दिल्ली शब्दोत्सव – साहित्य, संस्कृति और विचारों का महाकुम्भ

नई दिल्ली। मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में भारत अभ्युदय विषय पर आधारित दिल्ली शब्दोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। 02 से 04 जनवरी तक आयोजित होने वाले तीन दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव में भारतीय ज्ञान, धर्म, दर्शन, साहित्य, संस्कृति, सिनेमा और कला के क्षेत्र से संबंधित नामी हस्तियां उपस्थित रहने वाली हैं। दिल्ली शब्दोत्सव का आयोजन […] The post दिल्ली शब्दोत्सव – साहित्य, संस्कृति और विचारों का महाकुम्भ appeared first on VSK Bharat.

Jan 1, 2026 - 20:01
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दिल्ली शब्दोत्सव – साहित्य, संस्कृति और विचारों का महाकुम्भ

नई दिल्ली।

मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में भारत अभ्युदय विषय पर आधारित दिल्ली शब्दोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। 02 से 04 जनवरी तक आयोजित होने वाले तीन दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव में भारतीय ज्ञान, धर्म, दर्शन, साहित्य, संस्कृति, सिनेमा और कला के क्षेत्र से संबंधित नामी हस्तियां उपस्थित रहने वाली हैं। दिल्ली शब्दोत्सव का आयोजन दिल्ली सरकार व सुरुचि प्रकाशन द्वारा किया जा रहा है।

तीन दिनों तक चलने वाले महोत्सव में प्रत्येक दिन पांच सत्रों का आयोजन होगा, जिनमें विषय मर्मज्ञ विषय पर ज्ञान और अनुभव साझा करेंगे। महोत्सव के उद्घाटन सत्र में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता,  दिल्ली सरकार में संस्कृति और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा, सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली उपस्थित रहेंगे।

शब्दोत्सव 2026 युवाओं में संवाद, तर्क और रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करने वाला मंच बनेगा। यह डिजिटल युग की पीढ़ी को भारतीय मूल्यों और सांस्कृतिक जड़ों से भावनात्मक रूप से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है। पहले दिन उद्घाटन सत्र के बाद दो सत्रों का आयोजन होगा, जिनमें स्वावलंबन से शौर्य और भीतर का रण : आंतरिक मोर्चे की चुनौतियां विषय पर विशेषज्ञ अपने अनुभव और विचार साझा करेंगे। इसमें पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल राकेश भदौरिया, छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी शामिल रहेंगे। दूसरे दिन अगल-अलग सत्रों में हिन्दू इतिहास, मिथक और सत्य, सिनेमा में हिन्दू, वंदे मातरम और बंगाल तथा दक्षिणपथ आदि विषयों पर चर्चा का आयोजन होगा और इनमें मिथिलेशनंदिनी शरण, सुधांशु त्रिवेदी, मुकुल कानिटकर आदि विषय मर्मज्ञ वक्ता भाग लेंगे। तीसरे दिन संघे शक्ति कलियुगे, ऑब्जेक्शन मी लॉर्ड, Gen Z डायलॉग्स : विकसित भारत के सारथी और समापन सत्र भारत की भारतीय अवधारणा आदि विषयों पर चर्चा का आयोजन होगा।

तीन दिवसीय महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन होगा। पहले दिन माधवाज़ बैंड और हर्षदीप कौर, दूसरे दिन पांडवाज़ बैंड और प्रहलाद सिंह टिपड़ियां और आखिरी दिन साधो बैंड और हंसराज रघुवंशी सांस्कृतिक प्रस्तुति देंगे।

महोत्सव में साहित्यिक मंच से तीन दिनों  में न्यूक्लियर टाइटन, रिकास्टिंग द इंडोस्फियर, पंच परिवर्तन, ऑपरेशन सिंदूर, शत वर्षीय संघ आदि 40 से अधिक पुस्तकों का विमोचन किया जाएगा। सांस्कृतिक मंच से भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करने वाली प्रस्तुतियों का मंचन होगा। भरतनाट्यम, कथक, भजन संध्या, कवि सम्मलेन और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन जैसे कार्यक्रमों का आयोजन होगा। ओपन माइक के मंच से लोगों को अपनी सृजनात्मक शक्ति को प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त होगा।

महोत्सव भारत की संस्कृति, साहित्य, सिनेमा और कला को लेकर नए विमर्श को आकार देने का काम करेगा। अभी तक भारतीयों के अंदर संस्कृति, साहित्य, सिनेमा और कला को लेकर वह सकारात्मक दृष्टिकोण नहीं उपजा है, जिसकी आवश्यकता है। देश की राजधानी से भारत, भारतीय और भारतीयता पर आधारित विमर्श को नई दिशा मिलेगी, जिससे भारत फिर से विश्व का प्रतिनिधित्व करने के लिए अग्रसर हो सके।

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