1 अगस्त 1863 – ज़िन्दाँ रानी का निधन
1 August 1863 Death of Rani Zinda, 1 अगस्त 1863 – ज़िन्दाँ रानी का निधन
1 अगस्त 1863 – ज़िन्दाँ रानी का निधन
1 अगस्त 1863 को सिख साम्राज्य के इतिहास की एक प्रभावशाली और साहसी महिला, ज़िन्दाँ रानी (Maharani Jind Kaur) का निधन हुआ। वे पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह की पाँचवीं पत्नी और उनके सबसे छोटे पुत्र महाराजा दलीप सिंह की माँ थीं। उन्हें इतिहास में अक्सर "ज़िन्दाँ रानी" के नाम से जाना जाता है।
जीवन परिचय
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जन्म – लगभग 1817, चचार, पंजाब में
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पिता – सरदार मन्ना सिंह औलख जाट
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विवाह – महाराजा रणजीत सिंह से विवाह कर महारानी बनीं
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संतान – महाराजा दलीप सिंह (सिख साम्राज्य के अंतिम शासक) की माता
सिख साम्राज्य में भूमिका
रणजीत सिंह की मृत्यु (1839) के बाद सिख साम्राज्य में राजनीतिक अस्थिरता फैल गई। इस कठिन समय में ज़िन्दाँ रानी ने अपने नाबालिग बेटे दलीप सिंह की रानी रीजेंट के रूप में गद्दी संभाली और राज्य के मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई।
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उन्होंने राजनीतिक चालबाज़ियों और दरबारी षड्यंत्रों का मजबूती से सामना किया।
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ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बढ़ते प्रभाव का विरोध किया।
संघर्ष और निर्वासन
ब्रिटिशों ने उनके प्रभाव को अपने शासन के लिए खतरा माना।
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1847 में उन्हें सत्ता से हटा दिया गया और कड़ी निगरानी में रखा गया।
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बाद में उन्हें शेखूपुरा किला और फिर चunar किले में कैद किया गया।
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1849 में सिख साम्राज्य के पतन के बाद उन्हें निर्वासन में भेज दिया गया।
अंतिम वर्ष
काफी संघर्ष और निर्वासन झेलने के बाद 1861 में वे अपने बेटे दलीप सिंह से इंग्लैंड में जाकर मिलीं।
1 अगस्त 1863 को इंग्लैंड में ही उनका निधन हुआ। उनके साहस और संघर्ष की कहानियाँ आज भी पंजाब के इतिहास में अमर हैं।
विरासत
ज़िन्दाँ रानी को उनकी बहादुरी, राजनीतिक सूझ-बूझ और मातृत्व के लिए याद किया जाता है। वे न केवल महारानी थीं, बल्कि सिख साम्राज्य के गौरव और स्वतंत्रता की प्रतीक भी थीं।