प्रतिष्ठा द्वादशी – देश की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक आजादी का दिन

अयोध्या, 31 दिसंबर। व्यास गद्दी पर आसीन जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि प्रतिष्ठा द्वादशी देश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आजादी का दिवस है। सभी रामलला के चरणों में नतमस्तक हैं, इससे अधिक आजादी क्या चाहिए? यह ऐसे नहीं मिला, इसके लिए विवादित ढांचे को गिरा कर टाट में रहना पड़ा। अब अगर […] The post प्रतिष्ठा द्वादशी – देश की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक आजादी का दिन appeared first on VSK Bharat.

Jan 1, 2026 - 20:01
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प्रतिष्ठा द्वादशी – देश की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक आजादी का दिन

अयोध्या, 31 दिसंबर। व्यास गद्दी पर आसीन जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि प्रतिष्ठा द्वादशी देश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आजादी का दिवस है। सभी रामलला के चरणों में नतमस्तक हैं, इससे अधिक आजादी क्या चाहिए? यह ऐसे नहीं मिला, इसके लिए विवादित ढांचे को गिरा कर टाट में रहना पड़ा। अब अगर सोए तो पुनः समस्त मंदिर चले जाएंगे। इसके लिए जागृत होना होगा। इसको स्थिर करने के लिए, गतिमान करने के लिए वर्तमान परंपरा और पीढ़ी के लोगों को जागृत होना होगा।

बालक राम की कथा को विस्तार देते हुए कहा कि ज्ञान की पराकाष्ठा लिए कागभुशुन्डिऔर देवाधिदेव महादेव अयोध्या की गलियों में महीनों घूमते रहे। वे बालक राम के दर्शन चाहते थे। संत प्रवर ने “बंदउं बाल रूप सोइ रामू… चौपाई के माध्यम से बालक राम की वंदना की और बताया कि

निर्गुण औऱ सगुण में उतना ही भेद है, जितना बर्फ और पानी में है। सगुण बालक राम के पास हाथ, पैर सब है। जब अधर्म बढ़ता है, तब भगवान मानव रूप में देह धारण करते हैं और सज्जनों की पीड़ा का हरण करते हैं। केवल भजन करते रहें और साधु की संगति नहीं हुई तो अहंकार हो जाता है। “जो करते रहोगे भजन धीरे-धीरे, तो मिल जाएगा वो सजन धीरे-धीरे” गीत पर श्रोता झूम उठे। भजन में साधु कृपा और भगवत कृपा दो बातों का ध्यान रखना होता है। असुर प्रवृत्ति का लक्षण बताते हुए कहा – जो माता पिता व देवता को नहीं मानता, साधुओं सज्जनों से अपनी सेवा कराते हैं, ऐसे लोग मनुष्य देह में भी असुर हैं। जिसने अपने मन का मंथन कर भक्ति रूपी नवनीत में परिवर्तित कर लिया, वह पुनः सांसारिक बंधनों में नहीं बंध सकता।

उन्होंने अयोध्या में राम जन्म के पूर्व अधिकांश देवी-देवताओं के विभिन्न स्वरूपों में आने की कथा की व्याख्या की और रामजन्म तक की कथा सुनाई।

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