बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और होली का महत्व
कौन हैं बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री?
बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बागेश्वर धाम सरकार के प्रमुख और एक प्रसिद्ध कथावाचक हैं। उनका जन्म 4 जुलाई 1996 को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में हुआ था। वे अपने प्रवचनों और दिव्य दरबार के लिए प्रसिद्ध हैं, जहां वे लोगों की समस्याओं का समाधान करने का दावा करते हैं। उनके भक्तों की संख्या लाखों में है, और वे हिंदू धर्म, सनातन परंपराओं और राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का होली पर बयान
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने होली पर पानी बचाने की अपील को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, "आप साल के 364 दिन पानी बचा सकते हैं, लेकिन होली का पर्व रंगों और उमंग का होता है। इसे पूरे उत्साह के साथ मनाना चाहिए। त्योहार बदलने की बात न करें, बल्कि अपना व्यवहार बदलने की बात करें।"
होली का महत्व और परंपरा
होली हिंदू धर्म के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है, जिसे रंगों का पर्व कहा जाता है। यह फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
होली से जुड़ी पौराणिक कथा
होली का सबसे प्रसिद्ध पौराणिक संदर्भ भक्त प्रहलाद और हिरण्यकश्यप से जुड़ा है। दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने अपने भक्त पुत्र प्रहलाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को आग में बैठने का आदेश दिया, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद बच गए और होलिका जलकर राख हो गई। इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन की परंपरा है।
होली मनाने की परंपरा
- होलिका दहन – होली से एक दिन पहले रात को लकड़ियों और गोबर के उपलों से अग्नि जलाई जाती है, जो बुराई के अंत का प्रतीक है।
- रंग वाली होली – अगले दिन लोग रंग, गुलाल और पानी से होली खेलते हैं और आनंदोत्सव मनाते हैं।
- विशेष व्यंजन – इस दिन गुजिया, ठंडाई, मालपुआ और अन्य पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं।
- सामाजिक समरसता – होली एक ऐसा पर्व है जिसमें सभी लोग जाति, धर्म और सामाजिक भेदभाव भूलकर एक साथ मिलते हैं।
क्या वाकई होली पर पानी बचाना जरूरी है?
पिछले कुछ वर्षों से होली के दौरान पानी बचाने की अपील की जाने लगी है। हालांकि, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का मानना है कि होली जैसे उत्सवों पर पानी बचाने की चिंता करने के बजाय हमें अपने रोजमर्रा के जीवन में जल संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना है कि पूरे साल पानी बचाया जा सकता है, लेकिन त्योहारों की खुशी को बनाए रखना भी जरूरी है।
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान यह दर्शाता है कि हमें अपनी परंपराओं और त्योहारों को संजोते हुए जल संरक्षण की आदत भी विकसित करनी चाहिए। होली एक ऐसा पर्व है जो प्रेम, भाईचारे और उत्साह का संदेश देता है। ऐसे में इसे पूरे आनंद और उमंग के साथ मनाना चाहिए, लेकिन साथ ही जल संरक्षण का ध्यान भी रखना चाहिए ताकि यह पर्व आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।