छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता के बारे में तो सभी जानते हैं
छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता के बारे में तो सभी जानते हैं
छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता के बारे में तो सभी जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग उस महान स्त्री को जानते हैं, जिन्होंने उन्हें गढ़ा—निर्भीक और दूरदर्शी राजमाता जीजाबाई।
योद्धा लखूजी जाधव की पुत्री जीजाबाई ने बचपन से ही साहस और नेतृत्व की सीख पाई थी। उनका विवाह शाहजी भोसले से हुआ, जो एक महान सेनानायक थे। लेकिन जीजाबाई सिर्फ एक पत्नी और माँ नहीं थीं—वह एक कुशल योद्धा, बुद्धिमान प्रशासक और रणनीतिकार थीं, जिन्होंने शिवाजी को स्वराज्य का सपना दिखाया और उसे साकार करने की प्रेरणा दी।
हाथ में तलवार और मन में विवेक, उन्होंने शिवाजी को इतिहास, मूल्य और साहस की सीख दी, जिसने मराठा साम्राज्य की नींव रखी।
उन्होंने अपने पति की जागीर को संभाला, पुणे को विकसित किया, मंदिरों का निर्माण करवाया, और शिवाजी के मन में स्वराज्य, न्याय और मातृभूमि के प्रति अटूट भक्ति की भावना जगाई।
कुशल घुड़सवार और तलवारबाज जीजाबाई न सिर्फ एक माँ थीं, बल्कि एक अदम्य शक्ति थीं, जिनकी दूरदृष्टि और संकल्प ने शिवाजी महाराज को भारत के महानतम सम्राटों में से एक बनने का मार्ग दिखाया।
"माँ सिर्फ पालनेवाली नहीं, एक राष्ट्रनिर्माता होती है।"
राजमाता जीजाऊ ने अपने अडिग संकल्प से इसे सिद्ध किया और एक ऐसे वीर राजा को गढ़ा, जिसने भारत का इतिहास ही बदल दिया।
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