर्शित किया गया है। यह संग्रहालय भारतीय रेलवे के तकनीकी और सांस्कृतिक विकास को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है और आज भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
1979 - 14 वर्षों के निर्वासन के बाद अयातुल्ला खुमैनी का ईरान आगमन
1 फरवरी 1979 को ईरान में इस्लामिक क्रांति के नेता अयातुल्ला रुहोल्ला खुमैनी 14 वर्षों के निर्वासन के बाद वापस ईरान लौटे। वे 1964 में ईरान के शाह (शासक) द्वारा निर्वासित किए गए थे और इस दौरान उन्होंने फ्रांस में शरण ली थी। उनकी वापसी के साथ ही ईरान में इस्लामिक क्रांति ने तेजी पकड़ी और कुछ ही दिनों में शाह के शासन का अंत हो गया। इसके बाद ईरान में इस्लामिक गणराज्य (Islamic Republic of Iran) की स्थापना हुई और खुमैनी देश के सर्वोच्च नेता बने।
1985 - मोहम्मद अजहरुद्दीन का लगातार तीन टेस्ट शतक का विश्व रिकॉर्ड
1 फरवरी 1985 को भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन ने कानपुर में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में शतक बनाया। यह उनका लगातार तीसरा टेस्ट शतक था, जिससे वे अपने पहले तीन टेस्ट मैचों में लगातार तीन शतक बनाने वाले पहले क्रिकेटर बने। यह उपलब्धि क्रिकेट इतिहास में एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड बन गई और अजहरुद्दीन ने अपनी शानदार बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत में एक अलग पहचान बनाई। उनके इस रिकॉर्ड को आज भी भारतीय क्रिकेट की महान उपलब्धियों में गिना जाता है।
1991 - अफगानिस्तान और पाकिस्तान में भूकंप, करीब 1200 लोगों की मौत
1 फरवरी 1991 को अफगानिस्तान और पाकिस्तान में भयानक भूकंप आया, जिसमें करीब 1200 लोगों की जान चली गई। यह भूकंप रिक्टर स्केल पर 6.8 की तीव्रता का था और इसने कई गांवों को पूरी तरह तबाह कर दिया। हजारों लोग घायल हुए और कई मकान जमींदोज़ हो गए। इस आपदा के बाद राहत एवं बचाव कार्य तेजी से शुरू किया गया, लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राहत पहुंचाने में कई चुनौतियाँ आईं। यह भूकंप क्षेत्र की सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक था।
1992 - भोपाल गैस त्रासदी: वारेन एंडरसन फरार घोषित
1 फरवरी 1992 को भोपाल के मुख्य न्यायाधीश ने यूनियन कार्बाइड कंपनी के पूर्व सीईओ वारेन एंडरसन को फरार घोषित कर दिया। 1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी में हजारों लोग मारे गए थे और लाखों लोग जहरीली गैस से प्रभावित हुए थे। इस मामले में वारेन एंडरसन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही थी, लेकिन वह भारत से भाग गए थे। भारत सरकार ने उन्हें प्रत्यर्पित करने की कोशिश की, लेकिन वह कभी भारत नहीं लौटे। यह घटना आज भी न्याय और उत्तरदायित्व की एक महत्वपूर्ण मिसाल बनी हुई है।
1992 - दिल्ली का नाम बदलकर 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली' रखा गया
1 फरवरी 1992 को भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से दिल्ली को 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली' (National Capital Territory of Delhi - NCT) घोषित किया। इससे पहले, दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) के रूप में जाना जाता था। इस बदलाव के साथ दिल्ली को सीमित राज्यस्तरीय प्रशासनिक अधिकार मिले और इसे एक विशेष प्रशासनिक इकाई का दर्जा प्राप्त हुआ। यह निर्णय दिल्ली की बढ़ती जनसंख्या और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया था।