ट्रंप की मनमानी देख क्‍या भारत ने बदली चाल? चीन के साथ केमिस्‍ट्री बना मैसेज भेजने की तैयारी

भारत और चीन के बीच सीमा तनाव कम होने के बाद सरकार आर्थिक रिश्तों को सुधारने पर विचार कर रही है। अमेरिका की ओर से टैरिफ कम करने के दबाव के तहत भारत कुछ प्रतिबंध हटाने और चीनी निवेश को आकर्षित करने पर ध्यान दे रहा है। इसे लेकर मंथन चल रहा है।

Mar 24, 2025 - 17:27
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ट्रंप की मनमानी देख क्‍या भारत ने बदली चाल? चीन के साथ केमिस्‍ट्री बना मैसेज भेजने की तैयारी
नई दिल्‍ली: भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कम होने के बाद सरकार दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को सुधारने पर विचार कर रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अमेरिका भारत पर टैरिफ कम करने का दबाव डाल रहा है। सरकार उन प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर रही है जो 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद चीन पर लगाए गए थे। इससे व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। सरकार चीनी कर्मियों के लिए वीजा नियमों को आसान बनाने और कुछ चीनी ऐप्स को फिर से अनुमति देने पर भी विचार कर रही है। भारत सरकार चीन से निवेश को भी आकर्षित करना चाहती है ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे को कम किया जा सके। कुछ लोगों का मानना है कि चीन के साथ व्यापारिक संबंधों को सामान्य करने से अमेरिका को एक संकेत जा सकता है।इंडियन एक्‍सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कुछ कम होने के बाद नीति निर्माता अब द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए तैयार हैं। इसे एक अच्छा मौका माना जा रहा है। 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद भारत ने चीन पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे। अब, सरकार उन प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर रही है।

अमेरिका को भेजा जाएगा मैसेज

ऐसा इसलिए है क्योंकि अमेरिका भारत पर टैरिफ कम करने का दबाव डाल रहा है। भारत सरकार को लगता है कि चीन के साथ व्यापारिक संबंधों को सुधारने से उसे अमेरिका से बेहतर डील करने में मदद मिल सकती है। सरकार चीनी कर्मियों के लिए वीजा नियमों को आसान बनाने और कुछ चीनी ऐप्स को फिर से अनुमति देने पर भी विचार कर रही है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।भारत सरकार चीन से निवेश को भी आकर्षित करना चाहती है ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे को कम किया जा सके। भारत चीन से ज्यादा सामान खरीदता है, लेकिन चीन को कम सामान बेचता है। इससे भारत को नुकसान होता है। कुछ लोगों का मानना है कि चीन के साथ व्यापारिक संबंधों को सामान्य करने से अमेरिका को एक संकेत जा सकता है। अमेरिका को लगेगा कि भारत अब उस पर निर्भर नहीं है और वह चीन के साथ भी व्यापार कर सकता है।र‍िपोर्ट में बताया गया है क‍ि वित्त मंत्रालय ने हाल ही में कुछ प्रतिबंधों को हटाने के पक्ष में एक प्रेजेंटेशन दिया है। लेकिन, वित्त मंत्रालय, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया है।सूत्रों का कहना है कि गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने में बीआईएस (भारतीय मानक ब्यूरो) प्रमाणन शामिल हो सकता है। बीआईएस प्रमाणन का मतलब है कि चीन से आयातित सामान को भारत सरकार की ओर से निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा।

संबंध सुधारने के ल‍िए क्‍यों बन रहा है माहौल?

एक सूत्र ने कहा, 'चीन के साथ व्यापारिक संबंधों को सुधारना जरूरी है, खासकर ट्रंप के बाद के युग में। यह सिर्फ समय की बात है, लेकिन इसे कैसे किया जाएगा, यह सरकार के भीतर बहस का विषय है। व्यापार और गैर-व्यापार बाधाओं को हटाना वैसे भी उद्योग की मांग है, खासकर छोटे और मध्यम उद्यमों की।'सरकार इन्‍फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल चीनी श्रमिकों/तकनीशियनों के लिए वीजा नीति को भी आसान बना सकती है। इससे भारत में इन्‍फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।पिछले कुछ वर्षों में, भारत सरकार ने भारत में काम करने वाले चीनी व्यक्तियों के लिए वीजा विस्तार की समीक्षा प्रक्रिया को कड़ा कर दिया है। अब, सरकार उस प्रक्रिया को आसान बनाने पर विचार कर रही है।एक सूत्र ने कहा, 'चूंकि हमें टैरिफ कम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, इसलिए टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करना समझ में आता है, खासकर उन इनपुट और उत्पादों पर जो भारत में बड़े पैमाने पर नहीं बनते हैं। इसलिए सरकार में यह विचार है कि चीन के साथ व्यापार को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करने के लिए कुछ नहीं किया जाएगा। लेकिन, कुछ बाधाओं को हटाया जा सकता है। इसके लिए भी भारतीय उद्योग एक पिच बना रहा है। इसमें भारतीय बंदरगाहों पर चीन से आने वाले सामान पर पूरी तरह से प्रतिबंध और प्रतिबंधों को रद्द करना शामिल हो सकता है।'

चीन भी संबंध सुधारने के ल‍िए इच्‍छुक

भारत ही नहीं, चीन भी भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को बहाल करने का इच्छुक है। चीन चाहता है कि भारत में उसकी कंपनियों को निवेश करने की अनुमति दी जाए।एक अन्य सूत्र ने कहा, 'बातचीत कुछ समय से चल रही है और आने वाले हफ्तों में छूट की घोषणा की जा सकती है। यह वाशिंगटन को भी एक संकेत देगा कि भारत फिर से चीन के साथ व्यापार करना शुरू कर सकता है।'विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मार्च की शुरुआत में लंदन में कहा था कि 'ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति भारत के लिए उपयुक्त है क्योंकि यह एक बहुध्रुवीय दुनिया की ओर ले जाती है।' इसका मतलब है कि भारत अब सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहता है और वह दुनिया के अन्य देशों के साथ भी व्यापार करना चाहता है।वित्‍त वर्ष 2023-24 में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 118.40 अरब डॉलर था। इसका मतलब है कि दोनों देशों के बीच बहुत अधिक व्यापार होता है।

आंकड़े क्‍या दे रहे हैं संकेत?

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, चीन दो साल के अंतराल के बाद वित्‍त वर्ष 2023-24 में एक बार फिर अमेरिका को पछाड़कर भारत का शीर्ष व्यापारिक भागीदार बन गया है। इसका मतलब है कि भारत चीन से ज्यादा सामान खरीदता है जितना वह अमेरिका से खरीदता है।वित्‍त वर्ष 2023-24 में चीन की भारत के कुल आयात में 15 फीसदी हिस्सेदारी थी। इसका मतलब है कि भारत में आयातित होने वाले सामान का 15 फीसदी चीन से आता है। भारत ने दुनिया से 675.42 अरब डॉलर का माल आयात किया। इसमें चीन से 101.74 अरब डॉलर का माल शामिल है। दूसरी ओर, चीन अप्रैल 2000-सितंबर 2024 तक 2.5 अरब डॉलर के संचयी FDI के साथ भारत में FDI इक्विटी प्रवाह में केवल 22वें स्थान पर रहा। इसका मतलब है कि चीन भारत में ज्यादा निवेश नहीं करता है।सूत्रों ने कहा कि द्विपक्षीय निवेश में बढ़ोतरी दोनों देशों के बीच ट्रेडिंग वॉल्‍यूम में विस्तार के साथ तालमेल नहीं बिठा पाई है। बीजिंग में निवेश प्रवाह को बढ़ाने की भूख है। यानी चीन भारत में अधिक निवेश करना चाहता है। आगे चलकर भारतीय पक्ष की ओर से कुछ रियायतें हो सकती हैं। इसका मतलब है कि भारत चीन को अधिक निवेश करने की अनुमति दे सकता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 में भी भारत से चीन से निवेश को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया गया था। जबकि तैयार माल के आयात को हतोत्साहित किया गया था, जहां स्थानीय मूल्यवर्धन की गुंजाइश बहुत कम है।

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@Dheeraj kashyap युवा पत्रकार- विचार और कार्य से आने वाले समय में अपनी मेहनत के प्रति लगन से समाज को बेहतर बना सकते हैं। जरूरत है कि वे अपनी ऊर्जा, साहस और ईमानदारी से र्काय के प्रति सही दिशा में उपयोग करें , Bachelor of Journalism And Mass Communication - Tilak School of Journalism and Mass Communication CCSU meerut / Master of Journalism and Mass Communication - Uttar Pradesh Rajarshi Tandon Open University पत्रकारिता- प्रेरणा मीडिया संस्थान नोएडा 2018 से केशव संवाद पत्रिका, प्रेरणा मीडिया, प्रेरणा विचार पत्रिका,